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44 डिग्री की गर्मी में NCC कैंप बना ‘बीमारी का अड्डा’! जबलपुर में 31 कैडेट्स अचानक पड़े बीमार, 10 ICU में भर्ती


जबलपुर NCC कैंप में भीषण गर्मी के बीच 31 कैडेट्स बीमार पड़े। उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन से 10 ICU में भर्ती।

मध्य प्रदेश के जबलपुर में चल रहा एनसीसी ट्रेनिंग कैंप अचानक हड़कंप का कारण बन गया, जब भीषण गर्मी के बीच 31 कैडेट्स की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, घबराहट और कमजोरी की शिकायत के बाद सभी बच्चों को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें 10 कैडेट्स की हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया। शुरुआती जांच में लू, डिहाइड्रेशन, दूषित पानी और फूड पॉइजनिंग जैसी आशंकाएं सामने आई हैं। लगातार 44 से 45 डिग्री तापमान के बीच खुले मैदान में चल रही ट्रेनिंग को लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

450 कैडेट्स के बीच अचानक फैली तबीयत बिगड़ने की खबर

जबलपुर के ट्रिपल आईटीडीएम परिसर में 14 मई से एनसीसी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। इस कैंप में जबलपुर समेत आसपास के कई जिलों से करीब 450 कैडेट्स शामिल हुए थे। कैंप का उद्देश्य कैडेट्स को अनुशासन, फिजिकल ट्रेनिंग और सैन्य गतिविधियों का प्रशिक्षण देना था। यह शिविर 24 मई तक चलना तय था, लेकिन अब इस कैंप पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि गुरुवार रात अचानक कई कैडेट्स की तबीयत खराब होने लगी। कुछ बच्चों को तेज पेट दर्द हुआ तो कई बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं। कई कैडेट्स ने चक्कर, घबराहट और कमजोरी की शिकायत भी की। हालत बिगड़ती देख कैंप प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से बच्चों को विक्टोरिया जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में भर्ती किए गए बच्चों में 15 लड़के और 16 लड़कियां शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ बच्चों की स्थिति ज्यादा खराब थी, इसलिए उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय पर इलाज मिलने के बाद सभी बच्चों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

भीषण गर्मी बनी सबसे बड़ा खतरा, 45 डिग्री तापमान में चल रही थी ट्रेनिंग

जबलपुर में पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। शहर का तापमान लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में खुले मैदान में लंबे समय तक ट्रेनिंग करना बच्चों की सेहत पर भारी पड़ता दिख रहा है। कई कैडेट्स ने बताया कि दिनभर की फिजिकल एक्टिविटी और तेज धूप के कारण उन्हें पहले से कमजोरी महसूस हो रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी अधिक गर्मी में शरीर तेजी से पानी खोता है। यदि समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स न मिलें तो डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और बेहोशी जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। बच्चों की अचानक बिगड़ी हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने भी सबसे पहले लू लगने और डिहाइड्रेशन की आशंका जताई।

कुछ कैडेट्स ने दावा किया कि खाना खाने के बाद उनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई। इसके चलते फूड पॉइजनिंग की आशंका भी बढ़ गई है। वहीं कई बच्चों ने कैंप में इस्तेमाल किए जा रहे पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी भी बीमारी का कारण हो सकता है।

अस्पताल में मचा हड़कंप, डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी

जैसे ही बड़ी संख्या में बच्चों को अस्पताल लाया गया, जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया। डॉक्टरों की कई टीमों को तुरंत अलर्ट किया गया। बच्चों का इलाज शुरू किया गया और लगातार उनकी मॉनिटरिंग की जाने लगी। जिन बच्चों को ज्यादा परेशानी थी, उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया।

विक्टोरिया अस्पताल के सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी ने बताया कि रात करीब 8 बजे से बच्चों को अस्पताल लाया जाना शुरू हुआ था। किसी को पेट दर्द था, किसी को उल्टियां हो रही थीं, जबकि कुछ बच्चों को चेस्ट पेन और घबराहट की शिकायत थी।

डॉक्टरों ने सभी बच्चों के ईसीजी, खून, पेशाब और इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा फूड इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि बीमारी की असली वजह सामने आ सके।

डॉक्टरों का कहना है कि अभी किसी एक कारण की पुष्टि नहीं की जा सकती। कुछ बच्चों ने खाना खाने की बात कही, जबकि कुछ ने खाना नहीं खाया था। इसी तरह कुछ बच्चों ने पानी को वजह बताया तो कुछ ने भीषण गर्मी को जिम्मेदार ठहराया। इसलिए सभी संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।

कैंप के खाने और पानी के सैंपल लिए जाएंगे

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। फूड इंस्पेक्टर डॉक्टर अमित गुप्ता को कैंप पहुंचकर खाने-पीने की सामग्री के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कहीं भोजन खराब तो नहीं था या पानी दूषित तो नहीं था।

स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंप की रसोई, पानी की टंकियों और भोजन तैयार करने की व्यवस्था की भी जांच करेगी। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में बड़े कैंप आयोजित करते समय साफ पानी, ठंडे वातावरण और पर्याप्त मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी समस्या में बदल सकती है।

डॉक्टरों ने कैंप खत्म करने की दी सलाह

डॉक्टर नवीन कोठारी ने कहा कि जिस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है, उसे देखते हुए फिलहाल कैंप को समाप्त कर देना चाहिए। उनका कहना है कि अगले कई दिनों तक तापमान कम होने की संभावना नहीं है और ऐसे में बच्चों की सेहत को जोखिम में डालना ठीक नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि बीमार बच्चों को देखकर बाकी कैडेट्स का मनोबल भी प्रभावित होता है। मानसिक दबाव और डर भी बच्चों की सेहत पर असर डाल सकता है। इसलिए स्थिति सामान्य होने तक ऐसे आउटडोर कैंपों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।

परिजनों में बढ़ी चिंता, प्रशासन पर उठे सवाल

घटना की जानकारी मिलते ही बीमार बच्चों के परिजनों में चिंता बढ़ गई। कई अभिभावक देर रात अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर परिजन परेशान नजर आए। कई लोगों ने कैंप प्रशासन की तैयारियों पर सवाल भी उठाए।

परिजनों का कहना है कि इतनी भीषण गर्मी में बच्चों से लगातार आउटडोर ट्रेनिंग कराना बेहद जोखिम भरा फैसला था। यदि पहले से पर्याप्त मेडिकल इंतजाम किए गए होते तो शायद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बीमार नहीं पड़ते।

अब प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है। एनसीसी अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने गर्मी के बीच आयोजित हो रहे ट्रेनिंग कैंपों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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