कानपुर में ITBP जवान मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा, अस्पताल की लापरवाही पर FIR और जांच के आदेश।
कानपुर में इंसाफ की गुहार लगाते हुए एक आईटीबीपी जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल के डिब्बे में लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी सन्न रह गए. जवान का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और गलत इलाज की वजह से उसकी मां का हाथ काटना पड़ा. तीन दिनों तक थाने के चक्कर लगाने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो वह सीधे कमिश्नर ऑफिस पहुंच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने जांच और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं.
सांस की दिक्कत लेकर पहुंचे अस्पताल, इलाज के बाद हाथ में फैल गया इंफेक्शन
पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का बताया जा रहा है, जहां आईटीबीपी जवान विकास सिंगर अपनी मां के इलाज को लेकर पिछले कई दिनों से परेशान था. विकास के मुताबिक उसकी मां को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी. हालत बिगड़ती देख वह उन्हें लेकर पारस अस्पताल जा रहा था, लेकिन रास्ते में तबीयत ज्यादा खराब हो गई. इसके बाद वह कटनी चौराहे के पास स्थित कृष्णा हॉस्पिटल पहुंच गया.
जवान का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उसकी मां की हालत बेहद गंभीर बताते हुए तुरंत उन्हें वेंटिलेटर पर भर्ती कर लिया. परिवार को भरोसा दिलाया गया कि इलाज सही तरीके से चल रहा है और मरीज जल्द ठीक हो जाएगी. शुरुआती दो दिनों में सांस लेने की दिक्कत तो कम हो गई, लेकिन इसी दौरान उनकी मां के हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया.
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई. हाथ में लगी ड्रिप और इंजेक्शन की वजह से स्थिति बिगड़ती चली गई. धीरे-धीरे हाथ काला पड़ने लगा और उसमें सड़न जैसी हालत बन गई. जब परिवार ने डॉक्टरों से सवाल किए तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला.
ITBP मुख्यालय से सलाह मिलने के बाद मां को दूसरे अस्पताल ले गया जवान
विकास सिंगर ने बताया कि जब मां की हालत लगातार बिगड़ने लगी तो उसने आईटीबीपी महाराजपुर मुख्यालय में अपने अधिकारियों से संपर्क किया. वहां से उसे सलाह दी गई कि मां को तुरंत किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराया जाए क्योंकि मौजूदा अस्पताल की स्थिति ठीक नहीं लग रही है.
इसके बाद वह अपनी मां को लेकर पारस अस्पताल पहुंचा. यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद परिवार को जो जानकारी दी, उसने सभी के होश उड़ा दिए. डॉक्टरों ने बताया कि हाथ में इंफेक्शन बहुत तेजी से फैल चुका है और मरीज की जान बचाने के लिए हाथ काटना जरूरी है.
परिवार के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. डॉक्टरों ने सर्जरी कर महिला का हाथ काट दिया. जवान का आरोप है कि अगर शुरुआती अस्पताल में सही इलाज हुआ होता तो उसकी मां का हाथ बचाया जा सकता था.
थर्माकोल के डिब्बे में रखा कटा हाथ लेकर इंसाफ मांगता रहा बेटा
सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि महिला का कटा हुआ हाथ अस्पताल से मिलने के बाद विकास उसे थर्माकोल के डिब्बे में रखकर तीन दिनों तक न्याय की मांग करता रहा. उसने बताया कि वह थाना रेल बाजार पहुंचा और अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई.
जवान के मुताबिक पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. वह लगातार अधिकारियों से गुहार लगाता रहा कि अस्पताल की लापरवाही की जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो, लेकिन उसकी शिकायत आगे नहीं बढ़ी.
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आखिरकार परेशान होकर वह सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया. वहां उसने अधिकारियों के सामने अपना दर्द बयां किया और थर्माकोल का डिब्बा खोलकर मां का कटा हाथ दिखाया. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए.
कमिश्नर ऑफिस में मचा हड़कंप, तुरंत दिए जांच और FIR के आदेश
जब पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल को पूरे मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने तुरंत मामले को गंभीर श्रेणी में लिया. बताया जा रहा है कि कमिश्नर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूरी जानकारी मांगी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी को तत्काल जांच के निर्देश दिए.
साथ ही संबंधित अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश भी दिए गए हैं. पुलिस अब यह जांच करेगी कि इलाज में वास्तव में कोई मेडिकल लापरवाही हुई थी या नहीं. अस्पताल प्रशासन से भी इलाज से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं.
सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल के रिकॉर्ड, इलाज की प्रक्रिया और डॉक्टरों की भूमिका की जांच करेगी. अगर लापरवाही साबित होती है तो अस्पताल और जिम्मेदार डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई घटना, लोग बोले- इंसाफ के लिए कितना भटकेगा आम आदमी
आईटीबीपी जवान की यह दर्दनाक कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो गया. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक जवान को अपनी मां का कटा हाथ लेकर इंसाफ मांगने के लिए कमिश्नर ऑफिस तक क्यों पहुंचना पड़ा.
कई लोगों ने अस्पतालों में बढ़ती लापरवाही और पुलिस की शुरुआती उदासीनता पर भी नाराजगी जाहिर की. सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अगर समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती तो शायद मामला इतना आगे नहीं बढ़ता.
इस घटना ने सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि मरीज और उनके परिवार पहले ही बीमारी से परेशान रहते हैं, ऐसे में अगर इलाज में लापरवाही हो जाए तो पूरा परिवार टूट जाता है.
मेडिकल लापरवाही पर बढ़ सकती है कानूनी कार्रवाई
कानूनी जानकारों के मुताबिक अगर जांच में यह साबित होता है कि महिला का हाथ डॉक्टरों की गलती या गलत इलाज की वजह से काटना पड़ा, तो संबंधित अस्पताल पर मेडिकल नेग्लिजेंस का बड़ा मामला दर्ज हो सकता है. इसके तहत अस्पताल का लाइसेंस तक खतरे में पड़ सकता है.
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जाएगी. इलाज के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई, संक्रमण कैसे फैला और क्या समय पर सही मेडिकल सलाह दी गई थी, इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
फिलहाल आईटीबीपी जवान विकास सिंगर अपनी मां के लिए इंसाफ की मांग कर रहा है. उसकी दर्दभरी कहानी ने पूरे कानपुर को झकझोर कर रख दिया है.


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