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‘बीवी को मेरे पास भेज दो…’, सुपरवाइजर की गंदी डिमांड से टूटा बिहारी युवक; गुरुग्राम में 8 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ दी जान


गुरुग्राम में बेगूसराय के युवक ने सुपरवाइजर की प्रताड़ना, ब्लैकमेल और पत्नी की डिमांड से तंग आकर सुसाइड कर लिया।

गुरुग्राम में बिहार के बेगूसराय निवासी 32 वर्षीय रामपुकार यादव ने कथित मानसिक, शारीरिक और नस्लीय प्रताड़ना से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उन्होंने 8 पन्नों का सुसाइड नोट लिखकर अपने भाई और भांजे को भेजा, जिसमें कंपनी के सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार पर नशीला पदार्थ पिलाकर कुकर्म करने, लगातार ब्लैकमेल करने, पैसों की उगाही करने और पत्नी को भेजने जैसी शर्मनाक मांग करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुसाइड नोट में ‘बिहारी’ कहकर अपमानित करने और हरियाणा-बिहार को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी जिक्र है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने 30 घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की, जिसके बाद वे शव को लेकर बेगूसराय लौट आए।

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गुरुग्राम की कंपनी में नौकरी करने गया था रामपुकार, तीन साल तक सहता रहा प्रताड़ना

बेगूसराय जिले के गढ़पुरा थाना क्षेत्र स्थित रक्सी गांव निवासी रामपुकार यादव जनवरी 2022 में रोजी-रोटी की तलाश में गुरुग्राम पहुंचे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए उन्होंने सेक्टर-20 स्थित उद्योग विहार फेज-II की एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की थी। गांव में उनकी पत्नी रूबी देवी और छोटा बेटा रहते थे, जबकि वह अकेले गुरुग्राम में किराए के कमरे में रहकर नौकरी करते थे।

परिवार वालों के अनुसार शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ महीनों बाद रामपुकार के व्यवहार में बदलाव आने लगा। वह अक्सर तनाव में रहने लगे थे और घर वालों से कम बात करते थे। हालांकि उन्होंने कभी खुलकर अपनी परेशानी नहीं बताई। अब उनकी मौत के बाद सामने आए 8 पन्नों के सुसाइड नोट ने उन तमाम राजों से पर्दा उठा दिया है, जिन्हें वह पिछले साढ़े तीन साल से अपने अंदर दबाए हुए थे।

सुसाइड नोट में रामपुकार ने लिखा कि कंपनी का सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार शुरुआत में उनके साथ ही कमरे में रहता था। इसी दौरान उसने दोस्ती का फायदा उठाकर उनके साथ विश्वासघात किया। रामपुकार ने दावा किया कि वह शराब नहीं पीते थे, लेकिन एक दिन देवेंद्र ने उनकी कोल्ड ड्रिंक में शराब मिला दी। जब वह बेसुध हो गए तो उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए गए। अगले दिन विरोध करने पर उन्हें समाज में बदनाम करने और नौकरी खत्म करवाने की धमकी दी गई।

रामपुकार ने लिखा कि उस घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। देवेंद्र उन्हें लगातार ब्लैकमेल करता रहा और डराता रहा कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो वह उनकी जिंदगी बर्बाद कर देगा। इसी डर और शर्म के कारण वह किसी के सामने सच नहीं बोल पाए।

‘बिहार हरियाणा वालों का इंटरनेशनल ससुराल…’, नस्लीय टिप्पणियों ने तोड़ दिया युवक

सुसाइड नोट में रामपुकार ने केवल ब्लैकमेल और प्रताड़ना का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि क्षेत्रीय भेदभाव और नस्लीय टिप्पणियों का दर्द भी बयान किया। उन्होंने लिखा कि सुपरवाइजर देवेंद्र अक्सर उन्हें ‘बिहारी’ कहकर अपमानित करता था। वह बिहार की महिलाओं और मजदूरों को लेकर बेहद आपत्तिजनक बातें करता था।

रामपुकार के मुताबिक देवेंद्र कहता था कि “हरियाणा वालों का बिहार इंटरनेशनल ससुराल है” और बिहार की लड़कियों को पैसों में खरीदा जाता है। यह बातें रामपुकार को अंदर तक तोड़ देती थीं। वह कई बार छुट्टी लेकर गांव चले गए, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के कारण दोबारा नौकरी पर लौटना पड़ा।

सुसाइड नोट में लिखा गया है कि देवेंद्र ने पहले पैसे मांगने शुरू किए। डर के कारण रामपुकार उसे 10 से 15 हजार रुपये तक नकद देते रहे। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से बचने के लिए आरोपी ज्यादातर कैश लेता था ताकि कोई सबूत न रहे। गांव में घर बनवा रहे रामपुकार आर्थिक रूप से पहले ही परेशान थे, लेकिन ब्लैकमेल के कारण वह लगातार पैसे देते रहे।

इसके बाद मामला और भयावह हो गया। देवेंद्र ने रामपुकार पर लड़कियां उपलब्ध कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब उन्होंने मना किया तो गाली-गलौज और धमकियां बढ़ गईं। फिर आरोपी ने उनसे कहा कि अगर बाहर से लड़की नहीं ला सकते तो अपनी पत्नी को ही गांव से बुलाकर उसके पास भेज दें।

यह मांग सुनने के बाद रामपुकार पूरी तरह टूट गए। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि वह अपनी पत्नी और परिवार की इज्जत को लेकर बेहद परेशान थे। उन्हें लगने लगा था कि अब उनकी जिंदगी में बचा ही क्या है।

मैनेजर, HR और एडमिन से लगाई गुहार, लेकिन कहीं नहीं मिली मदद

रामपुकार ने अपने सुसाइड नोट में कंपनी प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कई बार कंपनी के मैनेजर, एडमिन और एचआर विभाग से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।

रामपुकार ने अपने मैनेजर से डिपार्टमेंट बदलने की गुजारिश की थी। उन्होंने कहा था कि वह देवेंद्र के साथ काम नहीं करना चाहते। लेकिन मैनेजर ने सिर्फ समझाने की बात कहकर मामला टाल दिया। इसके बाद जब आरोपी की हरकतें और बढ़ गईं तो उन्होंने कंपनी के एडमिन अधिकारी पंकज मिश्रा को भी पूरी जानकारी दी।

सुसाइड नोट के मुताबिक पंकज मिश्रा ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और उन्हें फिर मैनेजर के पास भेज दिया। अंत में रामपुकार कंपनी के एचआर विभाग पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि कंपनी प्रशासन उनकी शिकायत पर कार्रवाई करेगा, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। आरोप है कि एचआर विभाग ने मामले को दबाने और आपस में निपटाने की सलाह दी।

हर तरफ से निराश होने के बाद रामपुकार मानसिक रूप से टूटते चले गए। उन्होंने लिखा कि वह लगातार लड़ते रहे, लेकिन जब आरोपी ने उनकी पत्नी को लेकर गंदी मांग रखी तो वह अंदर से खत्म हो गए।

सुसाइड नोट में उन्होंने एक अधिकारी ‘नितिन सर’ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि नितिन सर हमेशा कहते थे कि समस्याओं से भागो मत, उनका सामना करो। लेकिन वह अब और सहन नहीं कर पाए।

आत्महत्या से 15 मिनट पहले भेजा 8 पन्नों का नोट

17 मई की दोपहर रामपुकार ने आत्महत्या से पहले अपना सुसाइड नोट मोबाइल से भाई और भांजे को भेजा। इसके करीब 15 मिनट बाद उन्होंने कमरे में फांसी लगा ली। जब परिजनों ने मैसेज पढ़ा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत पड़ोसियों और परिचितों को फोन किया।

पड़ोसियों ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो रामपुकार का शव पंखे से लटका मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

परिवार वालों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इतने गंभीर आरोपों के बाद पुलिस तुरंत केस दर्ज करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिजनों के अनुसार पुलिस लगातार टालमटोल करती रही और पहले अंतिम संस्कार करने की बात कहती रही।

30 घंटे तक FIR नहीं, शव लेकर गांव लौटे परिजन

रामपुकार के परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में रहने वाले रिश्तेदार भी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया, लेकिन आरोपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं की।

परिवार का आरोप है कि रविवार होने का बहाना बनाकर पोस्टमार्टम में देरी की गई। सोमवार को भी घंटों तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई। परिजन लगातार पुलिस से सुसाइड नोट के आधार पर मामला दर्ज करने की मांग करते रहे, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता रहा।

करीब 30 घंटे बीत जाने के बाद भी जब केस दर्ज नहीं हुआ और शव खराब होने लगा तो परिवार मजबूर होकर शव को बेगूसराय लेकर लौट गया। बुधवार को जैसे ही रामपुकार का शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में मातम फैल गया।

गांव वालों का कहना है कि रामपुकार बेहद शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि वह इस तरह दुनिया छोड़ देंगे।

पुलिस जांच की बात कह रही, लेकिन परिवार को इंसाफ का इंतजार

मामले को लेकर कापसहेड़ा थाना पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि परिवार इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि जब मृतक ने अपने हाथ से इतना बड़ा आरोप लिखकर छोड़ा है तो तत्काल केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए था।

अब यह मामला केवल आत्महत्या का नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर मानसिक प्रताड़ना, ब्लैकमेल, क्षेत्रीय भेदभाव और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा सवाल बन चुका है। रामपुकार यादव की मौत ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि नौकरी की मजबूरी में दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी किस तरह के मानसिक दबाव और शोषण का सामना करते हैं।

परिवार का कहना है कि जब तक आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। वहीं गांव में रामपुकार की मौत के बाद उनकी पत्नी और छोटे बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है।

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