गंगा एक्सप्रेसवे टोल दरें 3 दिन में 3 बार बदलीं, 1514 से 1800 और फिर 1765 तक पहुंचीं, जानें पूरा मामला और किसे कितना फायदा
उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी Ganga Expressway पर टोल दरों को लेकर बड़ा भ्रम सामने आया है, जहां सिर्फ तीन दिनों के भीतर टोल शुल्क तीन बार बदला गया। पहले 1514 रुपये, फिर 1800 रुपये और आखिर में 1765 रुपये तय किए गए। Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority अंतिम दर तय करने में असमंजस में दिखी, जिससे आम लोगों के बीच सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर असली टोल कितना है और इसमें किसे कितना हिस्सा मिलेगा।
तीन दिन में तीन बार बदली दरें, क्यों बना कन्फ्यूजन
गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर टोल दरों का बार-बार बदलना अपने आप में हैरान करने वाला मामला बन गया। शुरुआत में जब दरें तय की गईं तो प्रति किलोमीटर 2.55 रुपये के हिसाब से कुल टोल 1514 रुपये निकाला गया। यह दर दिसंबर 2025 के थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर तय की गई थी।
लेकिन उद्घाटन से ठीक पहले अचानक नई दरें सामने आईं, जिसमें कार, जीप और हल्के वाहनों के लिए टोल बढ़ाकर 1800 रुपये कर दिया गया। इससे लोगों में असमंजस और बढ़ गया कि आखिर सही दर कौन सी है।
फिर तीसरे दिन यानी 30 अप्रैल को एक और बदलाव हुआ और टोल घटाकर 1765 रुपये कर दिया गया। इस तरह सिर्फ तीन दिनों में तीन अलग-अलग दरें सामने आने से यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया।
594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे, इतना बनता है टोल
यह एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबा है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाला देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे माना जा रहा है। यदि शुरुआती दर 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर को देखें तो कुल टोल 1514 रुपये बैठता है।
लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर एकमुश्त राशि तय की गई, जिससे कुल टोल 1800 रुपये और फिर संशोधित कर 1765 रुपये किया गया। इस अंतर ने साफ कर दिया कि गणना और अंतिम निर्धारण में कई स्तरों पर बदलाव हुए हैं।
किसे कितना मिलेगा टोल का हिस्सा
नई तय दर 1765 रुपये में भी दिलचस्प बात यह है कि इसका पूरा पैसा एक ही संस्था को नहीं जाएगा। इसमें से 1365 रुपये Adani Enterprises को मिलेंगे, जबकि 440 रुपये IRB Infrastructure Developers के हिस्से में जाएंगे।
इससे साफ है कि एक्सप्रेसवे के संचालन और निवेश में कई कंपनियों की भागीदारी है, जिसके चलते टोल का बंटवारा भी तय किया गया है।
उद्घाटन के बाद भी स्पष्ट नहीं हुई तस्वीर
इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को Narendra Modi द्वारा किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उद्घाटन के बाद भी टोल दरों को लेकर स्पष्टता नहीं आ सकी।
एक दिन पहले जारी दरें अलग थीं, उद्घाटन के दिन अलग और अगले दिन फिर अलग। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतनी बड़ी परियोजना के लिए पहले से पूरी तैयारी नहीं की गई थी।
वाहन श्रेणी के अनुसार अलग-अलग टोल
टोल दरें केवल कारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग वाहनों के लिए अलग शुल्क तय किया गया है। कार, जीप और हल्के मोटर वाहनों के लिए जहां 1765 रुपये अंतिम दर बताई जा रही है, वहीं दोपहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए लगभग 905 रुपये तक टोल तय किया गया था।
हालांकि बार-बार बदलती दरों के कारण आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो गया है कि उन्हें वास्तव में कितना भुगतान करना होगा।
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी परियोजना क्यों खास
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे न सिर्फ यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि लॉजिस्टिक्स, व्यापार और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा।
यह परियोजना राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाने वाली है। लेकिन टोल दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने इसकी शुरुआत को विवादों में ला दिया है।
लोगों के बीच बढ़ा असमंजस और सवाल
लगातार बदलती टोल दरों ने आम लोगों और वाहन चालकों के बीच असमंजस पैदा कर दिया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर उन्हें कितनी राशि देनी होगी और क्या भविष्य में भी इसी तरह बदलाव होते रहेंगे।
यह मामला सिर्फ टोल दरों का नहीं, बल्कि नीति निर्धारण और पारदर्शिता का भी बन गया है। इतनी बड़ी परियोजना में इस तरह की उलझनें प्रशासनिक तैयारी पर भी सवाल खड़े करती हैं।
आखिर क्या है सच्चाई
फिलहाल 1765 रुपये को ही अंतिम टोल दर माना जा रहा है, लेकिन जिस तरह से तीन दिनों में तीन बार बदलाव हुआ है, उससे यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में यह दर स्थिर रहेगी या नहीं।
गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत भले ही बड़े दावे और उम्मीदों के साथ हुई हो, लेकिन टोल दरों को लेकर पैदा हुआ यह विवाद लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।
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