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इलाज कराने पहुंचे थे छोटे बेटे का, अस्पताल की लापरवाही ने छीन ली बड़े बेटे की जिंदगी! बिजनौर में ऑक्सीजन सिलेंडर गिरने से मासूम की दर्दनाक मौत; मचा कोहराम


बिजनौर के निजी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।

बिजनौर के नजीबाबाद में एक निजी अस्पताल की कथित लापरवाही ने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। छोटे बेटे का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे माता-पिता ने कुछ ही मिनटों में अपने बड़े बेटे को खो दिया। अस्पताल परिसर में बिना सुरक्षा के रखे ऑक्सीजन सिलेंडर खेलते हुए साढ़े तीन साल के मासूम अजान पर गिर गए, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई और इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया। पुलिस अब अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुटी है।

छोटे बेटे का इलाज कराने पहुंचे थे, खेलते-खेलते मौत के मुंह में चला गया मासूम

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद कस्बे की है। मोहल्ला पठानपुरा निवासी मोहम्मद फैजान अपनी पत्नी गुलिस्ता परवीन के साथ अपने ढाई वर्षीय छोटे बेटे का इलाज कराने रेलवे स्टेशन के पास स्थित कृष्णा नर्सिंग होम पहुंचे थे। परिवार अस्पताल में छोटे बच्चे की देखभाल में लगा हुआ था, जबकि उनका साढ़े तीन वर्षीय बड़ा बेटा अजान अस्पताल परिसर में खेल रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक अस्पताल परिसर के एक हिस्से में कई ऑक्सीजन सिलेंडर खुले में रखे हुए थे। इन सिलेंडरों को न तो किसी चैन से बांधा गया था और न ही उनके आसपास कोई सुरक्षा बैरिकेड लगाया गया था। खेलते-खेलते अजान उन्हीं सिलेंडरों के पास पहुंच गया। तभी अचानक एक भारी ऑक्सीजन सिलेंडर असंतुलित होकर उसके ऊपर गिर पड़ा।

सिलेंडर गिरते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। बच्चे के सिर में गंभीर चोट आई और वह खून से लथपथ हो गया। परिजन आनन-फानन में उसे उठाकर अस्पताल के अंदर लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे तुरंत हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिवार बच्चे को लेकर दूसरे अस्पताल जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया।

मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां गुलिस्ता परवीन बदहवास हो गईं, जबकि पिता फैजान अपने बेटे की लाश देखकर बार-बार अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते रहे। आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, परिजनों ने लगाए बड़े आरोप

घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग कृष्णा नर्सिंग होम पहुंच गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों का कहना था कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था और यही लापरवाही मासूम की मौत का कारण बनी।

परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन सिलेंडर खुले में और असुरक्षित तरीके से रखे गए थे। किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर बेहद संवेदनशील उपकरण माने जाते हैं, जिन्हें मजबूत चैन और सपोर्ट सिस्टम के जरिए सुरक्षित किया जाता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं था।

इतना ही नहीं, परिवार ने अस्पताल में और भी कई खतरनाक लापरवाहियों का आरोप लगाया। उनका कहना था कि परिसर में कई जगह बिजली के खुले तार लटक रहे थे और खुले स्विच बोर्ड मौजूद थे, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते थे। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर अस्पताल प्रशासन इतना लापरवाह कैसे हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना था कि अस्पताल में न तो कोई सुरक्षा गार्ड मौजूद था और न ही किसी स्टाफ ने बच्चों को खतरनाक क्षेत्र से दूर रखने की कोशिश की। यदि अस्पताल प्रशासन ने बुनियादी सुरक्षा इंतजाम किए होते तो शायद मासूम अजान की जान बच सकती थी।

घटना के बाद अस्पताल के बाहर माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई घंटों तक लोगों की भीड़ जमा रही और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी दिखाई देती रही। परिजन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे।

अस्पताल संचालक की सफाई और पुलिस जांच में जुटी

घटना के बाद कृष्णा नर्सिंग होम के संचालक डॉ. अरुण कुमार गर्ग ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि फैजान का छोटा बेटा अस्पताल में भर्ती था और परिवार वहीं मौजूद था। इसी दौरान खेलते-खेलते अजान सिलेंडरों के पास पहुंच गया और हादसा हो गया।

उन्होंने बताया कि बच्चे के घायल होने के बाद परिवार उसे दूसरे अस्पताल लेकर गया था। उनके मुताबिक घटना के करीब दो से तीन घंटे बाद बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस को बुलाना पड़ा।

हालांकि अस्पताल संचालक की सफाई के बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। लोगों का कहना था कि यदि अस्पताल में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।

हंगामे की सूचना मिलने पर नजीबाबाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस क्षेत्राधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक परिवार जो अपने छोटे बेटे का इलाज कराने अस्पताल पहुंचा था, उसे अपने बड़े बेटे की लाश लेकर घर लौटना पड़ा। मासूम अजान की मौत ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और निजी अस्पतालों की लापरवाही पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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