निघासन खीरी में आंधी के दौरान कार पर पेड़ गिरा, गन्ना ट्रॉली से टक्कर में तीन लोग घायल, जिला अस्पताल रेफर
अनूप गुप्ता की रिपोर्ट
निघासन में आंधी बनी जानलेवा, चलती कार पर गिरा पेड़
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के निघासन क्षेत्र में बीती रात आए तेज आंधी और तूफान ने एक खतरनाक सड़क हादसे को जन्म दे दिया। निघासन-रकेहटी मार्ग पर स्थित गायत्री डिग्री कॉलेज के पास एक चलती कार पर अचानक विशाल पेड़ गिर गया, जिससे कार सवार लोग बुरी तरह फंस गए। यह घटना रात के समय हुई जब मौसम अचानक बिगड़ गया और तेज हवाओं ने सड़क किनारे खड़े पेड़ों को उखाड़ना शुरू कर दिया। इस भयावह हादसे में कार में सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
शादी समारोह से लौट रहे थे सभी यात्री
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार में सवार सभी लोग लखीमपुर खीरी के निवासी थे और सिंगाही क्षेत्र में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। कार में मो. हदी, शरीफ बानो और हमना आरिफ सवार थे। सभी लोग खुशी के माहौल से लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने इस सफर को हादसे में बदल दिया। जैसे ही उनकी कार गायत्री डिग्री कॉलेज के पास पहुंची, तेज आंधी के कारण सड़क किनारे खड़ा एक बड़ा और पुराना पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे उनकी कार पर गिर पड़ा।
पेड़ गिरते ही अनियंत्रित हुई कार, ट्रॉली से टकराई
पेड़ गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पेड़ के गिरते ही कार का संतुलन बिगड़ गया और वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर आगे चल रही गन्ना लदी ट्रॉली से जा टकराया। यह टक्कर इतनी तेज थी कि आसपास मौजूद लोग भी सहम गए। कार का पिछला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि सामने का हिस्सा ट्रॉली से टकराकर बुरी तरह दब गया। यह पूरा हादसा कुछ ही सेकंड में हुआ, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर रहे।
एयरबैग खुलने से चालक की बची जान
इस दुर्घटना में एक अहम पहलू यह रहा कि कार के एयरबैग समय रहते खुल गए, जिससे चालक को गंभीर चोटों से बचाया जा सका। हालांकि, कार के पिछले हिस्से पर पेड़ गिरने के कारण पीछे बैठे तीनों यात्री बुरी तरह घायल हो गए। उनके सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर एयरबैग नहीं खुलते तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था।
स्थानीय लोगों ने दिखाई तत्परता, बचाई जान
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। लोगों ने मिलकर कार में फंसे घायलों को बाहर निकाला और तुरंत पास के रकेहटी स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय लोगों की तत्परता और साहस के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी। यह मानवीय पहल इस हादसे में एक सकारात्मक पहलू के रूप में सामने आई।
प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर
निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने घायलों का प्राथमिक उपचार किया, लेकिन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों को सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई हैं, जिनका विस्तृत इलाज आवश्यक है। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
तेज आंधी से कई जगह गिरे पेड़ और खंभे
स्थानीय निवासियों ने बताया कि उस रात निघासन और आसपास के क्षेत्रों में तेज आंधी और तूफान का असर काफी व्यापक था। कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई और सड़क यातायात पर भी असर पड़ा। कई जगहों पर रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो गए थे, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह हादसा उसी व्यापक प्राकृतिक आपदा का एक उदाहरण है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने रास्ता साफ कराने और यातायात बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। साथ ही, हादसे की जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील भी की।
क्षतिग्रस्त कार को परिजन ले गए
हादसे के बाद कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। बाद में परिजन मौके पर पहुंचे और टोचन की मदद से कार को अपने साथ ले गए। कार की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना भयानक था। वाहन का पिछला हिस्सा पूरी तरह दब गया था, जबकि आगे का हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त था।
मौसम की मार और सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि खराब मौसम के दौरान सड़क सुरक्षा कितनी अहम हो जाती है। तेज आंधी और तूफान के समय सड़क किनारे खड़े पेड़ किसी भी वक्त खतरा बन सकते हैं। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे पुराने और कमजोर पेड़ों की समय-समय पर जांच करें और आवश्यक कदम उठाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
लगातार बढ़ रहे हादसे, सतर्कता जरूरी
निघासन क्षेत्र में हाल के दिनों में इस तरह के हादसों की संख्या बढ़ी है, जो चिंता का विषय है। चाहे वह सड़क दुर्घटनाएं हों या प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले हादसे, हर स्थिति में सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है। यह घटना भी एक चेतावनी है कि मौसम के बदलते मिजाज को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
इस पूरे हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्राकृतिक आपदाएं कब और कैसे कहर बन जाएं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। समय रहते सतर्क रहना और सुरक्षा उपायों को अपनाना ही ऐसी घटनाओं से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।


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