मोहनलालगंज में फूटा दलित-पिछड़ा आक्रोश, ‘अब नहीं सहेंगे अन्याय’—सामाजिक जागरूकता सम्मेलन से सरकार को सीधी चेतावनी



मोहनलालगंज सम्मेलन में दलित-पिछड़ा समाज का बड़ा ऐलान, आरक्षण, बेरोजगारी और सुरक्षा मुद्दों पर सरकार को चेतावनी

विश्व मीडिया डेस्क


मोहनलालगंज में सामाजिक जागरूकता सम्मेलन का आयोजन

लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में 5 अप्रैल 2026 को कोहिनूर मैरिज लॉन में एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक महत्व के कार्यक्रम ‘सामाजिक जागरूकता विधानसभा सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में दलित, पिछड़ा और वंचित समाज के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में बढ़ रहे अन्याय, भेदभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ आवाज बुलंद करना था। सम्मेलन ने यह साफ संकेत दिया कि अब समाज अपने अधिकारों के लिए चुप बैठने वाला नहीं है और संघर्ष की राह पर आगे बढ़ने को तैयार है।

अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ एकजुटता का संदेश

सम्मेलन में वक्ताओं ने लगातार इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है। सामाजिक न्याय, आरक्षण और समान अवसर जैसे संवैधानिक प्रावधानों को कमजोर करने की कोशिशों को लेकर गहरी चिंता जताई गई। मंच से यह कहा गया कि प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और नीतिगत खामियों के कारण वंचित वर्गों को अपने हक के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ रहा है। इस सम्मेलन ने समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने का संदेश दिया।

शिक्षा और रोजगार में भेदभाव के मुद्दे पर उठे सवाल

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि भर्तियों में पारदर्शिता की कमी और आरक्षण व्यवस्था में हो रही अनियमितताएं समाज के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। 69,000 शिक्षक भर्ती जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि आरक्षण को कमजोर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता

सम्मेलन में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। मोहनलालगंज और सिसेंडी क्षेत्र में बढ़ते अपराधों को लेकर वक्ताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी नाराजगी जताई गई और कहा गया कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती है तो समाज को खुद अपनी सुरक्षा के लिए संगठित होना पड़ेगा। यह मुद्दा सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।

बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर नाराजगी

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, पेंशन, जल जीवन मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही लापरवाही को लेकर भी सम्मेलन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं और जमीनी स्तर पर उनका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस स्थिति को बदलने के लिए जन आंदोलन की जरूरत बताई गई।

राम बहादुर का बयान: संविधान की भावना पर खतरा

सम्मेलन में सेवानिवृत्त आईएएस और राष्ट्रीय संरक्षक राम बहादुर ने अपने संबोधन में कहा कि देश में संविधान की मूल भावना को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़ा समाज आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें न्याय दिलाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपनी भूमिका निभाने में विफल रहता है तो समाज अब चुप नहीं बैठेगा और निर्णायक कदम उठाएगा।

भवन नाथ पासवान का आरोप: आरक्षण कमजोर करने की साजिश

राष्ट्रीय अध्यक्ष भवन नाथ पासवान ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और नौकरियों में दलितों और पिछड़ों के साथ खुला भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से साजिश रची जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब समाज अपने अधिकारों के लिए सड़कों से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगा और किसी भी कीमत पर अपने हक से समझौता नहीं करेगा।

युवाओं को जागरूक करने की अपील

राष्ट्रीय प्रधान महासचिव इंजीनियर एस.पी. सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल शिक्षा प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना भी जरूरी है। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षित, संगठित और संघर्षशील समाज ही मजबूत समाज होता है। युवाओं से अपील की गई कि वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के प्रति जागरूक रहें और अपने अधिकारों के लिए आगे आएं।

सम्मेलन का संचालन और आयोजन की विशेषताएं

कार्यक्रम का संचालन एस.एल. रावत द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित किया। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की भागीदारी ने इसे एक बड़े जनआंदोलन का रूप दे दिया। कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और उनके समाधान के लिए रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।

बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस सम्मेलन में कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें आर एन यादव, राम सिंह, डॉ. अनिल कुमार, आशा राम सरोज, आदित्य वर्मा, राकेश चन्द्र राणा, भारत वीर, फतेह बहादुर सिंह, जी के शंखवार, शैलेश धानुक, डॉ. अयोध्या प्रसाद, डॉ. जय प्रकाश, मोहम्मद शमीम खान, पीतांबर प्रसाद, संतराम रावत, गुरु प्रसाद, कुंदन लाल, शिव कुमार, बीपी बौद्ध, राम सरोवर, प्रशान्त राज, डॉक्टर रामजीलाल, इंजीनियर रचना, गायत्री रावत, रामकिशोर रावत, एडवोकेट महेश रावत, गुरु प्रसाद रावत, एस एल रावत, शिव बालक, सोहनलाल, सुभाष चंद्र, अंजनी कुमार चक्रवर्ती, राम सजीवन, सुरेंद्र कुमार ददू, मो. हनीफ खान, भास्कर पासवान, बालक राम, अमर नाथ, राजकिशोर, होरी लाल, अनिल पासी, दीपक कुमार, बालकिशन सरोज, रामबिरज रावत, भानू प्रकाश, दीपराज रावत, सी बी भारती और उदय भइया सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।

आर-पार की लड़ाई का ऐलान

सम्मेलन के अंत में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक बड़े सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है। मंच से यह ऐलान किया गया कि अब अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी और समाज अपने अधिकारों के लिए हर स्तर तक जाने को तैयार है। यह सम्मेलन वंचित और शोषित समाज की एकजुटता और ताकत का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने आने वाले समय में बड़े बदलाव की ओर संकेत दिया।

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