बगल में शराब, मुंह में सिगरेट लिए कॉपियां जांचता टीचर! लातूर में ‘नशे में धुत’ गुरुजी का वीडियो वायरल, शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल



लातूर में नशे में धुत शिक्षक का वीडियो वायरल, शराब-सिगरेट के बीच कॉपियां जांचने पर बर्खास्तगी, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

लातूर में वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

महाराष्ट्र के लातूर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस शहर को लंबे समय से बेहतर शैक्षणिक परिणामों और अनुशासित पढ़ाई के लिए जाना जाता रहा है, वहीं अब एक शिक्षक की गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वीडियो में एक शिक्षक खुलेआम शराब और सिगरेट के बीच बैठकर छात्रों की परीक्षा कॉपियों की जांच करता नजर आ रहा है, जिससे अभिभावकों और शिक्षा विभाग में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

यह घटना सामने आने के बाद न केवल संबंधित स्कूल बल्कि पूरे लातूर के शैक्षणिक माहौल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिस भरोसे के साथ अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, उस भरोसे को इस घटना ने गहरा झटका दिया है।

ढाबे पर बैठकर चल रही थी ‘कॉपियों की जांच’

वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि शिक्षक अजय कोकणे अपने कुछ दोस्तों के साथ एक ढाबे पर बैठा हुआ है। टेबल पर शराब की बोतलें रखी हुई हैं, हाथ में सिगरेट है और उसी माहौल में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं खोली हुई हैं। यह दृश्य अपने आप में चौंकाने वाला है क्योंकि परीक्षा कॉपियों की जांच एक बेहद जिम्मेदारी भरा काम माना जाता है, जो पूरी ईमानदारी और ध्यान के साथ किया जाना चाहिए।

लेकिन वीडियो में जो तस्वीर सामने आई, उसमें यह पूरी प्रक्रिया मजाक बनकर रह गई। शिक्षक न केवल खुद नशे में दिखाई दे रहा है, बल्कि वह अपने दोस्तों को भी कॉपियां थमाकर उनसे जांच करवाता नजर आ रहा है। यह लापरवाही इस बात को दर्शाती है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस अहम काम को कितनी हल्के में लिया गया।

दोस्तों से भी करवाई कॉपियों की जांच

वीडियो का सबसे गंभीर पहलू यह है कि शिक्षक के साथ बैठे अन्य लोग, जो स्पष्ट रूप से नशे की हालत में थे, वे भी छात्रों की कॉपियां चेक करते दिखाई दे रहे हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि छात्रों के साथ सीधा अन्याय भी है।

किसी भी परीक्षा में प्राप्त अंक छात्रों के भविष्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अगर कॉपियों की जांच सही तरीके से नहीं की जाती, तो यह उनके करियर के साथ खिलवाड़ है। वीडियो में दोस्तों द्वारा लाल पेन से कॉपियों पर निशान लगाते हुए देखा गया, जिससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि कई छात्रों को गलत मूल्यांकन का सामना करना पड़ा होगा।

वीडियो वायरल होते ही स्कूल ने लिया एक्शन

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मामला तेजी से फैल गया और शिक्षा विभाग तक पहुंच गया। बढ़ते दबाव और आलोचना के बीच स्कूल प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षक अजय कोकणे को नौकरी से हटा दिया।

स्कूल प्रशासन ने यह कदम अपनी छवि बचाने और मामले को शांत करने के लिए उठाया, लेकिन इस कार्रवाई के बावजूद लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ। अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ नौकरी से निकाल देना इस गंभीर गलती के लिए पर्याप्त नहीं है।

शिक्षा विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए लातूर की शिक्षणाधिकारी तृप्ती अंधारे ने स्कूल प्रिंसिपल से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने साफ किया कि इस तरह की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाती हैं और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शिक्षा विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर कैसे एक शिक्षक को इस तरह की लापरवाही करने की छूट मिली और क्या स्कूल प्रबंधन की ओर से निगरानी में कोई कमी रही।

अभिभावकों में भारी नाराजगी

इस घटना के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा आक्रोश अभिभावकों में देखने को मिला है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर शिक्षक ही इस तरह की हरकत करेंगे तो बच्चों की मेहनत का क्या मूल्य रह जाएगा।

कई अभिभावकों ने मांग की है कि इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक इस तरह की लापरवाही करने की हिम्मत न कर सके। उनका यह भी कहना है कि जिन छात्रों की कॉपियां इस तरह जांची गई हैं, उनकी दोबारा जांच होनी चाहिए।

‘लातूर पैटर्न’ पर उठे सवाल

लातूर का नाम वर्षों से ‘लातूर पैटर्न’ के कारण पूरे महाराष्ट्र में प्रसिद्ध रहा है। यहां के छात्र बोर्ड परीक्षाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं और इस मॉडल को अन्य जिलों में भी अपनाने की बात की जाती रही है।

लेकिन इस घटना ने उस प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचाया है। अगर इस तरह की लापरवाही अंदर ही अंदर हो रही थी, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में यहां की सफलता के पीछे पूरी तरह पारदर्शी और ईमानदार व्यवस्था काम कर रही है या नहीं।



शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर संकट

यह मामला केवल एक शिक्षक की गलती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। जब एक शिक्षक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाता है और उसे रोकने वाला कोई नहीं होता, तो यह संकेत देता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामी मौजूद है।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि परीक्षा जैसे गंभीर कार्यों में निगरानी और जवाबदेही की कितनी जरूरत है। अगर समय रहते इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति और भी बढ़ सकती है।

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