मामा ही निकला हैवान! 11 साल के दिव्यांश पर 42 वार, 11 बार सिगरेट से दागा…लखनऊ गुरुकुल में हत्या से मचा हड़कंप, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोली रूह कंपा देने वाली सच्चाई



कानपुर के 11 वर्षीय दिव्यांश की गुरुकुल में संदिग्ध मौत, पोस्टमार्टम में 42 चोटें और सिगरेट के निशान, आरोपी गिरफ्तार


गुरुकुल में दाखिले के 7 दिन बाद मौत, भरोसे ने लिया खौफनाक मोड़

कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र से सामने आया 11 वर्षीय दिव्यांश हत्याकांड पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है, जहां शिक्षा और संस्कार के नाम पर चल रहे एक गुरुकुल के भीतर मासूम के साथ ऐसी हैवानियत हुई कि हर कोई सन्न रह गया। जिस बच्चे को बेहतर भविष्य और अनुशासन की शिक्षा के लिए उसके माता-पिता ने भरोसे के साथ गुरुकुल भेजा था, वही जगह उसके लिए मौत का कारण बन गई।

दिव्यांश को 15 अप्रैल को लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में दाखिल कराया गया था। यह गुरुकुल उसके रिश्ते में मामा लगने वाले सौरभ मिश्रा उर्फ कन्हैया द्वारा संचालित किया जा रहा था। परिवार को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस व्यक्ति पर उन्होंने अपने बच्चे की जिम्मेदारी सौंपी है, वही उसकी जिंदगी का अंत कर देगा।

घटना के महज एक हफ्ते के भीतर ही 11 साल के मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसने गुरुकुल व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली बर्बरता की पूरी कहानी

दिव्यांश की मौत के बाद जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो उसमें जो खुलासे हुए, उन्होंने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के शरीर पर कुल 42 गंभीर चोटों के निशान पाए गए। ये चोटें उसके पीठ, सीने, हाथ और पैरों सहित पूरे शरीर पर फैली हुई थीं, जो लगातार और बेरहमी से की गई मारपीट की ओर इशारा करती हैं।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चे के शरीर पर सिगरेट से जलाने के 11 निशान थे। यह तथ्य इस पूरे मामले को और भी भयावह बना देता है, क्योंकि यह सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि सुनियोजित क्रूरता और मानसिक यातना का संकेत देता है।

डॉक्टरों के अनुसार, शरीर के अंदर भी गंभीर चोटें पाई गईं, जिससे साफ होता है कि किसी भारी वस्तु से भी प्रहार किया गया था। इन सभी तथ्यों ने इस घटना को साधारण मौत नहीं बल्कि क्रूर हत्या के रूप में स्थापित कर दिया है।

आरोपी का कबूलनामा: धूप में खड़ा रखा, रातभर पीटा

पुलिस पूछताछ में आरोपी सौरभ मिश्रा ने जो बातें कबूल की हैं, वे इस मामले को और भी भयावह बना देती हैं। आरोपी के अनुसार, उसने दिव्यांश को पहले घंटों तक तेज धूप में खड़ा रखा। इसके बाद रातभर उसे थप्पड़, लात-घूंसे और डंडों से पीटा गया।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि मारपीट के दौरान एक जोरदार लात लगने से बच्चा दीवार से टकराकर बेहोश हो गया। आरोपी ने बताया कि वह उसे वहीं छोड़कर चला गया और अगले दिन जब लौटा तो बच्चा मृत अवस्था में मिला।

इस बयान ने यह साफ कर दिया कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक जारी रही प्रताड़ना का नतीजा थी, जिसमें मासूम की जान चली गई।

मौत छिपाने की साजिश, CCTV फुटेज गायब

घटना के बाद आरोपी ने सच्चाई छिपाने की पूरी कोशिश की। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि गुरुकुल के सीसीटीवी फुटेज को हटाने की साजिश रची गई थी। इस काम में आरोपी की करीबी महिला मित्र प्रियंका की भूमिका भी सामने आई है।

प्रियंका को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि उसने सबूत मिटाने में आरोपी की मदद की। इससे यह स्पष्ट होता है कि घटना के बाद साक्ष्यों को नष्ट करने की सुनियोजित कोशिश की गई थी, ताकि मामला सामने न आए।

पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल डेटा के जरिए पूरी सच्चाई सामने लाने में जुटी हुई है।

परिजनों का आरोप: कुकर्म की भी आशंका

दिव्यांश के परिजनों ने इस पूरे मामले में सिर्फ हत्या ही नहीं बल्कि कुकर्म की भी आशंका जताई है। पोस्टमार्टम के बाद कुछ सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चे के साथ किसी तरह की यौन हिंसा हुई थी या नहीं।

परिवार का कहना है कि उनके बेटे के शरीर की हालत देखकर उन्हें यह शक हुआ कि उसके साथ कुछ और भी गलत हुआ है। इस आशंका ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

पुलिस ने भी इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए जांच में शामिल किया है और रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

‘नियम नहीं मानता था’… आरोपी की सफाई पर उठे सवाल

पूछताछ के दौरान आरोपी सौरभ मिश्रा ने यह सफाई दी कि दिव्यांश गुरुकुल के नियमों का पालन नहीं करता था और उसकी वजह से अन्य बच्चे भी अनुशासनहीन हो रहे थे।

उसने दावा किया कि बच्चे को सुधारने के लिए उसने सख्ती बरती, लेकिन यह सख्ती कब क्रूरता में बदल गई, इसका कोई संतोषजनक जवाब आरोपी नहीं दे सका।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी स्थिति में एक 11 वर्षीय बच्चे के साथ इस तरह की हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। आरोपी की यह दलील अब जांच के दायरे में है और पुलिस इसे तथ्यों के आधार पर परख रही है।

इकलौते बेटे की मौत से टूटा परिवार

दिव्यांश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता नरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को बेहतर शिक्षा और संस्कार के लिए अपने ही रिश्तेदार के गुरुकुल में भेजा था।

परिवार को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि जिस मामा पर उन्होंने भरोसा किया, वही उनके बेटे की जिंदगी छीन लेगा।

बेटे की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से टूट गया है। गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस घटना को लेकर आक्रोशित है।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी सौरभ मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही उसकी सहयोगी प्रियंका से भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फॉरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस इस केस को मजबूत बनाने में जुटी है, ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

यह मामला न सिर्फ एक मासूम की दर्दनाक मौत की कहानी है, बल्कि यह समाज और शिक्षा व्यवस्था के उस अंधेरे पक्ष को भी उजागर करता है, जहां भरोसा ही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।

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