दिल्ली EV पॉलिसी 2026 में ₹3954 करोड़ का बजट, सब्सिडी, टैक्स छूट और 2027-28 से इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़ा प्लान
नई EV पॉलिसी 2026: दिल्ली में परिवहन का बदलता भविष्य
देश की राजधानी दिल्ली में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने नई ईवी पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। यह पॉलिसी न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना और लोगों को बेहतर, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराना भी है। सरकार ने इस नीति को लागू करने से पहले आम जनता, विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं ताकि इसे और प्रभावी बनाया जा सके।
₹3954.25 करोड़ का मेगा प्लान: इलेक्ट्रिक भविष्य की तैयारी
इस नई पॉलिसी के तहत सरकार ने कुल 3954.25 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट निर्धारित किया है। यह राशि अलग-अलग क्षेत्रों में खर्च की जाएगी जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन खरीद प्रोत्साहन, स्क्रैपिंग योजना और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास शामिल है। सरकार का मानना है कि इतना बड़ा निवेश दिल्ली को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मामले में देश का अग्रणी शहर बना सकता है।
इस बजट में खरीद प्रोत्साहन के लिए 1236.25 करोड़ रुपये, स्क्रैपिंग प्रोत्साहन के लिए 1718 करोड़ रुपये और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्षवार खर्च को भी स्पष्ट रूप से तय किया गया है ताकि योजना का क्रियान्वयन व्यवस्थित तरीके से हो सके।
100% टैक्स छूट और भारी सब्सिडी: खरीदना होगा आसान
नई EV पॉलिसी में सबसे बड़ा आकर्षण है इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली टैक्स छूट और सब्सिडी। नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर सड़क कर और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि आम नागरिकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना पहले से कहीं ज्यादा सस्ता और आसान हो जाएगा।
इसके अलावा 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों को 31 मार्च 2030 तक पूरी तरह टैक्स छूट दी जाएगी। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 50 प्रतिशत तक राहत मिलेगी। हालांकि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
दोपहिया से चारपहिया तक: हर सेगमेंट में प्रोत्साहन
सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन तय किए हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए एक्स-फैक्ट्री कीमत 2.25 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। पहले वर्ष में प्रति किलोवाट घंटे 10,000 रुपये की दर से अधिकतम 30,000 रुपये तक सब्सिडी दी जाएगी। दूसरे और तीसरे वर्ष में यह राशि क्रमशः कम होती जाएगी।
तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पहले वर्ष में 50,000 रुपये, दूसरे वर्ष में 40,000 रुपये और तीसरे वर्ष में 30,000 रुपये का प्रोत्साहन तय किया गया है। वहीं चार पहिया माल वाहनों के लिए पहले वर्ष में 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।
स्क्रैपिंग पॉलिसी: पुराने वाहनों को हटाने की बड़ी योजना
इस नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है स्क्रैपिंग प्रोत्साहन, जिसके तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर 10,000 रुपये, तीनपहिया पर 25,000 रुपये और इलेक्ट्रिक कारों पर 1 लाख रुपये तक का लाभ दिया जाएगा।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए जरूरी होगा कि पुराना वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र में जमा कराया जाए और उसके प्रमाणपत्र के छह महीने के भीतर नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा जाए। यह सुविधा बीएस-IV और उससे नीचे के वाहनों पर लागू होगी।
2027 और 2028 से बड़ा बदलाव: सिर्फ इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन
नई पॉलिसी में भविष्य को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए गए हैं। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए तीन पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक रूप में ही किया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से दोपहिया वाहनों के लिए भी यही नियम लागू हो जाएगा।
यह फैसला राजधानी में प्रदूषण को कम करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूती देने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे आने वाले वर्षों में पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या में तेजी से कमी आ सकती है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: हर कोने में चार्जिंग सुविधा
इलेक्ट्रिक वाहनों की सफलता का सबसे बड़ा आधार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर होता है और इस पॉलिसी में इसे विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने इसके लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया है।
चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने के लिए एक डिजिटल पोर्टल भी विकसित किया जाएगा, जिससे अनुमोदन और निगरानी की प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो सकेगी। इसका फायदा यह होगा कि निजी कंपनियां भी आसानी से इस क्षेत्र में निवेश कर सकेंगी।
DBT के जरिए सीधे खाते में सब्सिडी
नई पॉलिसी के तहत सभी प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। इस सुविधा का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो दिल्ली के निवासी हैं और जिनके वाहन दिल्ली में रजिस्टर्ड होंगे।
इससे भ्रष्टाचार और देरी की संभावना कम होगी और लोगों को समय पर लाभ मिल सकेगा।
स्कूल बस और सरकारी वाहन भी होंगे इलेक्ट्रिक
सरकार ने इस नीति में स्कूल बसों और सरकारी वाहनों को भी शामिल किया है। योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक बनाया जाएगा। दूसरे वर्ष तक 10 प्रतिशत, तीसरे वर्ष तक 20 प्रतिशत और 2030 तक 30 प्रतिशत बसों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा सरकारी विभागों द्वारा किराए या लीज पर लिए जाने वाले सभी वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे। इससे सरकारी स्तर पर भी प्रदूषण नियंत्रण में बड़ा योगदान मिलेगा।
ईवी फंड और हाई लेवल कमेटी का गठन
इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए सरकार ईवी फंड की स्थापना करेगी। इस फंड में राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं, पर्यावरण शुल्क और अन्य स्रोतों से धन जुटाया जाएगा। साथ ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा जो इस नीति के क्रियान्वयन और फंड के उपयोग की निगरानी करेगी।
2030 तक दिल्ली बनेगी ग्रीन ट्रांसपोर्ट हब
सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2030 तक दिल्ली को पूरी तरह से स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था वाला शहर बनाया जाए। इस पॉलिसी के जरिए न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि लोगों को सस्ता और बेहतर परिवहन विकल्प भी मिलेगा।
नई EV पॉलिसी 2026 दिल्ली के लिए सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, जो आने वाले वर्षों में राजधानी की तस्वीर बदल सकती है और देश के अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।


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