बिहार में वर्दी में रील बनाने पर सख्ती, महिला थानेदार सस्पेंड, 50 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के आदेश जारी
वर्दी में सोशल मीडिया रील बनी सस्पेंशन की वजह
बिहार के पूर्णिया जिले में सोशल मीडिया पर रील बनाना एक महिला थानेदार को भारी पड़ गया। महिला थाना प्रभारी शबाना आजमी को पुलिस वर्दी में वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई बिहार पुलिस मुख्यालय के सख्त निर्देशों के बाद की गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से वर्दी में निजी कंटेंट बनाने और साझा करने पर रोक लगाई गई थी।
बताया जा रहा है कि शबाना आजमी फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार सक्रिय थीं और वर्दी में वीडियो पोस्ट करती थीं। इन वीडियो में वह डांस करती और रील बनाती नजर आईं, जो तेजी से वायरल हो गए। जैसे ही मामला पुलिस मुख्यालय के संज्ञान में आया, तुरंत सख्त कदम उठाने का फैसला लिया गया।
एसपी के निर्देश पर तुरंत हुई कार्रवाई
पूर्णिया की पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत को जैसे ही मुख्यालय से आदेश मिला, उन्होंने बिना देरी किए महिला थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई यह दिखाती है कि अब पुलिस विभाग में अनुशासन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को यह निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में तुरंत जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए। इसी क्रम में पूर्णिया में यह बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसने पूरे राज्य में पुलिसकर्मियों के बीच हलचल पैदा कर दी है।
50 ‘रीलबाज’ पुलिसकर्मियों की सूची तैयार
बिहार पुलिस मुख्यालय ने 20 अप्रैल को एक सूची जारी की थी, जिसमें ऐसे करीब 50 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं, जो वर्दी में सोशल मीडिया रील बनाते पाए गए हैं। इस सूची में शबाना आजमी का नाम भी शामिल था।
मुख्यालय की मॉनिटरिंग के दौरान यह पाया गया कि कई पुलिसकर्मी मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके बाद सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पहले भी विवादों में रह चुकी हैं शबाना आजमी
यह पहला मौका नहीं है जब शबाना आजमी विवादों में आई हों। इससे पहले जब वह फणीश्वर नाथ रेणु टीओपी की प्रभारी थीं, तब भी उनका एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वह थाने की कुर्सी पर अपने परिजनों को बैठाकर वर्दी में फोटो और वीडियो बनाती नजर आई थीं।
उस समय भी मामले ने तूल पकड़ा था और कार्रवाई की चर्चा हुई थी, लेकिन किसी कारणवश मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि इस बार पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधे निलंबन की कार्रवाई की है।
SOP उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस की नीति
बिहार पुलिस मुख्यालय पहले ही यह साफ कर चुका है कि कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में रील, वीडियो या निजी कंटेंट सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेगा। वर्दी को सरकारी जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसका दुरुपयोग गंभीर अनुशासनहीनता के दायरे में आता है।
इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अब विभाग ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और जनता के बीच गलत संदेश देती हैं।
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग से खुली पोल
पुलिस मुख्यालय की मॉनिटरिंग टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखते हुए इन मामलों को पकड़ा। जांच में सामने आया कि कई पुलिसकर्मी नियमों की अनदेखी कर वायरल होने के लिए रील बना रहे हैं।
इसके बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई का फैसला लिया और सूची तैयार कर सभी जिलों को भेज दी गई। अब संबंधित जिलों में एक-एक कर ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
पूरे राज्य में बढ़ी हलचल, पुलिसकर्मियों में संदेश साफ
इस कार्रवाई के बाद बिहार पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। कई पुलिसकर्मी अब अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से वर्दी में पोस्ट किए गए वीडियो हटाने में जुट गए हैं।
यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन पर अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पुलिस मुख्यालय का यह कदम विभाग की छवि को बनाए रखने और पेशेवर आचरण सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


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