500 रुपये में ‘शिकार’ लाता दलाल, फ्लैट में बनते थे अश्लील वीडियो… अमरावती सेक्स रैकेट का खौफनाक सच आया सामने



अमरावती सेक्स रैकेट में युवतियों का शोषण, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खुलासा, 6 आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच तेज


अमरावती में संगठित सेक्स रैकेट का बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के परतवाड़ा इलाके से सामने आया सेक्स रैकेट अब एक गंभीर और सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क के रूप में सामने आ रहा है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती जांच में जो मामला कुछ लोगों तक सीमित लग रहा था, अब वह एक बड़े गिरोह और संगठित अपराध की शक्ल ले चुका है। पुलिस की कार्रवाई में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इस मामले में कई और संदिग्धों की भूमिका सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह केवल यौन शोषण का मामला नहीं, बल्कि एक ऐसा रैकेट है जिसमें युवतियों को फंसाकर उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था और फिर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीसरी मंजिल के फ्लैट में चलता था ‘डर्टी गेम’

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मुख्य अड्डा अमरावती के कठोरा नाका इलाके में स्थित एक रिहायशी इमारत का फ्लैट था। यह फ्लैट इमारत की तीसरी मंजिल पर स्थित था, जहां आरोपी युवतियों को बहला-फुसलाकर लाते थे।

यहां लाने के बाद उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था और छिपे हुए कैमरों के जरिए उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाते थे। बाद में इन्हीं वीडियो का इस्तेमाल पीड़िताओं को डराने, धमकाने और चुप कराने के लिए किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह फ्लैट लंबे समय से इस अवैध गतिविधि का केंद्र बना हुआ था और यहां कई युवतियां इस गिरोह का शिकार बन चुकी हैं। पुलिस अब इस फ्लैट से जुड़े हर सबूत को खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं।

500 रुपये में ‘लड़कियों का जुगाड़’, दलाल की भूमिका चौंकाने वाली

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरे रैकेट में एक दलाल की अहम भूमिका थी, जिसे हर लड़की के बदले करीब 500 रुपये दिए जाते थे। यह व्यक्ति भोली-भाली युवतियों को झांसे में लेकर आरोपी के फ्लैट तक पहुंचाता था।

पुलिस के मुताबिक यह दलाल अलग-अलग तरीकों से युवतियों को अपने जाल में फंसाता था, जिनमें नौकरी का लालच, दोस्ती या अन्य बहाने शामिल थे। एक बार जब युवती फ्लैट तक पहुंच जाती थी, तो उसके साथ जबरन दुष्कर्म कर वीडियो बना लिया जाता था और फिर उसी वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया जाता था।

इस खुलासे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक व्यक्ति की करतूत नहीं थी, बल्कि इसमें कई लोग मिलकर एक संगठित अपराध को अंजाम दे रहे थे।

18 वीडियो और 39 फोटो बरामद, डिजिटल सबूतों से खुली परतें

पुलिस को जांच के दौरान अब तक 18 अश्लील वीडियो और 39 आपत्तिजनक फोटो मिले हैं, जो इस रैकेट के संचालन का पुख्ता सबूत माने जा रहे हैं। इन डिजिटल सबूतों से यह साफ हो गया है कि इस गिरोह ने कई युवतियों को अपना शिकार बनाया है।

इन वीडियो और फोटो के आधार पर पुलिस अब पीड़िताओं की पहचान करने और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन वीडियो को कहां-कहां और किन लोगों तक भेजा गया था।

डिजिटल फॉरेंसिक टीम भी इस मामले में सक्रिय हो गई है और मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की गहन जांच की जा रही है।

6 आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा पुलिस कस्टडी में

पुलिस ने इस मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हाल ही में हुई कार्रवाई में दो और आरोपियों को पकड़ा गया, जिससे इस मामले की जांच और तेज हो गई है।

गिरफ्तार आरोपियों में उजेर खान, तरबेज खान और मोहम्मद साद समेत अन्य शामिल हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 21 तारीख तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके।

पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने यह कबूल किया है कि उसने आपत्तिजनक वीडियो दूसरे आरोपी को भेजे थे, जिससे यह साबित होता है कि इस रैकेट में वीडियो वायरल करने का भी एक संगठित नेटवर्क मौजूद था।

पुलिस विभाग में भी हलचल, 6 पुलिसकर्मी हटाए गए

इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग के भीतर भी हड़कंप मचा दिया है। जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और किसी भी तरह के हस्तक्षेप को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए परतवाड़ा-अचलपुर थाने के 6 पुलिसकर्मियों को उनके पद से हटाकर कंट्रोल रूम में अटैच कर दिया है।

हटाए गए पुलिसकर्मियों में सलीम शेख, अब्दुल नाजिम, शुभम वर्मा, मयूर गुरव, मोहन वावरे और पुरुषोत्तम बावनेर शामिल हैं।

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन पुलिसकर्मियों की इस मामले में सीधी भूमिका थी या नहीं, लेकिन उनकी मौजूदगी को लेकर संदेह के चलते यह कार्रवाई की गई है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

SIT की जांच तेज, अन्य राज्यों से कनेक्शन की तलाश

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस रैकेट के तार अन्य शहरों या राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।

SIT अब उन सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने इस गिरोह की किसी भी रूप में मदद की हो। इसके अलावा उन पीड़िताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जो डर या बदनामी के डर से सामने नहीं आ पा रही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ