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मछलीशहर के लालती हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने महिला के शरीर से 7 किलो का ट्यूमर निकालकर जटिल सर्जरी को सफल बनाया।
इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट
मछलीशहर में चिकित्सा विज्ञान की बड़ी उपलब्धि
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद अंतर्गत तहसील मछलीशहर से चिकित्सा जगत की एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों का भरोसा और मजबूत कर दिया है। मछलीशहर नगर के मीरपुर चौराहा स्थित लालती हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर में एक महिला मरीज के शरीर से लगभग 7 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालकर डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान में एक नई मिसाल कायम की है। यह जटिल शल्य चिकित्सा सोमवार की रात्रि दिनांक 02 फरवरी 2026 को की गई, जिसे क्षेत्र के सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में गिना जा रहा है।
महीनों से पीड़ा झेल रही थी महिला मरीज
जानकारी के अनुसार, संबंधित महिला मरीज लंबे समय से गंभीर शारीरिक समस्याओं से जूझ रही थी। पेट और शरीर के भीतर बढ़ते असामान्य ट्यूमर के कारण महिला को लगातार दर्द, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ और दैनिक कार्यों में असहनीय परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। धीरे-धीरे ट्यूमर का आकार इतना बढ़ गया कि महिला की सामान्य जीवनशैली लगभग ठप हो गई थी। कई जगह उपचार कराने के बाद भी जब कोई ठोस समाधान नहीं मिला, तब परिजनों ने मछलीशहर स्थित लालती हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर में संपर्क किया।
जांच में सामने आया 7 किलो का विशाल ट्यूमर
लालती हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद महिला की गहन चिकित्सकीय जांच की गई। आधुनिक जांच मशीनों और अनुभवी डॉक्टरों की टीम द्वारा किए गए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और अन्य आवश्यक परीक्षणों में यह स्पष्ट हुआ कि महिला के शरीर के भीतर एक अत्यंत विशाल और जटिल ट्यूमर विकसित हो चुका है, जिसका वजन लगभग 7 किलोग्राम तक पहुंच चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, यह ट्यूमर न केवल आकार में बड़ा था बल्कि कई संवेदनशील अंगों के बेहद करीब होने के कारण इसे निकालना अत्यधिक जोखिम भरा माना जा रहा था।
जटिल ऑपरेशन की चुनौती और डॉक्टरों की रणनीति
महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से निकाला जाए, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण अंग को नुकसान न पहुंचे। वरिष्ठ सर्जन डॉ. ललित कुमार सिंह (MBBS, MS) के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में अनुभवी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी सहायक शामिल थे। ऑपरेशन से पहले कई बार मेडिकल मीटिंग कर रणनीति बनाई गई और हर संभावित जोखिम का गहन अध्ययन किया गया।
घंटों चली सर्जरी, हर पल था चुनौतीपूर्ण
02 फरवरी 2026 की रात को तय समय पर महिला को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। यह सर्जरी सामान्य ऑपरेशनों की तुलना में कहीं अधिक लंबी और जटिल थी। डॉक्टरों के अनुसार, ट्यूमर का आकार और उसकी स्थिति ऐसी थी कि हर कदम बेहद सावधानी से उठाना जरूरी था। सर्जरी के दौरान आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और नवीन तकनीकों का उपयोग किया गया, जिससे ट्यूमर को धीरे-धीरे अलग कर सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा सका। घंटों की मेहनत और एकाग्रता के बाद आखिरकार 7 किलोग्राम वजनी ट्यूमर को महिला के शरीर से सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर
सर्जरी के बाद महिला को कुछ समय के लिए क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी करती रही। चिकित्सकों के अनुसार, ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज की स्थिति अब स्थिर एवं संतोषजनक बताई जा रही है। महिला को धीरे-धीरे होश आया और उसकी हालत में स्पष्ट सुधार देखने को मिला। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर की गई इस जटिल सर्जरी के कारण महिला की जान बच पाई और वह तेजी से रिकवरी की ओर बढ़ रही है।
वरिष्ठ सर्जन डॉ. ललित कुमार सिंह की भूमिका
इस जटिल शल्य चिकित्सा में वरिष्ठ सर्जन डॉ. ललित कुमार सिंह की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। उनकी वर्षों की सर्जिकल अनुभव, सूझबूझ और टीम के साथ बेहतर तालमेल के कारण यह ऑपरेशन सफल हो सका। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की सर्जरी बड़े महानगरों के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में ही संभव मानी जाती है, लेकिन मछलीशहर जैसे कस्बे में इस तरह का सफल ऑपरेशन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
लालती हॉस्पिटल की आधुनिक सुविधाएं बनीं सहारा
लालती हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं ने इस जटिल सर्जरी को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई। अस्पताल में अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, हाई-टेक मॉनिटरिंग सिस्टम, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आपातकालीन सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे गंभीर से गंभीर मरीजों का भी सफल इलाज किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अस्पताल ने मछलीशहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए बड़ी राहत प्रदान की है।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने जताया आभार
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज के परिजनों ने राहत की सांस ली और डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन लालती हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने नई जिंदगी की सौगात दे दी। वहीं स्थानीय नागरिकों ने भी इस सफलता को मछलीशहर के लिए गर्व का विषय बताया और कहा कि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागने की मजबूरी कम हो रही है।
अस्पताल प्रबंधन का बयान
लालती हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर दीपक दुबे ने इस सफल सर्जरी को अस्पताल की टीमवर्क और डॉक्टरों की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अनुभवी चिकित्सकों के नेतृत्व में पूरी सावधानी और आधुनिक तकनीकों के साथ यह जटिल ऑपरेशन किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महिला मरीज पूरी तरह सुरक्षित है और वर्तमान में उसे किसी प्रकार की कोई गंभीर समस्या नहीं है।
क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा भरोसा
इस सफल शल्य चिकित्सा के बाद मछलीशहर और आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों का भरोसा काफी बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जटिल सर्जरी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से न केवल मरीजों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि गंभीर बीमारियों का समय पर इलाज भी संभव हो सकेगा। यह उपलब्धि मछलीशहर को चिकित्सा के नक्शे पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
चिकित्सा क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण
लालती हॉस्पिटल में हुई यह सर्जरी चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। यह साबित करता है कि अगर डॉक्टरों के पास अनुभव, समर्पण और आधुनिक संसाधन हों तो बड़े शहरों के बिना भी जटिल से जटिल इलाज संभव है। आने वाले समय में इस तरह की उपलब्धियां ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
मछलीशहर के लिए ऐतिहासिक क्षण
कुल मिलाकर, महिला के शरीर से 7 किलोग्राम का ट्यूमर निकालने की यह सफल सर्जरी मछलीशहर के इतिहास में एक यादगार और ऐतिहासिक क्षण बन गई है। यह न केवल डॉक्टरों की काबिलियत का प्रमाण है, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकसित हो रही स्वास्थ्य सुविधाओं की ताकत भी दिखाती है। इस उपलब्धि ने यह साफ कर दिया है कि अब मछलीशहर जैसे कस्बे भी उन्नत चिकित्सा सेवाओं के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं।


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