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गोरखपुर: ट्रेनी महिला सिपाहियों के बगावती हंगामे के बाद IPS आनंद कुमार सस्पेंड, DIG रोहित कनय भी लपेटे में!


गोरखपुर PAC की महिला सिपाहियों के हंगामे के बाद IPS आनंद कुमार सस्पेंड, DIG रोहित कनय हटे, ट्रेनिंग सिस्टम पर सवाल।


महिला सिपाहियों के गुस्से ने हिला दी यूपी पुलिस की बुनियाद!

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित 26वीं बटालियन PAC में प्रशिक्षण ले रहीं महिला सिपाहियों का गुस्सा अब भारी पड़ा है। लगातार अनदेखी और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर जब सैकड़ों महिला सिपाहियों ने आवाज बुलंद की, तो शासन और पुलिस मुख्यालय तक को हरकत में आना पड़ा।
इस बड़े हंगामे का असर अब IPS अधिकारियों पर दिखने लगा है। PAC के कमांडेंट रहे IPS आनंद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं DIG पीटीएस (पुलिस ट्रेनिंग स्कूल) गोरखपुर रोहित पी. कनय को उनके पद से हटा कर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है।

RTC प्रभारी संजय राय भी सस्पेंड, नए ASP को सौंपी गई जिम्मेदारी

महिला सिपाहियों की समस्याओं का समय से समाधान न करने पर RTC (Recruit Training Centre) प्रभारी संजय राय को भी निलंबित कर दिया गया है। संजय राय पर आरोप है कि उन्होंने महिला प्रशिक्षुओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और लंबे समय से लापरवाही का रवैया अपनाया।

अब ASP (अपर पुलिस अधीक्षक) पीटीएस गोरखपुर अनिल कुमार को नए प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब वह पूरे ट्रेनिंग सेंटर की कमान संभालेंगे।

DGP ऑफिस का आधिकारिक बयान: सख्त निर्देश, लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

इस पूरे मामले पर डीजीपी ऑफिस की तरफ से एक सख्त और स्पष्ट बयान जारी किया गया है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि महिला सिपाहियों द्वारा व्यक्त की गई समस्याओं को शासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। इसीलिए तुरंत कार्रवाई करते हुए संजय राय को निलंबित किया गया।
इसके अलावा जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कमांडेंट आनंद कुमार ने अपने कर्तव्यों में घोर लापरवाही बरती और महिला रिक्रूट्स के मुद्दों को समय रहते नहीं सुलझाया। उनके 'शिथिल पर्यवेक्षण' की वजह से 26वीं बटालियन का ट्रेनिंग वातावरण बिगड़ता गया। इसी आधार पर डीजीपी की संस्तुति पर उत्तर प्रदेश शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया।

महिला सिपाहियों के आरोप: पानी तक के लिए तरसना पड़ता था

प्रशिक्षणरत महिला सिपाहियों का आरोप है कि न सिर्फ उनके रहने और खाने की व्यवस्था खराब थी, बल्कि पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ता था। कई प्रशिक्षुओं ने शारीरिक उत्पीड़न, मानसिक दबाव और अव्यवस्थाओं की शिकायतें की थीं, लेकिन जब बार-बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने सामूहिक विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।



प्रशासनिक कार्रवाई से मचा पुलिस महकमे में हड़कंप

IPS आनंद कुमार और DIG रोहित पी. कनय जैसे वरिष्ठ अधिकारियों पर हुई इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। खासकर पुलिस ट्रेनिंग संस्थानों की जवाबदेही को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सरकार का यह संदेश साफ है कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ी किसी भी शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

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