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UP Police को मिला नया मुखिया! राजीव कृष्ण बने नए DGP, प्रशांत कुमार को झटका, नहीं मिला सेवा विस्तार



IPS राजीव कृष्ण बने यूपी के नए DGP, प्रशांत कुमार को नहीं मिला सेवा विस्तार, सीएम योगी के करीबी अफसर को बड़ी ज़िम्मेदारी


राजीव कृष्ण की ताजपोशी, यूपी पुलिस को मिला नया सेनापति

उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में लंबे इंतजार के बाद नया डीजीपी नियुक्त कर दिया गया है। शनिवार शाम सरकार ने जैसे ही राजीव कृष्ण के नाम का ऐलान किया, पूरे प्रदेश के अफसरशाही में हलचल मच गई। 1991 बैच के तेजतर्रार और ईमानदार छवि वाले आईपीएस अफसर राजीव कृष्ण अब यूपी के नए पुलिस महानिदेशक यानी DGP होंगे।

राजीव कृष्ण की गिनती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे विश्वसनीय अधिकारियों में होती है। इस नियुक्ति से ये संदेश साफ है कि अब यूपी पुलिस को सख्त, हाई-टेक और जवाबदेह बनाने की तैयारी है।

प्रशांत कुमार को झटका, सेवा विस्तार से इनकार

जहां एक ओर राजीव कृष्ण की नियुक्ति से उनके समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी ओर कार्यवाहक डीजीपी रहे प्रशांत कुमार को बड़ा झटका लगा है। उन्हें सेवा विस्तार नहीं दिया गया। इससे यह भी साफ हो गया कि योगी सरकार अब नए नेतृत्व के साथ पुलिस महकमे को आगे ले जाना चाहती है।

कौन हैं IPS राजीव कृष्ण? जानिए उनका पूरा प्रोफाइल

राजीव कृष्ण मूलतः उत्तर प्रदेश के नोएडा के निवासी हैं। उनका जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव फिलहाल पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन और डीजी इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

उनकी छवि एक सख्त लेकिन सिस्टमेटिक अफसर की रही है, जो ग्राउंड पर काम करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और हर जगह अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है।

पांचवें लगातार कार्यवाहक DGP बने राजीव कृष्ण

यूपी में बीते कुछ वर्षों में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी रही है। राजीव कृष्ण प्रदेश के लगातार पांचवें कार्यवाहक डीजीपी बने हैं। इससे पहले भी कई बार ऐसे अफसरों को अंतरिम रूप से जिम्मेदारी दी गई जो फिर स्थायी नहीं बन पाए।

सीएम योगी का ‘विश्वासपात्र’ अफसर

राजीव कृष्ण को सीएम योगी आदित्यनाथ का ‘विश्वासपात्र’ माना जाता है। इंटेलिजेंस विभाग में रहते हुए उन्होंने कई अहम जानकारियों से सरकार को समय रहते सतर्क किया और राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने में बड़ी भूमिका निभाई।

यही कारण है कि पुलिस महकमे में उनके चयन को "वेटिंग फॉर ऑर्डर" मानकर पहले से ही माना जा रहा था। हालांकि सरकार ने ऐलान को लेकर समय लिया लेकिन अंत में राजीव पर ही भरोसा जताया गया।

कब से संभालेंगे कमान?

सरकार ने फिलहाल उन्हें कार्यवाहक डीजीपी के रूप में नियुक्त किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जल्द ही उन्हें स्थायी डीजीपी का दर्जा भी मिल सकता है। वह पुलिस मुख्यालय में जल्द ही पदभार ग्रहण करेंगे।

राजनीतिक हलकों में भी चर्चा, प्रशांत कुमार को क्यों नहीं मिली एक्सटेंशन?

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रशांत कुमार, जिनकी कानून व्यवस्था सुधार में भूमिका महत्वपूर्ण रही, उन्हें सेवा विस्तार क्यों नहीं मिला? सूत्र बताते हैं कि सरकार अब "नए विजन, नई लीडरशिप" के साथ आगे बढ़ना चाहती है।

राजीव कृष्ण से क्या हैं उम्मीदें?

अब जब कमान एक नए चेहरे के हाथों में है, तो जनता, सरकार और महकमा – तीनों की निगाहें उनके कामकाज पर रहेंगी।

  • क्या वे यूपी पुलिस को तकनीकी रूप से और मज़बूत करेंगे?
  • क्या थानों की कार्यशैली में बदलाव लाएंगे?
  • क्या जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी?

इन सभी सवालों के जवाब उनके आने वाले कुछ महीनों में दिखने लगेंगे।

IAS और IPS लॉबी में कैसा है रिएक्शन?

अंदरखाने की बात करें तो यूपी कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने राजीव कृष्ण की नियुक्ति का स्वागत किया है। उन्हें सुलझा हुआ, नीतिगत और मैदानी स्तर पर फैसले लेने वाला अफसर माना जाता है।

सरकार का संदेश: जीरो टॉलरेंस, प्रोफेशनल पुलिसिंग

राजीव कृष्ण की नियुक्ति के साथ ही सरकार ने ये भी संकेत दे दिया है कि वह अब यूपी पुलिस में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। यानी अगला दौर पुलिस सुधार और कड़ी निगरानी का होगा।

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