शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद यूपी के कई शहरो में हुई पत्थरबाजी से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल ये कि पुलिस के लाख समझाने के बावजूद ये हिंसा भड़की कैसे? गुरुवार को ही पुलिस ने धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर अमन की गुजारिश की थी। इसके बाद भी किसी ने पुलिस को सही सूचना नहीं दी। अब शक के दायरे में वे भी भी आ गए हैं जो अफसरों संग टहलते हैं। पुलिस को एआईएमआईएम, वामपंथी संगठन और सपा से जुड़े लोगों पर शक है। एडीजी प्रेम प्रकाश ने कहा कि बैठक में कुछ लोगों ने भरोसा दिया था। उन्हीं लोगों ने विश्वासघात किया।
एडीजी ने ऐसे लोगों की सूची बनानी शुरू कर दी है, जो किसी न किसी संगठन या पार्टी से जुड़े हैं और बवाल का समर्थन भी कर रहे थे। इसमें एआईएमआईएम और वामपंथी संगठनों के कई पदाधिकारियों के नाम हैं। आईजी राकेश सिंह भी इसी पर फोकस किए हैं। उन्होंने कहा कि जितने लोग बैठक में आए थे बवाल के दौरान कहीं नजर नहीं आए। यह साजिश का इशारा है। आईजी ने कहा कि कुछ लोगों के नाम सामने भी आ गए हैं।
बवाल के बाद अटाला, रसूलपुर, करेली, तुलसीपुर, बक्शी बाजार के कई युवक देर रात तक अपने घर नहीं पहुंचे। ऐसे में उनके घरवाले बेचैन होकर इधर उधर तलाशते नजर आए। कई युवकों के परिजन खुल्दाबाद थाने पहुंच गए।


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।