15 अक्टूबर से UPI पर नया MDR लागू। जानिए किन लेन-देन पर लगेगा चार्ज और RBI गवर्नर ने आम जनता के लिए क्या कहा।
देश में 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक राशि वाले चुनिंदा मर्चेंट भुगतानों पर यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद साफ किया कि इस मामूली शुल्क से डिजिटल भुगतान की गति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए लेन-देन पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा और लगभग 96 फीसदी मर्चेंट पेमेंट्स इस नए दायरे से बाहर रहेंगे।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा?
बुधवार को अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा के उपरांत आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा से जब पूछा गया कि क्या 15 अक्टूबर से लागू होने वाले MDR के कारण यूपीआई लेन-देन में गिरावट आएगी और क्या व्यापक जनहित को देखते हुए आरबीआई इस लागत को खुद वहन करेगा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था पर निर्णय पहले ही लिया जा चुका है।
गवर्नर ने बताया कि वर्तमान में लेन-देन के आंकड़ों में किसी भी प्रकार की गिरावट दर्ज नहीं की गई है। उनका व्यक्तिगत रूप से मानना है कि इतनी मामूली फीस से डिजिटल लेन-देन के कुल वॉल्यूम पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य ग्राहकों पर बिना कोई वित्तीय भार डाले डिजिटल भुगतान के पूरे तंत्र को दीर्घकाल तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए यूपीआई को कुछ चुनिंदा बड़े मर्चेंट लेन-देन के लिए पुरानी जीरो-एमडीआर व्यवस्था से बाहर किया जा रहा है।
नया MDR फ्रेमवर्क: किन लेन-देन पर कितना शुल्क लगेगा?
नए नियमों के अनुसार शुल्क संरचना को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि छोटे कारोबारी और आम उपभोक्ता इससे अछूते रहें:
- P2M लेन-देन पर दर: 2,000 रुपये से अधिक राशि वाले चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत की दर से MDR लागू होगा।
- अधिकतम सीमा (Cap): 75,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के बड़े लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है।
- छोटे भुगतानों पर पूर्ण छूट: 2,000 रुपये तक के सभी मर्चेंट पेमेंट्स और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर व्यवस्था बरकरार रहेगी। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन नए शुल्क से पूरी तरह अप्रभावित रहेंगे।
- पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पूरी तरह फ्री: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में किए जाने वाले तमाम ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे ट्रांसफर की जाने वाली रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
क्या होता है MDR और किन क्षेत्रों के लिए तय हुए अलग नियम?
एमडीआर (Merchant Discount Rate) वह शुल्क नहीं है जो आम ग्राहक को यूपीआई से भुगतान करते समय अपनी जेब से चुकाना पड़ता है। यह मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के संचालन से जुड़ी एक आंतरिक फीस है, जिसे व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन कंपनियों के बीच साझा किया जाता है।
विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों के मार्जिन को ध्यान में रखते हुए नियमों में विशिष्ट प्रावधान किए गए हैं:
- कम मार्जिन वाले जरूरी क्षेत्र: रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन (फ्यूल) जैसे आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर केवल 5 रुपये का फिक्स्ड MDR लागू किया जाएगा।
- वित्तीय बाजार और ब्रोकिंग: म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, शेयर ब्रोकर और डीलर से संबंधित भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत की बेहद कम दर से शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त बोझ
आरबीआई के रुख से यह स्पष्ट है कि नए ढांचे से आम उपभोक्ताओं या मर्चेंट्स के यूपीआई इस्तेमाल करने की आदतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। यह शुल्क केवल ज्यादा मूल्य के डिजिटल पेमेंट्स प्रोसेस करने वाले मर्चेंट्स के स्तर पर ही देय होगा। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मर्चेंट इस MDR की लागत को अलग से किसी अतिरिक्त शुल्क के रूप में ग्राहकों से नहीं वसूल सकते।


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