SKM ने 23 अक्टूबर को SIR के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन का ऐलान किया। MSP की कानूनी गारंटी समेत सात मांगों पर आंदोलन तेज होगा।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हरियाणा के करनाल में हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जिला और तहसील स्तर पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया। मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न का विरोध करते हुए किसानों से एकजुट होने की अपील की है। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी समेत सात लंबित मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
SIR के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
संयुक्त किसान मोर्चा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। हरियाणा के करनाल में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद 23 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया। इसके तहत जिला और तहसील केंद्रों पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में किसानों के आंदोलन को व्यापक बनाने और नई दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने पर भी सहमति बनी। प्रदर्शन कहां-कहां होंगे, इसका फैसला SKM की राज्य इकाइयां करेंगी। मोर्चे के अनुसार, इन प्रदर्शनों में लाखों किसानों के शामिल होने की संभावना के बजाय उसके दावे के मुताबिक लाखों किसान भाग लेंगे।
SIR को रद्द करने और मतदान का अधिकार बहाल करने की मांग
संयुक्त किसान मोर्चा ने SIR को गैरकानूनी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। मोर्चे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी उठाई है।
SKM ने बिना पारदर्शिता के मतदाता सूची से हटाए गए सभी 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा, वर्ष 2023 के अधिनियम में संशोधन कर चयन पैनल में कैबिनेट मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग भी रखी गई है।
मोर्चे की बैठक में इन मांगों को लेकर आंदोलन के जरिए दबाव बनाने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए देशभर के किसानों तथा आम लोगों को एकजुट करने पर जोर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न पर SKM ने दी चेतावनी
संयुक्त किसान मोर्चा ने नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के कथित दमन और उत्पीड़न को लेकर चिंता जताई। मोर्चे ने दिल्ली पुलिस और RSS-BJP से जुड़े आपराधिक तत्वों पर युवा महिला छात्रों सहित प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और उत्पीड़न के आरोप लगाए।
SKM ने चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रहते हैं, तो किसान देशभर में आगे आकर उनकी रक्षा करेंगे। मोर्चे ने विशेष रूप से छात्रों और युवाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
बैठक में कहा गया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करना संविधान और कानून के शासन के सिद्धांतों के खिलाफ है। मोर्चे ने किसानों और आम नागरिकों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
न्यायपालिका की भूमिका पर भी उठाए सवाल
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सुप्रीम कोर्ट सहित न्यायपालिका की भूमिका की भी आलोचना की गई। SKM ने आरोप लगाया कि राजधानी में बड़े पैमाने पर हो रहे अपराधों पर स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई।
मोर्चे ने लोकतंत्र की रक्षा को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ते हुए देशभर के किसानों और नागरिकों से एकजुट होने की अपील की। बैठक में SIR, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और किसानों की लंबित मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का रुख अपनाया गया।
26 नवंबर को किसान आंदोलन की छठी बरसी, लंबी लड़ाई की तैयारी
संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने की अपील की है। 26 नवंबर को दिल्ली की सीमाओं पर शुरू हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन की छठी बरसी होगी। इस अवसर के मद्देनजर मोर्चे ने अपनी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए आंदोलन जारी रखने पर जोर दिया।
SKM ने किसानों से कहा है कि वे अपनी सभी सात प्रमुख मांगें पूरी होने तक कई दिनों तक चलने वाले विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तैयार रहें। मोर्चे का कहना है कि किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक संबंधित मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता।
MSP की कानूनी गारंटी समेत किसानों की सात प्रमुख मांगें
संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर सात प्रमुख मांगें दोहराई हैं। इनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को C2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी गारंटी देना प्रमुख है। इसके साथ ही मोर्चे ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का विरोध किया है।
किसानों की अन्य मांगों में कर्ज माफी और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देना शामिल है। मोर्चे ने किसानों के लिए पेंशन और बीमा की व्यवस्था करने की मांग भी रखी है।
इसके अलावा बिजली के निजीकरण को रोकने और सीड बिल 2025 को रद्द करने की मांग की गई है। SKM ने किसानों और आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा करने पर भी जोर दिया है।
श्रम क्षेत्र से जुड़ी मांगों में चार लेबर कोड लागू नहीं करने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बहाल करने की मांग शामिल है। मोर्चे ने इन मुद्दों को किसानों के व्यापक संघर्ष का हिस्सा बताया है।
करनाल की बैठक में 17 राज्यों से पहुंचे 142 प्रतिनिधि
हरियाणा के करनाल में हुई SKM की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में 17 राज्यों से कुल 142 लोग शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय प्रेसिडियम ने की। इसमें अशोक धवले, जोगिंदर सिंह उग्राहां, राकेश टिकैत, राजन क्षीरसागर, डॉ. सुनीलम, जगतार सिंह बाजवा और जोगिंदर सिंह नैन शामिल थे।
बैठक में रतन सिंह मान ने स्वागत भाषण दिया, जबकि पी. कृष्णप्रसाद ने एजेंडा प्रस्तुत किया। चर्चा में कुल 39 सदस्यों ने हिस्सा लिया। परिषद की बैठक में किसानों की लंबित मांगों, SIR के विरोध और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
23 अक्टूबर के प्रदर्शन पर रहेंगी नजरें
संयुक्त किसान मोर्चा के ऐलान के बाद 23 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर ध्यान रहेगा। मोर्चे ने जिला और तहसील केंद्रों पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है, जबकि आयोजन स्थलों का निर्धारण उसकी राज्य इकाइयां करेंगी।
SIR को रद्द करने, मतदान अधिकार बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ SKM ने किसानों के पुराने मुद्दों को भी आंदोलन के केंद्र में रखा है। MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पेंशन, बीमा और भूमि अधिकारों सहित सात प्रमुख मांगों पर मोर्चा लंबे संघर्ष की तैयारी कर रहा है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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