मेरठ के नीले ड्रम कांड में मुस्कान और साहिल को फांसी। जानिए सौरभ राजपूत हत्याकांड के वे अहम सबूत जिनसे खुला खौफनाक मर्डर का राज।
मेरठ के चर्चित 'नीले ड्रम कांड' यानी सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। 3 मार्च 2025 को हुई इस खौफनाक वारदात में सौरभ की हत्या कर शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में छिपा दिया गया। करीब 13 महीने चले ट्रायल, 126 सुनवाई, 22 गवाहों और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता डिजिटल व फिजिकल सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को इस जघन्य अपराध का दोषी माना है।
कैसे खुला था मेरठ का खौफनाक 'नीला ड्रम कांड'?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या कर दी गई थी। सबूत मिटाने के इरादे से आरोपियों ने शव के पांच टुकड़े किए और उसे एक नीले रंग के ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट का लेप लगा दिया। वारदात के 15 दिन बाद, 18 मार्च को जब सौरभ का छोटा भाई राहुल घर पहुंचा, तो उसे तेज दुर्गंध आई। जब उसने सौरभ के बारे में पूछा तो उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शक होने पर मामला खुला और पुलिस ने ड्रम से शव के टुकड़े बरामद कर लिए।
कॉल डिटेल्स और गवाहों ने खोली साजिश की पोल
इस मामले में पुलिस ने कई अहम सबूत जुटाए, जिन्होंने दोनों आरोपियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया। घटना वाली रात साहिल को सौरभ के घर जाते देखने वाले एक चश्मदीद का बयान कोर्ट में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसके अलावा, सौरभ के दोस्त संजीव पाल की गवाही, उसकी कॉल डिटेल और सौरभ की मां रेनू के फोन रिकॉर्ड ने भी घटनाओं की कड़ियों को जोड़ने का काम किया। पुलिस ने मुस्कान और साहिल की कॉल हिस्ट्री और सोशल मीडिया चैट्स को भी डिजिटल एविडेंस के रूप में पेश किया, जिससे हत्या की साजिश और दोनों के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि हुई।
चाकू, उस्तरा और शिमला-मनाली कनेक्शन
पुलिस जांच के दौरान घटनास्थल से इंसानी खून (ह्यूमन ब्लड) के नमूने मिले। बाद में पुलिस ने मुस्कान और साहिल की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू और उस्तरा भी बरामद किया, जो केस का सबसे अहम फिजिकल एविडेंस बना। हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी शिमला और मनाली घूमने चले गए थे। पुलिस ने उन होटलों के सीसीटीवी फुटेज और वहां के मैनेजर के बयानों को भी कोर्ट में रखा, जिससे यह साबित हुआ कि वारदात के बाद दोनों ने किस तरह खुद को बचाने की कोशिश की।
13 महीने का ट्रायल, 126 सुनवाई और जज का फैसला
यह पूरा ट्रायल लगभग 13 महीने तक चला। इस दौरान कोर्ट में 126 बार सुनवाई हुई और सरकारी पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। हथियारों की बरामदगी, होटल के रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए 30 सितंबर 2026 को कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी करार दिया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा का ऐलान किया।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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