लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध पर कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव सुधार के बजाय आंदोलन के जरिए देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है और युवाओं को गुमराह कर रहा है। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए आपातकाल, 1984 की हिंसा और अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने के मामलों को भी उठाया।
SIR विवाद के बीच बीजेपी का देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस अभियान
चुनाव आयोग की भूमिका और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं। इसी क्रम में लखनऊ स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।
राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष के आंदोलन का उद्देश्य युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करना है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता बदलने की बातें की जा रही हैं और सरकार को खुले तौर पर गिराने की बात कही जा रही है। उनके मुताबिक, इस तरह की गतिविधियां राजनीतिक सत्ता हासिल करने की साजिश का हिस्सा हैं।
'विपक्ष युवाओं की ऊर्जा को अराजकता की ओर मोड़ रहा है'
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगियों पर युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के बजाय राजनीतिक टकराव के लिए करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों का इस्तेमाल गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजनाथ सिंह के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि विपक्ष की लड़ाई केवल चुनाव सुधार या SIR तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ माहौल बनाकर अराजकता पैदा करने और सत्ता हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि झूठे आक्रोश के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उनके मुताबिक, ऐसी कोशिशों से भारत की विकास यात्रा को रोका नहीं जा सकता।
वोटर आईडी कार्ड और कांग्रेस की चुनावी सफलता पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकसभा में तब से बहुमत हासिल नहीं कर पाई, जब से वोटर आईडी कार्ड आया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने राज्य में आखिरी बार 1995 में विजय हासिल की थी, जबकि उस समय बीजेपी केवल दो सीटों वाली पार्टी थी। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से सवाल किया कि कांग्रेस की चुनावी हार के लिए वोट चोरी जिम्मेदार थी या पार्टी की अपनी राजनीतिक कमियां।
राहुल गांधी की ओर से वोट चोरी के आरोपों को 'हाइड्रोजन बम' बताए जाने पर भी रक्षा मंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस खुलासे को हाइड्रोजन बम बताया गया था, वह दिवाली का पटाखा भी साबित नहीं हुआ।
राहुल गांधी को राजनाथ सिंह की सलाह, लोकतंत्र में विरोध की भी सीमा
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को राजनीति में व्यवधान पैदा करने के बजाय अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति के लिए पर्याप्त जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने या अराजकता फैलाने का अधिकार हासिल कर ले।
राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं पर चोट पहुंचाने की अनुमति राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को नहीं दी जा सकती। उन्होंने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों को अराजकता का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के तीन अक्षम्य अपराध गिनाए
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए पार्टी पर तीन अक्षम्य अपराध करने का आरोप लगाया। उन्होंने पहला मामला 1975 में लगाए गए आपातकाल का बताया। उनके अनुसार, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने उस समय लोकतंत्र को दबाने का काम किया था।
दूसरे मामले में रक्षा मंत्री ने 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा का जिक्र किया। उन्होंने इसे सिख समुदाय का नरसंहार बताते हुए कांग्रेस पर हिंसा को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
तीसरे मामले के तौर पर उन्होंने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना उठाई। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि उस समय कारसेवकों पर गोली चलाने वालों को संरक्षण दिया गया और उन्हें बचाने का प्रयास किया गया।
इन तीन घटनाओं का उल्लेख करने के बाद रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब संविधान, संवैधानिक मूल्यों और संस्थाओं को नुकसान पहुंचाकर चौथा अपराध कर रही है। उन्होंने अपने बयान में इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगाए गए आपातकाल का भी जिक्र किया।
राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित करने का मामला भी उठाया
राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित किए जाने का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि पहले चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार की मृत्यु होने पर संबंधित सीट का चुनाव स्थगित कर दिया जाता था, लेकिन एक सीट के कारण पूरे चुनाव को स्थगित करने का कोई नियम नहीं है।
रक्षा मंत्री ने राजीव गांधी की हत्या को देश के लिए दुखद घटना बताया। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है, तो राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे देश का चुनाव स्थगित किए जाने के फैसले पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय अमेठी का चुनाव हो चुका था।
चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक टकराव के बीच राजनाथ सिंह का बयान
लखनऊ में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों को राजनीतिक संघर्ष से जोड़ते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने SIR, चुनाव सुधार, वोट चोरी के आरोपों और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए।
लखनऊ में प्रेस वार्ता। https://t.co/776gWv68ka
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 16, 2026
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस के पुराने राजनीतिक विवादों का उल्लेख करते हुए मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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