परिसीमन बिल पर किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर दो-टूक जवाब दिया है। जानें सरकार ने कांग्रेस की मांग पर क्या कहा।
परिसीमन संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच पत्राचार तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पीएम मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने करारा जवाब दिया है। रिजिजू ने पूछा है कि जब सरकार ने कई बार बातचीत की पहल की, तो अब अचानक सर्वदलीय बैठक की रट क्यों लगाई जा रही है? उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया है कि वे संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को अटकाने के बजाय रचनात्मक सहयोग दें।
खरगे की चिट्ठी पर सरकार का पलटवार
दरअसल, 16 अक्टूबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में उन्होंने मांग रखी थी कि संसद में परिसीमन संशोधन विधेयक (Delimitation Amendment Bill) लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों की एक साझा बैठक बुलाई जाए। इसी चिट्ठी के जवाब में अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खरगे को पत्र लिखकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है।
'राहुल गांधी से भी की थी मुलाकात, लेकिन कांग्रेस ने नहीं दिया समय'
किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि सरकार ने इस मुद्दे पर कांग्रेस से कई बार संवाद करने की कोशिश की है। उन्होंने जानकारी दी कि इसी साल 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल को खरगे को बाकायदा पत्र लिखकर बिल पर उनका समर्थन मांगा गया था। बात यहीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानसून सत्र के दौरान खुद रिजिजू ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से निजी तौर पर मुलाकात कर सहयोग की अपील की थी। सरकार का कहना है कि बार-बार गुजारिश करने के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने चर्चा के लिए कभी कोई तारीख तय नहीं की।
इन सात विपक्षी दलों से सरकार कर चुकी है चर्चा
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि जब कांग्रेस की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तो व्यापक सहमति बनाने के लिए सरकार ने अन्य क्षेत्रीय और विपक्षी दलों का रुख किया। इस बिल को लेकर सरकार डीएमके (DMK), समाजवादी पार्टी (SP), वाईएसआरसीपी (YSRCP), एनसीपी (NCP), शिवसेना-यूबीटी (Shiv Sena-UBT), एआईएमआईएम (AIMIM) और बीजेडी (BJD) के नेताओं से विचार-विमर्श कर चुकी है। रिजिजू ने सवाल दागा कि जब सरकार अपनी तरफ से विपक्ष को साथ लेकर चलने का हर संभव प्रयास कर चुकी है, तो अब अलग से सर्वदलीय बैठक बुलाने का क्या औचित्य है? उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस अब भविष्य में अहम कानूनों को रोकने की कोशिश नहीं करेगी।
My Letter to:- President of Congress Party & Leader of the Opposition in Rajya Sabha, Shri Mallikarjun Kharge Ji, in response to his letter to Hon'ble Prime Minister. https://t.co/mKfH9veqz5
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) October 19, 2026
सत्रावसान (Prorogation) को लेकर गिनाए पुराने नियम और उदाहरण
पत्र में संसद के सत्रावसान को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया गया। किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि संविधान में सदन के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Adjournment Sine Die) होने और सत्रावसान (Prorogation) के बीच किसी भी तय समय-सीमा का कोई नियम नहीं है। पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 1963, 1987, 1989, 2006, 2008 और 2013 में भी इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच लंबा अंतर देखा जा चुका है। एक पुराना उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक बार सदन का सत्रावसान होने में 87 दिनों तक का वक्त लग गया था।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।