Jio IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा। जानें प्राइस बैंड, GMP, 30,200 करोड़ के इश्यू, वैल्यूएशन और RIL शेयरों पर संभावित असर की जानकारी।
रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का बहुप्रतीक्षित IPO 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी ने इसके लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस इश्यू के जरिए करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। संभावित प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर बताया गया है। यह IPO भारत का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है।
Jio IPO की तारीख और निवेश से जुड़ी अहम जानकारी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी Jio Platforms Ltd का IPO भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल होने की उम्मीद है। कंपनी की ओर से बुधवार को दाखिल किए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, IPO के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 21 अक्टूबर से शुरू होगी और 23 अक्टूबर को समाप्त होगी। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।
इस सार्वजनिक निर्गम में 27 करोड़ नए शेयर शामिल हैं। कंपनी ने योग्य कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए हैं।
14 अक्टूबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के सार्वजनिक इक्विटी शेयर रखने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अधीन शेयरधारक आरक्षण श्रेणी में आवेदन करने के पात्र होंगे।
Jio IPO का संभावित प्राइस बैंड और वैल्यूएशन
रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स लगभग 106 अरब डॉलर यानी करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन का लक्ष्य रख रही है। कंपनी संभावित प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर IPO के जरिए करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।
बताया गया है कि शेयरों का संभावित प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को अंतिम कीमत की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार रहेगा।
यदि कंपनी इस वैल्यूएशन पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है, तो वह भारत की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो सकती है। इस निर्गम का आकार हुंडई मोटर इंडिया के 2024 में आए IPO से भी बड़ा होने की उम्मीद है। फिलहाल हुंडई मोटर इंडिया का IPO देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम है।
क्या Jio IPO का वैल्यूएशन निवेशकों के लिए आकर्षक है?
जियो के प्रस्तावित वैल्यूएशन को लेकर बाजार के जानकारों की नजर कंपनी की कमाई और भविष्य में होने वाली वृद्धि पर है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार, करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर कंपनी का वित्त वर्ष 2028 का अनुमानित EV/Ebitda अनुपात लगभग 12 गुना हो सकता है।
तुलना के लिए, भारती एयरटेल के भारतीय कारोबार का यह अनुपात लगभग 10.3 गुना बताया गया है। इस गणना में इंडस टावर्स को शामिल नहीं किया गया है।
बोनान्जा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि जियो का प्रस्तावित मूल्यांकन बहुत सस्ता होने के बजाय उचित से थोड़ा सावधानीपूर्ण नजर आता है। उनके मुताबिक, इस कीमत पर निवेशकों को उचित बढ़त की संभावना मिल सकती है, बशर्ते कंपनी की कमाई बढ़े और टैरिफ में बढ़ोतरी से मुनाफे को समर्थन मिले।
Jio IPO में पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO पूरी तरह नए शेयर जारी करने पर आधारित है। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। इसका अर्थ है कि इस इश्यू के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो के मौजूदा रणनीतिक निवेशकों के अपने शेयर बेचने की योजना नहीं है।
इन निवेशकों में मेटा, गूगल, मुबाडाला और सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड शामिल हैं। नए शेयर जारी होने से प्राप्त रकम सीधे जियो प्लेटफॉर्म्स को मिलेगी।
इससे पहले आई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि कुछ मौजूदा निवेशक IPO के दौरान जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा निर्गम में शेयर बेचने के बजाय नए शेयर जारी किए जाएंगे।
मेटा की सहयोगी कंपनी जादू होल्डिंग्स (Jaadhu Holdings) जियो प्लेटफॉर्म्स की सबसे बड़ी बाहरी निवेशक है। कंपनी में इसकी हिस्सेदारी 9.98 प्रतिशत बताई गई है। इसके बाद गूगल इंटरनेशनल की 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
IPO से मिलने वाले पैसों का क्या करेगी जियो?
जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट दस्तावेजों के मुताबिक, IPO से प्राप्त शुद्ध रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल मुख्य रूप से रिलायंस जियो इन्फोकॉम से जुड़े कर्ज को चुकाने या समय से पहले भुगतान करने के लिए किया जाएगा। बची हुई राशि सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों पर खर्च की जाएगी।
इस व्यवस्था के तहत कंपनी को अपने टेलीकॉम कारोबार से संबंधित वित्तीय देनदारियों को कम करने के लिए पूंजी उपलब्ध होगी। IPO के जरिए जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास जाएगी, क्योंकि इसमें पुराने शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने का प्रावधान नहीं है।
Jio Platforms का कारोबार कितना बड़ा है?
जियो प्लेटफॉर्म्स के अंतर्गत रिलायंस समूह के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार आते हैं। कंपनी की गतिविधियां केवल मोबाइल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं। इसके कारोबार में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाएं, मनोरंजन, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेवाएं भी शामिल हैं।
कंपनी के पास मार्च तक लगभग 52.4 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे। इतने बड़े ग्राहक आधार और विविध डिजिटल सेवाओं के कारण जियो का IPO घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Jio IPO को लेकर बड़े निवेशकों की दिलचस्पी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जियो के IPO को लेकर संभावित निवेशकों से पहले ही 20 अरब डॉलर से अधिक की बोलियां मिलने की खबर है। फिडेलिटी, एलियांज और कैपिटल ग्रुप जैसे वैश्विक निवेशकों के अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय और घरेलू संस्थानों ने भी इस निर्गम में दिलचस्पी दिखाई है।
हालांकि, रिपोर्टों में सामने आए इन आंकड़ों को अंतिम सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों से अलग समझना जरूरी है। IPO की वास्तविक मांग का आकलन बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किया जा सकेगा।
Jio IPO GMP: ग्रे मार्केट में कितने प्रीमियम पर शेयर?
IPO से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को लेकर ग्रे मार्केट में भी गतिविधि बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर लगभग 218 रुपये या 19 प्रतिशत के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे।
यदि IPO का ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये रहता है और ग्रे मार्केट में बताया गया प्रीमियम बना रहता है, तो अनुमानित कीमत 1,337 रुपये प्रति शेयर हो सकती है।
हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) अनौपचारिक बाजार का संकेतक है। इसमें बदलाव हो सकता है और यह शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता। अंतिम नतीजा IPO की मांग, तय इश्यू प्राइस और लिस्टिंग के समय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
Reliance Industries के शेयरों पर क्या पड़ सकता है असर?
जियो प्लेटफॉर्म्स की संभावित लिस्टिंग रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए भी अहम मानी जा रही है। IPO के बाद निवेशक जियो के डिजिटल कारोबार का मूल्यांकन स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे। फिलहाल यह कारोबार रिलायंस समूह की व्यापक संरचना का हिस्सा है, जिसमें ऑयल-टू-केमिकल्स, रिटेल और नई ऊर्जा जैसे व्यवसाय भी शामिल हैं।
अलग सूचीबद्ध इकाई बनने से जियो की बाजार कीमत सामने आएगी और निवेशकों को उसके कारोबार का स्वतंत्र मूल्यांकन करने का अवसर मिलेगा। इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल वैल्यूएशन को समझने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, RIL के शेयरों पर IPO का वास्तविक असर कई कारकों पर निर्भर करेगा। इनमें जियो का अंतिम वैल्यूएशन, IPO को मिलने वाली मांग, लिस्टिंग के दिन शेयर का प्रदर्शन और रिलायंस के होल्डिंग-कंपनी डिस्काउंट में संभावित बदलाव शामिल हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक, जियो में सार्वजनिक निवेशकों के लिए उपलब्ध शेयरों की सीमित संख्या के कारण तत्काल वैल्यू अनलॉक होने की गुंजाइश कम रह सकती है। इसकी वजह यह है कि लिस्टिंग के बाद भी कंपनी की अधिकांश हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास रहने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है Jio IPO?
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO अपने संभावित आकार, कंपनी के ग्राहक आधार और डिजिटल कारोबार के विस्तार के कारण बाजार में चर्चा का विषय है। इस निर्गम से कंपनी को नई पूंजी मिलेगी, जिसका बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने के लिए निर्धारित किया गया है।
निवेशकों के लिए प्राइस बैंड, कंपनी का वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन और शेयर बाजार में संभावित मांग महत्वपूर्ण पहलू होंगे। ग्रे मार्केट प्रीमियम और शुरुआती निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार की भावना का संकेत मिल सकता है, लेकिन इन्हें भविष्य के प्रदर्शन की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता।
जियो IPO के लिए 21 से 23 अक्टूबर की निर्धारित अवधि, 19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों की बोली और संभावित 30,200 करोड़ रुपये का निर्गम इसे भारतीय शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनाते हैं।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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