ताजा खबरें

5/National/ticker-posts

बड़ी खबरें

Recent/hot-post

हॉस्पिटल का मनमाना बिल अब नहीं चलेगा! केंद्र का कड़ा आदेश—एंट्री पर ही चस्पा करनी होगी हर इलाज की रेट लिस्ट



अस्पतालों में मनमानी बिलिंग रोकने को केंद्र सरकार का आदेश; इलाज और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से दिखाना हुआ अनिवार्य।

​अस्पतालों में इलाज के भारी-भरकम बिलों से परेशान मरीजों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अस्पतालों में सुविधाओं के रेट प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था का मकसद मेडिकल बिलिंग में पारदर्शिता लाना और तीमारदारों को पहले से संभावित खर्च की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि इलाज के दौरान होने वाली मनमानी पर लगाम लग सके।

​केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को लिखा पत्र, नियमों के सख्त पालन की हिदायत

​अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के मकसद से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को सतर्क किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस बाबत अधिकारियों को आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि संबंधित अधिकारी हेल्थकेयर संस्थानों द्वारा वर्तमान नियमों के पालन की गहन समीक्षा करें और दरों को प्रदर्शित करने के प्रावधानों को पूरी सख्ती से धरातल पर उतारने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

​क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट: स्थानीय भाषा और अंग्रेजी दोनों में लगानी होगी रेट लिस्ट

​केंद्र सरकार ने उन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है, जहां ‘क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट’ प्रभावी है। इस कानून के नियम 9 के तहत हर स्वास्थ्य केंद्र के लिए यह कानूनी तौर पर अनिवार्य है कि वह अपने यहां दी जाने वाली सभी सेवाओं और सुविधाओं की दरें सार्वजनिक करे।

​यह रेट लिस्ट अस्पताल परिसर में ऐसे स्थान पर लगाई जानी चाहिए जो मरीजों और उनके परिजनों को आसानी से नजर आ सके। साथ ही, इसे स्थानीय भाषा और अंग्रेजी दोनों में लिखना अनिवार्य किया गया है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी सहित जिन राज्यों में यह केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां के अधिकारियों को अपने मौजूदा राज्य स्तरीय रेगुलेटरी सिस्टम के जरिए ही यह व्यवस्था लागू कराने को कहा गया है।

​मनमाने बेड चार्ज और दवाओं के भारी मार्कअप पर लगेगा अंकुश

​अक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर में मरीजों को इलाज पूरा होने के बाद अप्रत्याशित बिल थमा दिए जाते हैं। महंगे बेड चार्ज, दवाओं और मेडिकल सामग्रियों पर वसूले जाने वाले ऊंचे मार्कअप को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। मंत्रालय का मानना है कि खर्चों की सूची सामने रहने से मरीज के परिजन अपने बजट की पूर्व योजना बना सकेंगे और सही निर्णय ले पाएंगे। इससे बिल को लेकर होने वाले विवाद घटेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आमजन का भरोसा मजबूत होगा।

​विदेशी मरीजों के लिए भी पैकेज दरें घोषित करना अनिवार्य

​स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया है कि मेडिकल अथवा आयुष वीज़ा के तहत भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए भी पैकेज दरें सार्वजनिक की जाएं। जब पैकेज रेट्स पहले से तय और सार्वजनिक होंगे, तो विदेशी नागरिक इलाज कराने से पहले आसानी से खर्च की तुलना कर सकेंगे। इससे मेडिकल टूरिज्म के दौरान बिलिंग से जुड़े विवादों में कमी आएगी और आयुष व मेडिकल केयर के क्षेत्र में भारत की वैश्विक साख और मजबूत होगी।


​साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ