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दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और पुलिस समेत कई एजेंसियों को नोटिस; मेट्रो, इंटरनेट और बैरिकेडिंग पर दिए ये निर्देश


दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट के 5 निर्देश, केंद्र-पुलिस समेत एजेंसियों को नोटिस। मेट्रो, इंटरनेट और बैरिकेडिंग पर सख्ती।

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों और 47 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, रेलवे और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, इंटरनेट की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा बैरिकेडिंग की समीक्षा करने समेत पांच निर्देश दिए हैं।

दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और मेट्रो सेवाओं पर असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों से जवाब मांगा है। विशेष पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, रेलवे और DMRC को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी ध्यान रखना जरूरी है। कोर्ट ने बैरिकेडिंग के फैसले की समीक्षा करने और शहर में लोगों की आवाजाही को कानून के अनुरूप सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिए पांच अहम निर्देश

1. मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मेट्रो और रेल सुविधाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहें। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका होने पर आवश्यक नियम लागू करने की स्थिति में उचित कदम उठाए जा सकते हैं।

2. बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने को कहा

अदालत ने शहर में लोगों की आवाजाही पर ट्रैफिक नियमों के तहत अनावश्यक रोक नहीं लगाने का निर्देश दिया। साथ ही, कानून-व्यवस्था और यातायात की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड लगाने के फैसले की तुरंत समीक्षा करने को कहा।

3. इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सुविधाओं को बिना किसी रुकावट के जारी रखने का निर्देश दिया। अदालत के निर्देशों के मुताबिक, इंटरनेट सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

4. शहर में आवाजाही सुचारू रखने का निर्देश

कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार शहर में लोगों की आवाजाही सुचारू रूप से जारी रहनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान यातायात और सार्वजनिक आवागमन से जुड़े इंतजामों में लागू कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।

5. कानूनी प्रक्रिया के बिना हिरासत पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाए। खास तौर पर उन क्षेत्रों में शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र हुए लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आसपास लगे बोर्ड हटाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के आसपास धारा 163 से संबंधित बोर्डों को लेकर भी निर्देश दिया। अदालत ने अधिकारियों से कहा कि यदि संबंधित बोर्ड अभी तक नहीं हटाए गए हैं, तो उन्हें हटाया जाए।

कोर्ट का कहना था कि इस व्यवस्था के कारण किसी व्यक्ति को अदालत तक पहुंचने या वहां से आने-जाने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। न्याय पाने के लिए अदालत आने वाले लोगों के मन में किसी तरह का डर या आशंका भी नहीं रहनी चाहिए।

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालत ने मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले अधिकारों की रक्षा की गई है और कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि बिना बैज पहने पुलिस अधिकारियों की ओर से बल प्रयोग किए जाने के मामले की जांच की जाएगी। जस्टिस बागची ने सॉलिसिटर जनरल (SG) से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकना सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि उन स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में नहीं लिया जाए, जहां BNSS की धारा 163 लागू नहीं है। अदालत ने कानून के मुताबिक लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और आवाजाही करने से संबंधित निर्देश भी दिए।

कोर्ट ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने, इंटरनेट सुविधाएं निर्बाध रखने तथा यातायात और बैरिकेडिंग से जुड़े इंतजामों की समीक्षा करने पर जोर दिया। इन निर्देशों के साथ अदालत ने संबंधित एजेंसियों से उनके कदमों और कानूनी दायित्वों के संबंध में जवाब मांगा है।

दिल्ली में प्रदर्शन और सार्वजनिक सुविधाओं पर अदालत की नजर

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर लगाए गए प्रतिबंधों और 47 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में नागरिकों के मौलिक अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और शहर में आवागमन प्रमुख मुद्दे रहे।

अदालत ने अपने निर्देशों में मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाओं को सामान्य बनाए रखने, बैरिकेडिंग की समीक्षा करने तथा कानून के अनुरूप लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही, पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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