देश में ‘वन नेशन, वन टाइम’ व्यवस्था को लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने 27 अगस्त को Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है। नियम लागू होने के बाद कानूनी, सरकारी, कारोबारी और आधिकारिक कामों के लिए इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) को ही मान्य समय मानक बनाया जाएगा। हालांकि आम लोगों को अपनी घड़ी या मोबाइल का समय बदलने की जरूरत नहीं होगी।
क्या है ‘वन नेशन, वन टाइम’ व्यवस्था
सरकार की इस पहल का उद्देश्य पूरे देश में एक समान और सटीक समय मानक स्थापित करना है। मौजूदा समय में भारत में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम यानी IST का इस्तेमाल होता है, लेकिन अलग-अलग डिजिटल प्रणालियों में समय की जानकारी अलग-अलग सर्वरों या स्रोतों से प्राप्त हो सकती है।
इसी वजह से अलग-अलग डिवाइस और नेटवर्क में समय का मामूली अंतर दिखाई दे सकता है। नई व्यवस्था के तहत देश में आधिकारिक समय के लिए एक समान और विश्वसनीय स्रोत को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
27 अगस्त को जारी हुए नए नियम
उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से 27 अगस्त को Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया गया। इन नियमों के मुताबिक गजट में प्रकाशन के 180 दिन बाद नई व्यवस्था लागू होगी।
नियम प्रभावी होने के बाद कानूनी, सरकारी, कारोबारी और आधिकारिक गतिविधियों में निर्धारित इंडियन स्टैंडर्ड टाइम को ही आधिकारिक समय मानक के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या आम लोगों को घड़ी का समय बदलना पड़ेगा?
नई व्यवस्था लागू होने पर आम लोगों को अपनी घड़ी, मोबाइल या अन्य डिवाइस में समय बदलने की जरूरत नहीं होगी। मौजूदा समय में घड़ियों पर जो IST प्रदर्शित हो रहा है, वह जारी रहेगा।
फर्क मुख्य रूप से डिजिटल प्रणालियों के बैकएंड में होगा। मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल डिवाइस और कंप्यूटर जैसी प्रणालियों को भारत के आधिकारिक समय स्रोत से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि समय की सटीकता और एकरूपता बेहतर हो सके।
समय के अंतर को खत्म करने पर जोर
सरकार की योजना देश की अलग-अलग प्रणालियों में समय की एकरूपता सुनिश्चित करने की है। मौजूदा व्यवस्था में कुछ प्रणालियां अलग-अलग सर्वरों और स्रोतों से समय प्राप्त करती हैं। इनमें विदेशी स्रोत भी शामिल हैं।
नए सिस्टम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के नेटवर्क, कंप्यूटर, डिजिटल डिवाइस और दूसरी महत्वपूर्ण प्रणालियां आधिकारिक भारतीय समय के साथ समन्वय में रहें।
साइबर जांच में भी हो सकती है मदद
साइबर अपराध और आतंकी गतिविधियों जैसी जांच में अलग-अलग डिजिटल उपकरणों पर दर्ज समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि विभिन्न उपकरणों में समय का अंतर हो, तो घटनाओं के सटीक समय का मिलान करने में कठिनाई हो सकती है।
एक समान समय मानक होने से अलग-अलग प्रणालियों में दर्ज टाइम-स्टैम्प को आपस में मिलाने में सहायता मिल सकती है। इससे समय आधारित रिकॉर्ड की सटीकता को बेहतर करने का उद्देश्य है।
बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण
समय की सटीकता बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन, शेयर बाजार और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण होती है। बैंकिंग ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल गतिविधियों में टाइम-स्टैम्प का इस्तेमाल किया जाता है।
इसी तरह रेलवे, एयरपोर्ट और अन्य ट्रांसपोर्ट सिस्टम में अलग-अलग प्रणालियों के बीच सही समय का तालमेल जरूरी होता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में समय संबंधी समन्वय को और मजबूत करना है।
दूरसंचार, बिजली और सरकारी रिकॉर्ड में भी इस्तेमाल
‘वन नेशन, वन टाइम’ व्यवस्था का असर केवल मोबाइल या कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत दूरसंचार और इंटरनेट नेटवर्क, पावर सिस्टम, सरकारी रिकॉर्ड तथा कानूनी प्रक्रियाओं में भी सटीक समय के इस्तेमाल को मजबूत करने की योजना है।
इमरजेंसी सेवाओं और अन्य ऐसी गतिविधियों में भी सटीक टाइमिंग महत्वपूर्ण होती है, जहां घटनाओं का समय दर्ज करना और अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल बनाए रखना जरूरी होता है।
विदेशी समय स्रोतों पर निर्भरता घटाने की कोशिश
नई व्यवस्था के तहत भारत अपने आधिकारिक समय मानक के लिए घरेलू संस्थानों और सरकारी प्रयोगशालाओं के माध्यम से मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
मौजूदा समय में कुछ प्रणालियां अमेरिकी GPS और दूसरे विदेशी स्रोतों से समय संबंधी जानकारी प्राप्त करती हैं। भारत अपने स्वदेशी NavIC नेविगेशन सिस्टम और NPL के माध्यम से आधिकारिक IST को ज्यादा व्यापक और सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
‘व्हाइट रैबिट’ तकनीक का जुलाई में हुआ प्रदर्शन
‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के तहत जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित RRSL लैब में ‘व्हाइट रैबिट’ नाम की तकनीक का प्रदर्शन किया गया था। इस तकनीक के जरिए भारतीय मानक समय यानी IST को सुरक्षित तरीके से दूर-दराज के स्थानों तक पहुंचाने का प्रदर्शन किया गया।
इस सिस्टम के जरिए बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समय पहुंचाने का प्रदर्शन किया गया।
बेंगलुरु से चेन्नई तक भेजा गया IST
इस पहल के तहत CSIR-NPL, ISRO, SEBI, NSE, BSNL और अन्य संस्थानों के सहयोग से बेंगलुरु से चेन्नई स्थित NSE तक सुरक्षित तरीके से IST भेजने का भी प्रदर्शन किया गया।
इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि आधिकारिक भारतीय समय को विभिन्न स्थानों और महत्वपूर्ण प्रणालियों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
180 दिन का समय क्यों दिया गया?
नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होंगे। गजट में प्रकाशन के बाद इन्हें लागू होने में 180 दिन का समय रखा गया है।
इस अवधि में कंपनियों और संस्थानों को अपनी मौजूदा प्रणालियों की जांच करने, आवश्यक तकनीकी बदलाव करने और नई समय व्यवस्था के अनुरूप अपने सिस्टम तैयार करने का अवसर मिलेगा।
‘वन नेशन, वन टाइम’ से क्या बदलेगा?
इस पहल का मुख्य बदलाव आम लोगों की घड़ी के समय में नहीं, बल्कि समय की आधिकारिक और तकनीकी व्यवस्था में होगा। उद्देश्य यह है कि देश की महत्वपूर्ण डिजिटल और तकनीकी प्रणालियां एक समान आधिकारिक IST के साथ काम करें।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कानूनी, सरकारी, कारोबारी और आधिकारिक कामों में निर्धारित भारतीय मानक समय का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विभिन्न प्रणालियों के बीच समय के अंतर को कम करने और सटीक टाइम-स्टैम्पिंग को मजबूत करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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