जोधपुर हाईकोर्ट के 220 करोड़ के गुंबद को IIT बॉम्बे ने असुरक्षित बताया। जंग और दरारों पर कोर्ट ने जवाब मांगा।
जोधपुर हाईकोर्ट के मुख्य गुंबद को लेकर IIT बॉम्बे की ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर संरचनात्मक खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में गुंबद को असुरक्षित बताते हुए जंग, दरार और कंक्रीट स्पॉलिंग जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। करीब 220 करोड़ रुपये की लागत से दिसंबर 2019 में तैयार हुई इस इमारत को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार और निर्माण से जुड़े पक्षों से 24 अगस्त तक जवाब मांगा है।
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में गुंबद को बताया गया असुरक्षित
जोधपुर हाईकोर्ट के मुख्य गुंबद की सुरक्षा को लेकर IIT बॉम्बे की ऑडिट रिपोर्ट के बाद मामला गंभीर हो गया है। रिपोर्ट में भवन के कई संरचनात्मक हिस्सों में जंग की समस्या सामने आने की बात कही गई है। करीब 40 प्रतिशत क्षेत्र को संवेदनशील पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नमी, कार्बोनेशन और क्लोराइड के कारण जंग तेजी से बढ़ सकती है, जिससे कंक्रीट के हिस्से अचानक गिरने का खतरा बताया गया है।
विशेषज्ञों ने गुंबद को असुरक्षित और कभी भी ढहने वाला बताया है। इसके चलते हाईकोर्ट में मौजूद जजों, वकीलों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।
हाईकोर्ट ने सरकार और जिम्मेदार पक्षों से मांगा जवाब
ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद जोधपुर हाईकोर्ट ने मामले पर गंभीर नाराजगी जताई है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने राज्य सरकार समेत निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी पक्षों को 24 अगस्त तक विस्तृत शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने सुरक्षा ऑडिट से जुड़े अधिकारियों, निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका स्पष्ट करने को कहा है। इसके अलावा वित्तीय जवाबदेही और समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना भी मांगी गई है।
24 अगस्त को कई बड़े अधिकारियों की मौजूदगी के निर्देश
हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को होने वाली सुनवाई में कई अधिकारियों और विशेषज्ञ संस्थानों के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इनमें मुख्य सचिव, वित्त एवं पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव, आरएसआरडीसी के एमडी, डीजीपी के साथ IIT जोधपुर और IIT बॉम्बे के प्रतिनिधि शामिल हैं।
कोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही डोम के खुले हिस्से में बैरिकेडिंग करके उसे सुरक्षित करने को कहा गया है। भवन में केवल ड्राई मॉपिंग कराने और सीपेज तथा प्लंबिंग लीकेज को दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
24 घंटे स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग और कंट्रोल रूम
हाईकोर्ट ने भवन की सुरक्षा को लेकर कई तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इनमें 24 घंटे स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग, सुरक्षा और निकासी प्रोटोकॉल लागू करना शामिल है। इसके अलावा 72 घंटे के भीतर मॉक ड्रिल कराने और 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
IIT जोधपुर की रिपोर्ट में भी मिली थीं गंभीर खामियां
जोधपुर हाईकोर्ट भवन की स्थिति को लेकर पहले IIT जोधपुर की रिपोर्ट में भी कई खामियां सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट में स्टील बार में जंग, कंक्रीट में दरारें, छत के किनारे मौजूद कॉलम में गंभीर क्षरण और वॉटरप्रूफिंग से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया गया था।
इससे पहले हुए स्ट्रक्चरल ऑडिट में भी कंक्रीट की गुणवत्ता, कार्बोनेशन और पानी में अधिक क्लोराइड की समस्या सामने आई थी। इसके बाद आरएसआरडीसी ने मरम्मत के लिए 57.65 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया था।
निर्माण कंपनी के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
करीब दो साल पहले हाईकोर्ट के कोर्ट ऑफिसर शरद जोशी ने कुड़ी थाने में निर्माण कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। भवन की स्थिति को लेकर सामने आई अलग-अलग रिपोर्ट और घटनाओं के बीच अब IIT बॉम्बे की ऑडिट रिपोर्ट ने गुंबद की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
2023 से सामने आती रही हैं भवन में गिरने और क्षति की घटनाएं
हाईकोर्ट भवन में खामियां सामने आने का सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 2023 से छत, फॉल्स सीलिंग और डोम के कुछ हिस्सों के गिरने की घटनाएं होती रही हैं। इसके अलावा पिलरों में दरारें और सरियों में जंग की समस्या भी सामने आती रही।
वर्ष 2024 में कोर्ट चैंबर में आग लगने के दौरान फायर सिस्टम के काम नहीं करने के आरोप भी लगे थे। खबर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन समस्याओं के बावजूद समाधान की दिशा में आरएसआरडीसी की ओर से कदम नहीं उठाए गए।
220 करोड़ में बनी हाईकोर्ट की नई इमारत
जोधपुर हाईकोर्ट की नई इमारत का निर्माण कार्य आरएसआरडीसी ने वर्ष 2008 में शुरू किया था। करीब 11 साल बाद दिसंबर 2019 में यह भवन बनकर तैयार हुआ। इसकी निर्माण लागत करीब 220 करोड़ रुपये बताई गई है।
भवन का सबसे प्रमुख आकर्षण इसका विशाल गुंबद है। इसकी ऊंचाई करीब 120 फीट और व्यास 118 फीट है। इसके बड़े आकार के कारण यह भवन करीब 5 किलोमीटर की दूरी से दिखाई देता है। टेकऑफ और लैंडिंग करने वाले विमानों से भी यह गुंबद नजर आता है।
हाईकोर्ट भवन के रखरखाव पर हर साल 2.20 करोड़ रुपये खर्च
नई इमारत तैयार होने के बाद इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी आरएसआरडीसी के पास रही। भवन के रखरखाव पर हर साल करीब 2.20 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।
इसके बावजूद भवन में जंग, दरार, कंक्रीट और वॉटरप्रूफिंग से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। अब IIT बॉम्बे की ऑडिट रिपोर्ट में गुंबद को असुरक्षित बताए जाने के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब और स्थायी समाधान की कार्ययोजना मांगी है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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