बालोतरा में किसान ने चोरी के डर से 5 लाख रुपए खेत में दबाए, एक साल बाद मिले तो नमी और दीमक से ज्यादातर नोट खराब थे।
बालोतरा में चोरी के डर से एक किसान ने करीब 5 लाख रुपए खेत में गड्ढा खोदकर छिपा दिए, लेकिन बाद में उसे जगह याद नहीं रही। करीब एक साल बाद बुवाई के दौरान वही बैग जमीन से मिला। तब तक नमी और दीमक से 500-500 रुपए के ज्यादातर नोट खराब हो चुके थे। किसान नोट बदलवाने के लिए बैंक पहुंचा, लेकिन तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
प्लॉट बेचकर मिले थे 5 लाख रुपए
राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा थाना क्षेत्र के नेवाई गांव में किसान मांगीलाल (50) के साथ यह मामला सामने आया है। किसान ने बताया कि करीब एक साल पहले उसने गांव में मकान बनाने के लिए अपना प्लॉट बेचा था। प्लॉट की बिक्री से उसे 5 लाख रुपए नकद मिले थे।
मांगीलाल को घर में इतनी बड़ी रकम रखने पर चोरी होने का डर था। इसी वजह से उसने नकदी को एक थैली में रखा और खेत में गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर दबा दिया। किसान को उम्मीद थी कि जरूरत पड़ने पर वह रकम निकाल लेगा।
पैसे निकालने पहुंचा तो जगह ही भूल गया
मांगीलाल के मुताबिक, करीब एक महीने बाद उसे पैसों की जरूरत पड़ी। वह नकदी निकालने के लिए खेत में उस जगह पहुंचा, जहां उसने रकम दबाई थी। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे वह स्थान याद नहीं रहा।
किसान ने काफी तलाश की, लेकिन उसे गड्ढा और पैसे नहीं मिले। काफी कोशिश के बाद भी नकदी का पता नहीं चलने पर उसने मान लिया कि शायद अब पैसे वापस नहीं मिल पाएंगे।
करीब एक साल बाद जमीन से निकला नोटों से भरा बैग
करीब एक साल बाद किसान ने अपने खेत में बुवाई करवाई। चार दिन पहले खेत में कल्टीवेटर चलाया गया था। इसके बाद शुक्रवार सुबह मांगीलाल अपनी पत्नी और बेटे के साथ खेत की तारबंदी ठीक करने पहुंचा।
इसी दौरान उन्हें जमीन में दबा हुआ एक बैग दिखाई दिया। बैग को बाहर निकालकर जब मांगीलाल के बेटे और पत्नी ने खोला तो उसमें वही नकदी मिली, जिसे किसान ने करीब एक साल पहले खेत में छिपाया था।
रकम वापस मिलने की खुशी के बीच परिवार को नोटों की हालत देखकर बड़ा झटका लगा। लंबे समय तक जमीन के अंदर दबे रहने के कारण 500-500 रुपए के ज्यादातर नोट नमी और दीमक की वजह से खराब हो चुके थे।
नमी और दीमक से कई नोट फटकर टुकड़ों में बदले
किसान के अनुसार, कई नोट पूरी तरह फट चुके हैं, जबकि कुछ नोट छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल गए हैं। कुछ नोटों पर अभी भी सीरियल नंबर दिखाई दे रहे हैं।
जमीन के अंदर रहने के दौरान नमी और दीमक ने नोटों को काफी नुकसान पहुंचाया। उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि किसान के लिए उन्हें सामान्य तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया।
नकदी मिलने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि खराब नोटों को बैंक में जमा कराकर रकम वापस हासिल की जा सकेगी। इसी उम्मीद के साथ मांगीलाल खराब नोट लेकर बैंक पहुंचा।
एसबीआई बैंक में नोट बदलने की कोशिश
मांगीलाल खराब हुए नोट लेकर पचपदरा स्थित एसबीआई बैंक पहुंचा। उसने बैंक कर्मचारियों से नोट बदलने की गुहार लगाई। हालांकि नोटों की खराब स्थिति को देखते हुए बैंक ने उन्हें बदलने से इनकार कर दिया।
इसके बाद किसान बालोतरा स्थित बैंक की मुख्य शाखा में भी पहुंचा। वहां भी उसे तत्काल राहत नहीं मिल सकी। बैंक कर्मचारियों ने बताया कि जिन नोटों के सीरियल नंबर स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, उन्हें बदलने की प्रक्रिया के लिए किसान को जयपुर जाना पड़ सकता है।
किसान के लिए जयपुर जाना बनी चुनौती
मांगीलाल ने बताया कि वह अनपढ़ है और आर्थिक रूप से भी परेशान है। ऐसे में नोट बदलवाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जयपुर जाना उसके लिए आसान नहीं है।
अब किसान की कोशिश है कि किसी तरह खराब हो चुकी नकदी को बदलवाकर अपनी रकम वापस हासिल की जा सके। करीब एक साल पहले चोरी के डर से खेत में छिपाई गई रकम जब दोबारा मिली, तब तक उसका बड़ा हिस्सा नमी और दीमक से खराब हो चुका था।
पत्नी ने बताई पैसे छिपाने से जुड़ी बात
मांगीलाल की पत्नी का कहना है कि अगर किसान ने पहले ही उसे बता दिया होता कि उसने पैसे खेत में किस जगह छिपाए हैं, तो शायद उस स्थान को याद रखने में मदद मिल सकती थी। ऐसी स्थिति में आज रकम को हुए नुकसान से बचाया जा सकता था।
फिलहाल खेत से करीब एक साल बाद निकले नोटों और उन्हें बदलवाने की किसान की कोशिश का मामला नेवाई गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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