फिरोजाबाद आरव हत्याकांड में दोषी जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा। 40 दिन में आया फैसला, जानिए पूरी घटना।
फिरोजाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला
फिरोजाबाद के चर्चित डेढ़ वर्षीय मासूम आरव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। घटना के महज 40 दिनों के भीतर अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया। पुलिस ने छह दिन में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश किए। इस फैसले को जिले में त्वरित न्याय का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
40 दिन में पूरी हुई सुनवाई, अदालत ने माना दोषी
यह मामला 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना से जुड़ा है। गुरुवार को अदालत ने जितेंद्र पाठक को दोषी करार दिया था और शुक्रवार को सजा पर सुनवाई के बाद उसे फांसी की सजा सुनाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई को प्राथमिकता दी गई। पुलिस ने समयबद्ध जांच पूरी करते हुए छह दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद अदालत में लगातार सुनवाई हुई।
अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने एक गवाह प्रस्तुत किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे और आरोपी को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया।
हत्या के पीछे क्या था पूरा मामला?
पुलिस जांच के अनुसार, आरव की मां रति देवी की शादी वर्ष 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। वैवाहिक विवाद के चलते वह पिछले कुछ महीनों से अपने मायके में रह रही थीं। इसी दौरान सुमित का रिश्तेदार विराज उर्फ जितेंद्र पाठक रति के संपर्क में आया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने रति को शादी का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
पुलिस के अनुसार, प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद आरोपी रति से नाराज रहने लगा। 30 मई को रति अपनी मां के साथ एक कानूनी सलाह के लिए शिकोहाबाद पहुंची थीं। इसी दौरान आरोपी ने डेढ़ वर्षीय आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले लिया।
27 सेकंड में आठ बार सड़क पर पटकने का आरोप
अभियोजन के अनुसार, आरोपी मासूम आरव को सुनसान स्थान पर ले गया और उसके साथ बेहद क्रूरता की। जांच में आरोप लगाया गया कि उसने करीब 27 सेकंड के भीतर बच्चे को आठ बार सड़क पर पटका, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी बच्चे के शव को घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया था।
इस वारदात ने पूरे फिरोजाबाद जिले को झकझोर दिया था। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और समयबद्ध जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत में प्रभावी साबित हुए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।