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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर, प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय; CJP प्रदर्शन के बीच बड़ा फैसला



धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रपति ने मंजूर किया। प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी विरोध प्रदर्शन और केंद्र के साथ बातचीत के बीच सामने आया है।

राष्ट्रपति ने स्वीकार किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर किया गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इसके कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति की ओर से उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई।

इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। वह अपने वर्तमान मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।

प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया है।

प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी है। वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के प्रेसिडेंट भी हैं।

अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद जोशी एक साथ अपने मौजूदा विभागों और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का विरोध प्रदर्शन जारी था। शनिवार को इस्तीफे की घोषणा करते हुए प्रधान ने अपने फैसले को छात्रों के भविष्य और देश में बनी मौजूदा स्थिति से जोड़ा।

प्रधान ने कहा कि उनके लिए यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और देश की युवा शक्ति राष्ट्र की वास्तविक ताकत है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि युवा भ्रम की स्थिति में फंसें।

अपने इस्तीफे में प्रधान ने जंतर-मंतर और देश में बनी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य ऐसी स्थिति का फायदा “देश-विरोधी ताकतों” को उठाने से रोकना, राष्ट्रीय एकता बनाए रखना और छात्रों के भविष्य को कानूनी जटिलताओं में फंसने से बचाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्र अपना समय पढ़ाई और करियर निर्माण पर केंद्रित कर सकें, इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है।

CJP ने इस्तीफे को बनाया था प्रमुख मांग

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का घटनाक्रम केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले सामने आया।

बातचीत से पहले CJP नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांगों में रखा था। संगठन की ओर से कहा गया था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनके लिए “नॉन-नेगोशिएबल” है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के दौरान भी प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। शनिवार को प्रधान की ओर से पद छोड़ने की घोषणा के बाद राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई।

नए शिक्षा मंत्री को लेकर सौरव दास का बयान

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास की प्रतिक्रिया भी सामने आई।

दास ने कहा कि युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा मंत्री कोई भी बने, उनके मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर वापस आएंगे और सरकार से जवाबदेही की मांग करेंगे।

इस तरह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स

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