राजस्थान के टोंक में पुलिस ने चालान के लिए बीमार बुजुर्ग की बाइक 1 घंटे रोकी। इलाज में देरी से मौत। परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप।
राजस्थान के टोंक जिले से एक बेहद दर्दनाक और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ ट्रैफिक पुलिस की कथित लापरवाही के चलते एक बीमार बुजुर्ग की जान चली गई। आरोप है कि गंभीर हालत में पिता को अस्पताल ले जा रहे बेटे को पुलिस ने चालान काटने के नाम पर करीब एक घंटे तक रोक कर रखा। परिजनों के लाख गिड़गिड़ाने और मिन्नतें करने के बावजूद पुलिस ने गाड़ी नहीं छोड़ी। इलाज में हुई इस देरी के कारण अस्पताल पहुंचने के कुछ ही देर बाद बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने खाकी की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीच रास्ते बिगड़ी तबीयत, अस्पताल ले जाते समय रोकी बाइक
पीपलू क्षेत्र के जवाली गांव निवासी महेंद्र यादव 14 जून को अपने 50 वर्षीय पिता शिवजी लाल के साथ किसी काम से जा रहे थे। पिता पहले से ही ब्लड प्रेशर (BP) के मरीज थे और अचानक रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति को गंभीर देखकर महेंद्र ने तुरंत एक परिचित को बुलाया और पिता को बीच में बैठाकर बाइक से जिला अस्पताल की ओर निकल पड़े। सुबह करीब 11:30 बजे छावनी तिराहे के पास पहुंचने पर ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें रोक लिया, क्योंकि बाइक पर तीन लोग सवार थे और चालक बिना हेलमेट के था।
बेटा गिड़गिड़ाता रहा, पेड़ के नीचे तड़पते रहे पिता
महेंद्र का आरोप है कि उसने ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी राजकुमार शर्मा को पिता की गंभीर हालत की जानकारी दी। उसने मिन्नतें कीं कि वे गाड़ी का नंबर नोट कर लें और बाद में चालान काट दें, ताकि वे तुरंत अस्पताल पहुंच सकें। शिकायत के अनुसार, पुलिसकर्मी ने उनकी एक न सुनी और बाइक की चाबी निकाल ली। करीब एक घंटे तक चालान की कागजी कार्रवाई चलती रही और बीमार पिता पुलिस लाइन के बाहर एक नीम के पेड़ के नीचे तड़पते रहे। 100 रुपये का चालान भरने के बाद ही उन्हें वहां से जाने दिया गया।
अस्पताल में मौत, पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
चालान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर करीब 12:45 बजे वे अस्पताल पहुंचे। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने शिवजी लाल को तुरंत आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया, लेकिन दुर्भाग्यवश दोपहर करीब 2 बजे उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि अस्पताल कर्मियों ने भी मरीज को देरी से लाने की बात कही थी।
दूसरी ओर, संबंधित पुलिसकर्मी राजकुमार शर्मा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई नियम के तहत हुई थी और उस समय किसी की हालत गंभीर नहीं लग रही थी। वहीं, टोंक के एसपी रोशन मीणा ने स्पष्ट किया है कि शिकायत मिलने पर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।


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