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PM Modi Europe Visit: फ्रांस से स्लोवाकिया तक पीएम मोदी का बड़ा दौरा, मैक्रों संग होगी अहम बैठक; AI और निवेश पर रहेगा फोकस


PM मोदी 13-18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर रहेंगे। मैक्रों संग बैठक, G-7 समिट और AI निवेश पर रहेगा फोकस।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े टेक और स्टार्टअप कार्यक्रम विवाटेक समिट में शामिल होंगे। दौरे का फोकस रणनीतिक साझेदारी, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स और यूरोप के साथ भारत के बढ़ते संबंधों पर रहेगा।

फ्रांस में मैक्रों के साथ होगी अहम बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे की शुरुआत फ्रांस से करेंगे। 14 जून को वह फ्रांस के नीस शहर में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, इंडो-पैसिफिक रणनीति और नई तकनीकी साझेदारियों पर चर्चा होने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं और इन्हें ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया है। ऐसे में यह बैठक दोनों देशों के लिए काफी अहम मानी जा रही है।

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से ‘इंडिया इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप, टेक कंपनियां और वेंचर कैपिटल फंड हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम से भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों तक पहुंच बनाने का बड़ा अवसर मिल सकता है।

स्लोवाकिया दौरे से यूरोप में बढ़ेगा भारत का दायरा

प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर भी रहेंगे। खास बात यह है कि 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी।

इस दौरान पीएम मोदी स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रेलवे मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा होगी।

भारत अब केवल फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे बड़े यूरोपीय देशों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ भी आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। स्लोवाकिया की ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग क्षमता को भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की नई यूरोपीय नीति का हिस्सा है, जिसमें निवेश, सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

G-7 समिट और AI एजेंडे पर दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। हालांकि भारत G-7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से भारत को लगातार इस सम्मेलन में आमंत्रित किया जा रहा है। इसे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।

G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के कई बड़े नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक आर्थिक विकास, नई टेक्नोलॉजी, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक साझेदारियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी भूमिका को तेजी से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में पीएम मोदी की इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारत वैश्विक AI नीति और डिजिटल इकोनॉमी में अपनी स्थिति और मजबूत करने का प्रयास करेगा।

विवाटेक समिट में दिखेगा भारत का टेक पावर

यूरोप दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस पहुंचेंगे, जहां वह यूरोप के सबसे बड़े टेक और स्टार्टअप इवेंट ‘विवाटेक समिट’ में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां, निवेशक और स्टार्टअप्स जुटते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी यहां भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल इंडिया अभियान को वैश्विक मंच पर पेश करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर मिल सकते हैं।

पीएम मोदी भारतीय समुदाय के एक विशेष कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI मिशन और स्टार्टअप ग्रोथ को लेकर भारत का विजन दुनिया के सामने रखेंगे।

भारत-यूरोप संबंधों को नई गति देने की कोशिश

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक दौरा नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत और यूरोप के बीच भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का अहम कदम माना जा रहा है। रक्षा और परमाणु सहयोग के अलावा अब दोनों पक्ष तकनीक, AI, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और निवेश के क्षेत्रों में भी तेजी से साथ काम करना चाहते हैं।

फ्रांस पहले से ही भारत का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है। वहीं स्लोवाकिया जैसे देशों के साथ बढ़ती नजदीकियां यह संकेत दे रही हैं कि भारत अब पूरे यूरोप में अपना प्रभाव और आर्थिक नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह दौरा आने वाले समय में भारत के लिए निवेश, टेक्नोलॉजी, रक्षा और वैश्विक रणनीति के मोर्चे पर कई नए रास्ते खोल सकता है।

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