ग्रेटर नोएडा GST विभाग की बैठक में डिप्टी कमिश्नर को आया हार्ट अटैक. एडिशनल कमिश्नर पर लगा प्रताड़ना का आरोप, जांच शुरू.
ग्रेटर नोएडा स्थित जीएसटी (GST) विभाग की एक समीक्षा बैठक के दौरान नोएडा जोन के डिप्टी कमिश्नर वेद प्रकाश सिंह को अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ गया. उन्हें तुरंत नजदीक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. बैठक में मौजूद सूत्रों का आरोप है कि एडिशनल कमिश्नर संदीप भागिया द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में देरी होने पर उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को कथित तौर पर कड़ी फटकार लगाई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई. दूसरी तरफ, एडिशनल कमिश्नर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैठक में कोई अभद्रता नहीं हुई और डिप्टी कमिश्नर की तबीयत पहले से ही खराब थी.
समीक्षा बैठक के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के विभागीय कार्यालय में कार्यों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक की अध्यक्षता एडिशनल कमिश्नर संदीप भागिया कर रहे थे और इसमें डिप्टी कमिश्नर वेद प्रकाश सिंह समेत कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे. चश्मदीदों के अनुसार, बैठक के दौरान एक रिपोर्ट को लेकर बहस शुरू हुई. इसी बीच वेद प्रकाश सिंह असहज महसूस करने लगे और कुछ ही देर में बेहोश होकर गिर पड़े. दफ्तर में अफरा-तफरी मचने के बाद साथी अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया.
एडिशनल कमिश्नर ने आरोपों पर दी सफाई
इस घटना के बाद विभाग के भीतर एडिशनल कमिश्नर के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे. हालांकि, एडिशनल कमिश्नर संदीप भागिया ने खुद पर लगे अभद्रता और गाली-गलौज के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है. उनका कहना है कि आधिकारिक बैठक में केवल काम की समीक्षा की जा रही थी और किसी भी अधिकारी के साथ कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया गया. उनके मुताबिक, डिप्टी कमिश्नर की तबीयत पहले से ही ठीक नहीं थी, जिसके कारण यह आपातकालीन स्थिति बनी.
विभाग में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद
नोएडा जोन के जीएसटी विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार और कार्यस्थल के दबाव को लेकर यह पहला विवाद नहीं है. इससे पहले भी कुछ कर्मचारियों द्वारा सीनियर अफसरों पर अत्यधिक मानसिक दबाव बनाने और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए जा चुके हैं, जिनकी विभागीय जांच भी हुई थी. फिलहाल इस ताजा मामले को लेकर भी दफ्तर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और पूरी सच्चाई विस्तृत जांच के बाद ही साफ हो पाएगी.
ग्रेटर नोएडा स्थित जीएसटी (GST) विभाग की एक समीक्षा बैठक के दौरान नोएडा जोन के डिप्टी कमिश्नर वेद प्रकाश सिंह को अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ गया. उन्हें तुरंत नजदीक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. बैठक में मौजूद सूत्रों का आरोप है कि एडिशनल कमिश्नर संदीप भागिया द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में देरी होने पर उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को कथित तौर पर कड़ी फटकार लगाई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई. दूसरी तरफ, एडिशनल कमिश्नर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैठक में कोई अभद्रता नहीं हुई और डिप्टी कमिश्नर की तबीयत पहले से ही खराब थी.
समीक्षा बैठक के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के विभागीय कार्यालय में कार्यों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक की अध्यक्षता एडिशनल कमिश्नर संदीप भागिया कर रहे थे और इसमें डिप्टी कमिश्नर वेद प्रकाश सिंह समेत कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे. चश्मदीदों के अनुसार, बैठक के दौरान एक रिपोर्ट को लेकर बहस शुरू हुई. इसी बीच वेद प्रकाश सिंह असहज महसूस करने लगे और कुछ ही देर में बेहोश होकर गिर पड़े. दफ्तर में अफरा-तफरी मचने के बाद साथी अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया.
एडिशनल कमिश्नर ने आरोपों पर दी सफाई
इस घटना के बाद विभाग के भीतर एडिशनल कमिश्नर के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे. हालांकि, एडिशनल कमिश्नर संदीप भागिया ने खुद पर लगे अभद्रता और गाली-गलौज के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है. उनका कहना है कि आधिकारिक बैठक में केवल काम की समीक्षा की जा रही थी और किसी भी अधिकारी के साथ कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया गया. उनके मुताबिक, डिप्टी कमिश्नर की तबीयत पहले से ही ठीक नहीं थी, जिसके कारण यह आपातकालीन स्थिति बनी.
विभाग में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद
नोएडा जोन के जीएसटी विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार और कार्यस्थल के दबाव को लेकर यह पहला विवाद नहीं है. इससे पहले भी कुछ कर्मचारियों द्वारा सीनियर अफसरों पर अत्यधिक मानसिक दबाव बनाने और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए जा चुके हैं, जिनकी विभागीय जांच भी हुई थी. फिलहाल इस ताजा मामले को लेकर भी दफ्तर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और पूरी सच्चाई विस्तृत जांच के बाद ही साफ हो पाएगी.


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