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हमीरपुर में मौत का पुल! तेज आंधी में ढहा निर्माणाधीन स्लैब, 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद कंपनी मालिक और ठेकेदार पर FIR


हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने से 6 मजदूरों की मौत, कंपनी मालिक और ठेकेदार पर FIR दर्ज।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का स्लैब तेज आंधी के दौरान अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे वहां सो रहे छह मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया, जिसके बाद निर्माण कार्य कर रही कंपनी के मालिक विजय प्रताप सिंह और ठेकेदार नितीश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। राज्य सेतु निगम के अधिकारियों पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है और सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी को निलंबित कर दिया गया है।

रात के अंधेरे में मौत बनकर टूटा पुल का स्लैब

यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे हमीरपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर लालपुरा थाना क्षेत्र के परसानी और कंदौर गांवों के बीच हुआ। बेतवा नदी पर पुल निर्माण का काम कई महीनों से चल रहा था। दिन में भीषण गर्मी के कारण मजदूर रात में काम कर रहे थे और कुछ श्रमिक स्लैब के ऊपरी हिस्से पर ही सो गए थे।

इसी दौरान अचानक मौसम ने करवट बदली और तेज आंधी-तूफान शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज हवाओं के बीच अचानक पुल का भारी स्लैब चरमराने लगा और कुछ ही सेकंड में पूरा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर पड़ा। मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने चीख-पुकार सुनकर राहत कार्य शुरू किया और पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई। कुछ ही देर में पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया।

छह मजदूरों की मौत से गांवों में मातम

इस हादसे में जिन मजदूरों की मौत हुई उनकी पहचान लोकेंद्र (22), कुलदीप निषाद (19), सावंत यादव (28), सभाजीत (30), पुष्पेंद्र चौहान (34) और राजेश पाल (42) के रूप में हुई है। सभी मजदूर अलग-अलग गांवों से मजदूरी करने आए थे और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

वहीं हादसे में अवधेश निषाद, कल्लू यादव और राजेश निषाद गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को मलबे से निकालकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है।

घटना की खबर मिलते ही मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया। कई परिवारों के घरों में कमाने वाला इकलौता सदस्य चला गया। गांवों में मातमी सन्नाटा फैल गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

मुख्यमंत्री योगी की सख्ती के बाद बड़ी कार्रवाई

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि हमीरपुर में बेतवा नदी पर हुई दुर्घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की। इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा।

मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद राज्य सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार की तहरीर पर कुरारा थाने में द शेल्टर कंपनी के मालिक विजय प्रताप सिंह और ठेकेदार नितीश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। एफआईआर में निर्माण कार्य में लापरवाही और मजदूरों की सुरक्षा में गंभीर चूक के आरोप लगाए गए हैं।

विभागीय कार्रवाई में सहायक अभियंता निलंबित

हादसे के बाद उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड ने भी तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि मौसम विभाग पहले ही तेज आंधी और तूफान की चेतावनी जारी कर चुका था, इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया।

राज्य सेतु निगम के अधिकारियों ने माना कि चेतावनी के बावजूद निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। इसी मामले में सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

उप परियोजना प्रबंधक दिलीप Kumar ने कहा कि दिन में अत्यधिक गर्मी होने के कारण रात में काम कराया जा रहा था, लेकिन मौसम खराब होने की चेतावनी के बाद काम रोक देना चाहिए था। उन्होंने साफ तौर पर निर्माण कंपनी की लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह बताया।

मौसम विभाग ने पहले ही जारी किया था अलर्ट

जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने बताया कि मौसम विभाग ने गुरुवार शाम को ही जिले में 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी कर दी थी। जिला प्रशासन ने गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को सतर्क भी किया था।

प्रशासन का दावा है कि निर्माण स्थल पर भी चेतावनी पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया और मजदूरों को वहीं रुकने दिया गया। अब यही सवाल सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है कि आखिर चेतावनी के बावजूद मजदूरों की जान जोखिम में क्यों डाली गई।

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी

घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी अभिषेक गोयल और पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण किया और एसडीआरएफ टीम को तेजी से मलबा हटाने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने पूरे निर्माण स्थल की जांच भी की। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों में कई गंभीर खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। प्रशासन अब पूरे निर्माण कार्य के तकनीकी पहलुओं की भी जांच करवा रहा है।

दो साल से चल रहा था पुल निर्माण

बताया जा रहा है कि बेतवा नदी पर यह पुल परियोजना करीब दो साल पहले शुरू हुई थी। इस पुल के बन जाने से आसपास के कई गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होने वाली थी। परियोजना का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा कराया जा रहा था और राज्य सेतु निगम इसकी निगरानी कर रहा था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में पहले से ही लापरवाही बरती जा रही थी। कई बार मजदूरों ने भी सुरक्षा उपकरणों की कमी की शिकायत की थी, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

विधायक ने उठाए गंभीर सवाल

हमीरपुर सदर के विधायक ने भी हादसे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि मानवीय लापरवाही का मामला भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विधायक ने कहा कि मजदूरों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए।

मजदूरों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

हमीरपुर पुल हादसे ने एक बार फिर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखा जाता है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन इंतजामों की अनदेखी की जाती है।

इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जा सके।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और निर्माण कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं मृतकों के परिवार न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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