एमपी बोर्ड रिजल्ट में फेल होने के बाद छिंदवाड़ा की 17 वर्षीय छात्रा ने आत्महत्या कर ली, घटना से परिवार में मातम छाया
रिजल्ट आया और टूट गई जिंदगी
मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित होते ही जहां हजारों छात्रों के चेहरों पर खुशी नजर आई, वहीं छिंदवाड़ा से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई। यहां एक 17 वर्षीय छात्रा ने परीक्षा में असफल होने के बाद ऐसा कदम उठा लिया, जिसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
घटना छिंदवाड़ा जिले के परासिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहन नगर इलाके की है। छात्रा कुछ समय से अपने नाना-नानी के घर रह रही थी और वहीं से अपनी पढ़ाई कर रही थी। जैसे ही बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित हुए, उसने अपना रिजल्ट चेक किया और उसमें असफल होने की जानकारी सामने आई।
रिजल्ट देखने के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई और कुछ ही समय में उसने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
नानी के घर रहकर कर रही थी पढ़ाई
परिजनों के मुताबिक छात्रा छुट्टियों के दौरान अपने नाना-नानी के घर आई हुई थी और वहीं से परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह अच्छे अंकों से पास होगी, लेकिन रिजल्ट ने सब कुछ बदल दिया।
छात्रा के मामा ने बताया कि जैसे ही रिजल्ट घोषित हुआ, उसने मोबाइल पर अपना परिणाम देखा और उसमें फेल होने की बात सामने आई। इसके बाद वह काफी चुप हो गई और किसी से ज्यादा बात नहीं की। परिवार के लोगों को यह अंदाजा भी नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा सकती है।
कुछ ही देर बाद जब घरवालों ने उसे देखा तो वह फंदे पर झूलती मिली। यह दृश्य देखकर पूरे घर में चीख-पुकार मच गई।
मौके पर पहुंची पुलिस, जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का ही सामने आया है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्रा किसी अन्य मानसिक दबाव में तो नहीं थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
शिक्षा विभाग की अपील, असफलता अंत नहीं
इस दर्दनाक घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल ने छात्रों और अभिभावकों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में असफल होना जीवन का अंत नहीं है और छात्रों को किसी भी हालत में ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि बोर्ड की ओर से छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का अवसर भी दिया जाता है। जो छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं या फेल हो गए हैं, वे पुनः परीक्षा देकर अपने भविष्य को संवार सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने यह भी कहा कि अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उनके मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
परिवार में पसरा मातम, इलाके में शोक
छात्रा की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। नाना-नानी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे मोहल्ले में भी शोक का माहौल है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रा बेहद शांत और पढ़ाई में ठीक थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी छोटी बात को लेकर अपनी जान दे देगी।


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