गुरुग्राम में डायबिटीज और वेट लॉस के नाम पर हजारों अवैध डोज बरामद, सप्लाई नेटवर्क बेनकाब



गुरुग्राम में अवैध डायबिटीज और वेट लॉस इंजेक्शन की बड़ी खेप जब्त, ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच में सप्लाई नेटवर्क उजागर

गुरुग्राम में ड्रग कंट्रोल विभाग की बड़ी कार्रवाई

दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में अवैध दवाओं के कारोबार पर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसने हेल्थ सेक्टर और मेडिकल सप्लाई सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुग्राम के पॉश इलाके डीएलएफ फेज-4 में ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने छापेमारी कर डायबिटीज और वजन घटाने के नाम पर बेचे जा रहे हजारों इंजेक्शन बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और मेडिकल कारोबार से जुड़े कई लोग भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

ड्रग कंट्रोल विभाग को लंबे समय से इस अवैध सप्लाई नेटवर्क की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद टीम ने गुप्त रणनीति बनाकर कार्रवाई को अंजाम दिया। इस पूरे ऑपरेशन को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा जा सके और पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

खुफिया इनपुट के बाद बिछाया गया जाल

अधिकारियों के अनुसार, विभाग को खुफिया सूचना मिली थी कि एक निजी कंपनी से जुड़ा कर्मचारी अवैध रूप से महंगे इंजेक्शन बाजार में सप्लाई कर रहा है। यह इंजेक्शन खासतौर पर डायबिटीज कंट्रोल और तेजी से वजन घटाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है।

सूचना मिलते ही ड्रग कंट्रोल टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जैसे ही संदिग्ध वाहन को रोका गया और उसकी तलाशी ली गई, टीम को बड़ी मात्रा में इंजेक्शन मिले। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि यह सप्लाई पूरी तरह से नियमों के खिलाफ की जा रही थी और इसके पीछे एक बड़ा अवैध नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ जारी

इस मामले में टीम ने मुजम्मिल नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जो कथित रूप से इस अवैध सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।

अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है, जो लंबे समय से बिना लाइसेंस के दवाओं का कारोबार कर रहा है।

लाखों रुपये की खेप, कीमत सुनकर चौंक जाएंगे

जब्त किए गए इंजेक्शनों की कीमत भी चौंकाने वाली है। विभाग के मुताबिक, एक-एक इंजेक्शन की कीमत 13 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक बताई जा रही है। इस हिसाब से जब्त की गई कुल खेप की कीमत लाखों में आंकी जा रही है।

इतनी महंगी दवाओं का अवैध रूप से बाजार में बिकना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों की सेहत के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। यदि ये इंजेक्शन नकली या घटिया गुणवत्ता के पाए जाते हैं, तो इससे मरीजों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

भागीरथ पैलेस से जुड़ा कनेक्शन

जांच के दौरान एक और अहम खुलासा सामने आया है। शुरुआती जानकारी में पता चला है कि यह इंजेक्शन दिल्ली के मशहूर इलेक्ट्रॉनिक और मेडिकल मार्केट भागीरथ पैलेस से खरीदे गए थे। यह बाजार एशिया के सबसे बड़े ट्रेड हब में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में मेडिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई होती है।

अब जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि क्या वहां से भी अवैध तरीके से दवाओं की सप्लाई हो रही थी या फिर किसी ने फर्जी चैनल का इस्तेमाल किया।

इंजेक्शनों की गुणवत्ता और असलियत की जांच

ड्रग कंट्रोल विभाग ने जब्त किए गए सभी इंजेक्शनों को जांच के लिए भेज दिया है। इनकी पैकिंग, लेबलिंग, बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह इंजेक्शन असली हैं या नकली, और यदि असली हैं तो क्या इन्हें सही तरीके से अधिकृत चैनल के माध्यम से बेचा जा रहा था या नहीं।

यदि जांच में यह सामने आता है कि इंजेक्शन नकली हैं, तो यह मामला और गंभीर हो जाएगा और इसमें कई अन्य लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

बिना अनुमति बाजार में हो रही थी बिक्री

जांच में यह भी सामने आया है कि इन इंजेक्शनों को बिना किसी वैध अनुमति के खुले बाजार में बेचा जा रहा था। यह सीधे तौर पर ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों का उल्लंघन है।

ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, बल्कि आरोपी को जेल की सजा भी हो सकती है। विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटा हुआ है, ताकि भविष्य में इस तरह के अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का बड़ा मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज और वेट लॉस जैसे संवेदनशील इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का अवैध कारोबार बेहद खतरनाक हो सकता है। मरीज अक्सर डॉक्टर की सलाह पर इन दवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन यदि उन्हें नकली या गलत दवा मिल जाए, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं।

गुरुग्राम में हुई यह कार्रवाई केवल एक केस नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि मेडिकल सेक्टर में अवैध गतिविधियां किस तरह लोगों की जान जोखिम में डाल सकती हैं।

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