दिल्ली EV पॉलिसी 2.0: अब एग्रीगेटर पर कड़ा वार, पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर लगेगा ब्रेक, 2027 तक ऑटो भी होंगे पूरी तरह इलेक्ट्रिक



दिल्ली EV पॉलिसी 2.0 में एग्रीगेटर पर सख्ती, पेट्रोल-डीजल वाहनों पर रोक और इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा देने का बड़ा प्लान


दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम

राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सरकार ने नई EV पॉलिसी 2.0 का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है, जिसे फिलहाल आम जनता और विशेषज्ञों की राय, सुझाव और आपत्तियों के लिए ओपन किया गया है। इस नई नीति के जरिए सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की संख्या को तेजी से कम किया जाए और इलेक्ट्रिक व्हीकल को मुख्यधारा में लाया जाए।

नई EV पॉलिसी 2026-2030 का यह ड्राफ्ट खासतौर पर उन वाहनों को टारगेट करता है जिनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है, जैसे टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और हल्के मालवाहक वाहन। इन कैटेगरी में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक माना जाता है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर इलेक्ट्रिक में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है।

एग्रीगेटर और डिलीवरी कंपनियों पर सख्त नियम

नई पॉलिसी का सबसे बड़ा असर ऐप बेस्ड कैब सर्विस, फूड डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर पड़ने वाला है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब इन एग्रीगेटर कंपनियों को अपने बेड़े में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले नए वाहन शामिल करने की अनुमति नहीं होगी। यह नियम इस साल 1 जनवरी से लागू माना जाएगा, जिससे कंपनियों को धीरे-धीरे अपनी पूरी फ्लीट इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलनी होगी।

हालांकि, सरकार ने एक ट्रांजिशन पीरियड भी दिया है। BS-VI मानक वाले दोपहिया वाहनों को 31 दिसंबर 2026 तक फ्लीट में शामिल करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके बाद पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में दिल्ली में चलने वाली अधिकतर डिलीवरी और कैब सेवाएं पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो जाएंगी।

2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा को ही मिलेगी अनुमति

नई नीति में ऑटो-रिक्शा सेक्टर को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार, 2027 से दिल्ली में नए ऑटो-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ही किया जाएगा। इसका उद्देश्य CNG और अन्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को खत्म करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देना है।

सरकार का मानना है कि ऑटो-रिक्शा शहर के परिवहन का एक अहम हिस्सा हैं और इन्हें इलेक्ट्रिक में बदलने से प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकती है। इसके लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना भी तैयार की है।

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए सब्सिडी का आकर्षक प्लान

नई EV पॉलिसी में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। सरकार ने एक चरणबद्ध सब्सिडी योजना पेश की है, जिसके तहत पहले साल में 50,000 रुपये, दूसरे साल में 40,000 रुपये और तीसरे साल में 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

यह सब्सिडी उन लोगों को भी मिलेगी जो अपने पुराने CNG ऑटो-रिक्शा को बदलकर इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना चाहते हैं। इसके साथ ही दिल्ली में नए पंजीकृत इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा पर भी यह लाभ लागू होगा। इस योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित करना है।

स्क्रैप पॉलिसी से जुड़ा विशेष प्रावधान

नई EV पॉलिसी में वाहन स्क्रैपिंग को भी शामिल किया गया है। अगर कोई व्यक्ति अपने पुराने वाहन को अधिकृत स्क्रैप सेंटर में जमा कर देता है और उसे स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट मिल जाता है, तो वह 6 महीने के भीतर नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर सब्सिडी का लाभ उठा सकता है।

यह प्रावधान खासतौर पर उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर नए इलेक्ट्रिक विकल्प अपनाना चाहते हैं। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि सड़क पर पुराने वाहनों की संख्या भी घटेगी।

ज्यादा इस्तेमाल वाले वाहनों पर फोकस

नई EV पॉलिसी का फोकस उन वाहनों पर है जिनका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। इसमें टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और हल्के मालवाहक वाहन शामिल हैं। ये वाहन रोजाना बड़ी संख्या में सड़कों पर चलते हैं और कुल प्रदूषण में इनका बड़ा योगदान होता है।

सरकार का मानना है कि अगर इन वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर इलेक्ट्रिक में बदला जाए, तो दिल्ली के प्रदूषण स्तर में तेजी से गिरावट लाई जा सकती है। यही वजह है कि इस पॉलिसी में एग्रीगेटर फ्लीट और ऑटो-रिक्शा पर विशेष ध्यान दिया गया है।

2023 की एग्रीगेटर योजना के प्रावधान रहेंगे लागू

नई EV पॉलिसी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाता योजना (2023) के मौजूदा प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। यानी कंपनियों को पहले से तय नियमों का पालन करना होगा, लेकिन अब उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से शिफ्ट होना पड़ेगा।

इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नई नीति लागू होने के बावजूद मौजूदा व्यवस्था में कोई अचानक बदलाव न हो और कंपनियों को एडजस्ट करने का पर्याप्त समय मिल सके।

प्रदूषण कम करने की दिशा में निर्णायक रणनीति

दिल्ली सरकार की यह नई EV पॉलिसी एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण को नियंत्रित करना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर सरकार न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करना चाहती है बल्कि लोगों को सस्ती और टिकाऊ परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराना चाहती है।

आने वाले वर्षों में इस नीति के लागू होने से दिल्ली की सड़कों पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां पारंपरिक ईंधन की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा होगा और प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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