जमालपुर नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के दशम वार्षिकोत्सव में हवन, रुद्राभिषेक, रामचरितमानस पाठ और विशाल भंडारे से भक्तिमय माहौल बना
इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट
जमालपुर में दस वर्षों की आस्था का उत्सव, मंदिर परिसर में दिखा भव्य नजारा
मछलीशहर तहसील क्षेत्र के जमालपुर गांव में स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में दशम वार्षिकोत्सव का शुभारंभ पूरे वैदिक विधि-विधान और धार्मिक उत्साह के साथ किया गया। यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि बीते दस वर्षों से गांव और आसपास के क्षेत्र में पनपती सामूहिक आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया। जैसे ही वार्षिकोत्सव की शुरुआत हुई, मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि नर्मदेश्वर महादेव मंदिर अब केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक चेतना का केंद्र बन चुका है।
विधि-विधान से हुआ हवन और रुद्राभिषेक, वातावरण बना पूरी तरह भक्तिमय
वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को मंदिर परिसर में हवन और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच जब अग्नि प्रज्वलित की गई, तो वातावरण में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, भस्म और पंचामृत से रुद्राभिषेक कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। इस दौरान मंदिर में मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आस्था की चमक और चेहरे पर संतोष की अनुभूति साफ नजर आई। हवन कुंड से उठती अग्नि की लपटों और मंत्रों की ध्वनि ने पूरे क्षेत्र को मानो शिवमय बना दिया।
रामचरितमानस पाठ से गूंजा मंदिर, श्रद्धालु हुए भावविभोर
सनातन परंपराओं के अनुरूप पंडित विमलेश महाराज के सान्निध्य में रामचरितमानस पाठ का शुभारंभ कराया गया। जैसे-जैसे चौपाइयों का पाठ आगे बढ़ा, मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होते चले गए। रामचरितमानस का पाठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों, मर्यादाओं और आदर्शों की जीवंत शिक्षा का माध्यम बना। पाठ के दौरान कई श्रद्धालु ध्यानमग्न होकर प्रभु राम और भगवान शिव की महिमा का स्मरण करते दिखाई दिए। गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी एक साथ बैठकर पाठ का श्रवण कर रहे थे, जिससे सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता की अनूठी तस्वीर देखने को मिली।
मुख्य यजमान उमाशंकर श्रीवास्तव ने साझा की आयोजन की भावना
कार्यक्रम के मुख्य यजमान उमाशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि नर्मदेश्वर महादेव मंदिर का यह दशम वार्षिकोत्सव विगत वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल ईश्वर की आराधना का स्थल नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का माध्यम भी है। उनके अनुसार, हर वर्ष इस आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि लोगों की आस्था और विश्वास निरंतर मजबूत हो रहा है। उन्होंने आयोजन समिति और ग्रामवासियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ही इतना भव्य आयोजन संभव हो पाया है।
आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालु, मेले जैसा दिखा माहौल
दशम वार्षिकोत्सव के अवसर पर जमालपुर के साथ-साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र किसी धार्मिक मेले जैसा नजर आया। श्रद्धालुओं के आने-जाने से गांव की रौनक बढ़ गई और हर ओर धार्मिक चर्चा, भजन-कीर्तन और शिव भक्ति की बातें सुनाई देने लगीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इस आयोजन को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कई श्रद्धालु परिवार सहित पहुंचे और पूरे दिन मंदिर परिसर में समय बिताते नजर आए।
ग्रामवासियों की सहभागिता ने आयोजन को बनाया और भी भव्य
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के वार्षिकोत्सव में ग्रामवासियों की सक्रिय सहभागिता आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही। किसी ने साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाली, तो किसी ने श्रद्धालुओं के लिए जल और प्रसाद की व्यवस्था की। महिलाओं ने भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया और युवाओं ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग किया। यह सामूहिक प्रयास इस बात का उदाहरण है कि जब पूरा गांव एक साथ किसी धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य के लिए आगे आता है, तो आयोजन स्वतः ही भव्य रूप ले लेता है।
बुधवार को विशाल भंडारे का आयोजन, श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी
वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन बुधवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसकी तैयारियां पूरे जोर-शोर से की गईं। आयोजन समिति ने बताया कि भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध और सात्विक प्रसाद की व्यवस्था की गई है। भंडारा केवल भोजन का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की भावना का प्रतीक माना जाता है। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर आयोजन को सफल बनाएं। गांव में भंडारे को लेकर खास उत्साह है और लोग सुबह से ही सेवा कार्यों में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
दस वर्षों में मंदिर बना आस्था का प्रमुख केंद्र
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर ने अपने दस वर्षों के सफर में क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में पूजन-अर्चन करने वाला यह मंदिर आज बड़े धार्मिक आयोजनों का केंद्र बन चुका है। वार्षिकोत्सव के माध्यम से न केवल धार्मिक परंपराएं जीवित रहती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य होता है। मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे, ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सद्भावना बनी रहे।
सनातन परंपराओं का जीवंत उदाहरण बना वार्षिकोत्सव
दशम वार्षिकोत्सव के आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि सनातन परंपराएं आज भी लोगों के जीवन में उतनी ही प्रासंगिक हैं। हवन, रुद्राभिषेक, रामचरितमानस पाठ और भंडारे जैसे आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान हैं, बल्कि सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। इस आयोजन के जरिए गांव और आसपास के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश गया कि आस्था, सेवा और सहयोग से समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
भक्तिमय माहौल के साथ सफल आयोजन की ओर अग्रसर
जमालपुर स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर का दशम वार्षिकोत्सव पूरे भक्तिमय माहौल में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं की निरंतर उपस्थिति, मंत्रोच्चारण की गूंज और सेवा भाव से भरा वातावरण इस आयोजन को विशेष बना रहा है। आयोजकों को विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह वार्षिकोत्सव और भी व्यापक रूप लेगा और क्षेत्र की धार्मिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। नर्मदेश्वर महादेव के चरणों में शीश नवाकर लौटते श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष और शांति की झलक इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आई है।




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