तहसील में डीएम का औचक निरीक्षण, कोर्ट से लेकर रिकॉर्ड रूम तक हड़कंप, तीन साल पुराने मुकदमों के त्वरित निस्तारण के सख्त निर्देश



मछलीशहर तहसील में डीएम डॉ. दिनेश चंद्र का औचक निरीक्षण, लंबित मुकदमों, गंदगी और अव्यवस्थाओं पर सख्त निर्देश।

इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट 


तहसील परिसर में अचानक पहुंचे जिलाधिकारी, मचा प्रशासनिक हलचल का माहौल

मछलीशहर। जनपद की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने मछलीशहर तहसील का औचक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी के अचानक तहसील परिसर पहुंचते ही अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तहसील के सभी न्यायालयों, कार्यालयों, रिकॉर्ड रूम और राजस्व अभिलेखागार की बारीकी से जांच की और कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट शब्दों में अपनी अपेक्षाएं जाहिर कीं। जिलाधिकारी ने कहा कि तहसील न्याय व्यवस्था और आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ संस्थान है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट न्यायालय से शुरू हुआ निरीक्षण, लंबित मुकदमों पर फोकस

निरीक्षण की शुरुआत जिलाधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट न्यायालय से की। यहां उन्होंने मुकदमों की स्थिति, निस्तारण की गति और लंबित प्रकरणों की संख्या की विस्तृत समीक्षा की। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से तीन वर्ष से अधिक पुराने मुकदमों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी आम जनता के विश्वास को कमजोर करती है, इसलिए पुराने मामलों का बोझ कम करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों, मांग पत्रों और राजस्व वादों के शीघ्र निस्तारण पर भी उन्होंने जोर दिया।

ग्राम सभा से जुड़े मामलों पर विशेष सख्ती, वरीयता से निस्तारण का आदेश

जिलाधिकारी ने सभी न्यायालयों में लंबित ग्राम सभा से संबंधित मुकदमों को वरीयता के साथ निस्तारित करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की भूमि और उससे जुड़े विवाद सीधे ग्रामीण विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी से न केवल सरकारी कार्य रुकते हैं, बल्कि जनता में असंतोष भी बढ़ता है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्राम सभा से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

रिकॉर्ड रूम और राजस्व अभिलेखागार का निरीक्षण, दस्तावेजों की स्थिति पर नाराजगी

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने रिकॉर्ड रूम और राजस्व अभिलेखागार का भी जायजा लिया। यहां रखे गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्थिति देखकर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड किसी भी तहसील की रीढ़ होते हैं और इनकी सुरक्षा व सुव्यवस्थित रख-रखाव अत्यंत आवश्यक है। दस्तावेजों के रखरखाव में लापरवाही भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है, इसलिए अभिलेखों के संरक्षण में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

आरके ऑफिस और अन्य कार्यालयों की जांच, कार्यशैली सुधारने के निर्देश

जिलाधिकारी ने आरके ऑफिस सहित तहसील के अन्य कार्यालयों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति, फाइलों की स्थिति और आम जनता के कार्यों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि तहसील में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर आता है, ऐसे में कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगात्मक और जिम्मेदार होना चाहिए। उन्होंने लंबित फाइलों को अनावश्यक रूप से रोके जाने पर नाराजगी जताई और कार्यशैली में पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए।

तहसील परिसर की गंदगी पर जिलाधिकारी नाराज, जताया असंतोष

निरीक्षण के दौरान तहसील परिसर में साफ-सफाई की स्थिति को लेकर जिलाधिकारी ने गहरा असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि तहसील जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यालय में गंदगी और अव्यवस्था प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाती है। आम नागरिकों को यहां घंटों इंतजार करना पड़ता है, ऐसे में स्वच्छ वातावरण उनकी मूलभूत आवश्यकता है। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि सफाई व्यवस्था में सुधार तत्काल प्रभाव से किया जाए।

नगर पंचायत को सख्त निर्देश, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था तुरंत सुधारने का आदेश

जिलाधिकारी ने नगर पंचायत अधिकारी विजय कुमार सिंह को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि तहसील परिसर में महिला और पुरुष वादकारियों के लिए सुलभ शौचालय और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में आने वाले लोगों में बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग भी शामिल होते हैं, ऐसे में बुनियादी सुविधाओं की कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने तहसील परिसर के ऊबड़-खाबड़ रास्तों की मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए, ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।

आम जनता की सुविधाओं को प्राथमिकता देने का निर्देश

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि तहसील प्रशासन का उद्देश्य केवल फाइलों का निस्तारण नहीं, बल्कि आम जनता को समय पर न्याय और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वादकारियों और फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें अनावश्यक रूप से भटकने न दिया जाए। तहसील में आने वाले हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि प्रशासन उसकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने पर जोर

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और उनकी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में मामलों का ढेर लगना प्रशासनिक विफलता का संकेत होता है। ऐसे में प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर लंबित मामलों को कम करने के लिए गंभीर प्रयास करे।

प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर दिया गया संदेश

जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने अपने निरीक्षण के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा तभी कायम रह सकता है जब प्रशासन समय पर और निष्पक्ष तरीके से कार्य करे। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

तहसील प्रशासन में सुधार की उम्मीद, आम लोगों में जागी अपेक्षा

जिलाधिकारी के इस औचक निरीक्षण के बाद तहसील प्रशासन में सुधार की उम्मीद जगी है। आम लोगों को उम्मीद है कि पुराने मुकदमों के निस्तारण में तेजी आएगी और तहसील परिसर की सुविधाओं में भी सुधार होगा। प्रशासनिक सख्ती से जहां कर्मचारियों में अनुशासन बढ़ेगा, वहीं जनता को भी राहत मिलने की संभावना है।

मछलीशहर तहसील में जिलाधिकारी का यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालयों में लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण, रिकॉर्ड की बेहतर व्यवस्था और आम जनता के लिए सुविधाओं का विस्तार इस निरीक्षण के प्रमुख बिंदु रहे। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों पर अमल कितनी तेजी और गंभीरता से किया जाता है, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता के विश्वास और प्रशासन की छवि पर पड़ने वाला है।

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