बरेली जिला अस्पताल में महिला से अभद्रता पर वार्ड बॉय की भीड़ ने पिटाई कर दी। इमरजेंसी वार्ड का वीडियो वायरल, सुरक्षा पर सवाल।
बरेली जिला अस्पताल में दोपहर को क्यों मच गया हड़कंप
उत्तर प्रदेश के बरेली जिला अस्पताल में शुक्रवार दोपहर वह नजारा देखने को मिला जिसने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, महिला सुरक्षा और कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए। आमतौर पर मरीजों की चीख-पुकार, तीमारदारों की भागदौड़ और डॉक्टरों की आपाधापी से भरे रहने वाले इमरजेंसी वार्ड के बाहर अचानक ऐसा बवाल खड़ा हुआ कि कुछ देर के लिए पूरा अस्पताल परिसर अखाड़े में तब्दील हो गया। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही मारपीट, गाली-गलौज और चीख-पुकार का माहौल बन चुका था।
महिला की मौजूदगी से शुरू हुआ विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना उस समय की है जब एक महिला जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर बैठकर अपने किसी परिचित मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी ले रही थी। महिला फोन पर बात कर रही थी और इमरजेंसी वार्ड के बाहर लगी कुर्सियों के पास बैठी हुई थी। इसी दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात एक वार्ड बॉय की नजर महिला पर पड़ी। आरोप है कि उसने पीछे से महिला पर अभद्र टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। शुरुआत में महिला ने इस हरकत को नजरअंदाज किया और खुद को स्थिति से अलग रखने की कोशिश की, लेकिन वार्ड बॉय की हरकतें यहीं नहीं रुकीं।
जब चुप्पी टूटी और विरोध हुआ
महिला के अनुसार जब अभद्र टिप्पणियां लगातार बढ़ने लगीं और शब्दों की मर्यादा पूरी तरह टूट गई, तब उसने विरोध दर्ज कराया। महिला ने वार्ड बॉय से साफ शब्दों में कहा कि वह इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करे। लेकिन महिला का विरोध करना वार्ड बॉय को और उकसा गया। आरोप है कि इसके बाद उसने खुलेआम गाली-गलौज शुरू कर दी और सरेआम महिला को अपमानित करने लगा। अस्पताल जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थान पर इस तरह का व्यवहार देखकर महिला खुद को असहज और अपमानित महसूस करने लगी।
शोर मचा तो जुटने लगी भीड़
अपमान और गुस्से के बीच महिला ने जोर से शोर मचाया। महिला की आवाज सुनते ही इमरजेंसी वार्ड के बाहर मौजूद अन्य तीमारदार, मरीजों के परिजन और कुछ राहगीर मौके पर इकट्ठा होने लगे। कुछ ही पलों में वहां लोगों की भीड़ लग गई। महिला ने जब पूरी बात लोगों को बताई तो माहौल अचानक बदल गया। इलाज की चिंता में खड़े लोग अब इंसाफ की मांग करने लगे। लोगों का कहना था कि अगर अस्पताल में तैनात कर्मचारी ही महिलाओं से इस तरह का व्यवहार करेंगे तो आम मरीज और उनके परिजन खुद को कहां सुरक्षित महसूस करेंगे।
गुस्साई भीड़ ने लिया कानून हाथ में
जैसे ही वार्ड बॉय की हरकतों की जानकारी भीड़ को हुई, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि बिना ज्यादा देर किए लोगों ने वार्ड बॉय को घेर लिया। देखते ही देखते इमरजेंसी के बाहर मारपीट शुरू हो गई। गुस्साए लोगों ने वार्ड बॉय की जमकर पिटाई कर दी। अस्पताल परिसर में अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कुछ लोग बीच-बचाव की कोशिश करते दिखे तो कुछ लोग वार्ड बॉय को सबक सिखाने पर उतारू नजर आए। इस दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम दिखाई दी।
मोबाइल कैमरे में कैद हुआ पूरा ड्रामा
इस पूरे घटनाक्रम को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल परिसर में किस तरह अफरा-तफरी मची हुई है। वार्ड बॉय को भीड़ से बचाने की कोशिशें नाकाम होती दिखती हैं और लोग हाथापाई करते नजर आते हैं। वीडियो में गालियां, धक्का-मुक्की और हंगामे का माहौल साफ झलकता है। कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते बरेली जिला अस्पताल का यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
पुलिस के पहुंचते ही बदला माहौल
घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की और किसी तरह वार्ड बॉय को लोगों के चंगुल से छुड़ाया। पुलिस ने आरोपी वार्ड बॉय को हिरासत में लिया और अस्पताल चौकी ले गई। इस दौरान महिला को भी चौकी बुलाया गया ताकि पूरे मामले की जानकारी ली जा सके। पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल परिसर का माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ, लेकिन लोगों में नाराजगी बनी रही।
चौकी में घंटों चला समझाने का दौर
पुलिस चौकी पर महिला और वार्ड बॉय दोनों को बैठाकर पूछताछ की गई। पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी और मामले को शांत कराने की कोशिश की। काफी देर तक बातचीत और समझाइश के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। पुलिस ने वार्ड बॉय को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की हरकत दोबारा न करे। वहीं महिला को भी भरोसा दिलाया गया कि अस्पताल परिसर में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
वायरल वीडियो के बाद उठे गंभीर सवाल
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बरेली जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान में अगर महिला सुरक्षित नहीं है तो आम नागरिक किस पर भरोसा करें। वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा होने लगी कि क्या अस्पताल कर्मचारियों की कोई नियमित ट्रेनिंग होती है और क्या उनके व्यवहार पर कोई निगरानी तंत्र मौजूद है।
महिलाओं की सुरक्षा पर फिर बहस
इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे स्थान, जहां महिलाएं अपने बीमार परिजनों के साथ मजबूरी में आती हैं, वहां उन्हें सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करना चाहिए। लेकिन अगर वहीं तैनात कर्मचारी अभद्रता करेंगे तो भरोसा टूटना स्वाभाविक है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आया। प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए आरोपी वार्ड बॉय को तुरंत इमरजेंसी ड्यूटी से हटा दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों की गरिमा और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए अस्पताल परिसर में निगरानी और सख्त की जाएगी।
कर्मचारियों के व्यवहार पर उठते सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल कर्मचारियों के व्यवहार और जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि वार्ड बॉय जैसे कर्मचारी मरीजों और उनके परिजनों के सीधे संपर्क में रहते हैं। ऐसे में उनका व्यवहार संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए। लेकिन अगर कर्मचारी ही नियमों की अनदेखी करेंगे तो अस्पताल की छवि धूमिल होना तय है। इस मामले ने यह भी उजागर किया है कि अस्पतालों में कर्मचारियों की काउंसलिंग और अनुशासनात्मक निगरानी कितनी जरूरी है।


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