तहसील में सेवानिवृत्ति का जश्न या प्रशासनिक मर्यादा की धज्जियां? अमेठी में लेखपाल की विदाई पर महिला वेश में नाचते युवक, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप



अमेठी की मुसाफिरखाना तहसील में लेखपाल की रिटायरमेंट पार्टी का वीडियो वायरल, सरकारी दफ्तर में नाच-गाने पर उठे गंभीर सवाल

अमेठी की तहसील से उठा प्रशासनिक गरिमा पर बड़ा सवाल

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से सामने आया यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि सरकारी कार्यालयों की कार्यसंस्कृति और अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जिले की मुसाफिरखाना तहसील परिसर में आयोजित एक रिटायरमेंट समारोह का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सरकारी दफ्तर के भीतर बाकायदा मंच सजाया गया है, डीजे या बाजे की धुन बज रही है और कुछ युवक महिलाओं के कपड़े पहनकर नाचते-गाते नजर आ रहे हैं। यह सब कुछ किसी निजी विवाह समारोह या सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसा लग रहा है, लेकिन हकीकत में यह एक सक्रिय तहसील कार्यालय के अंदर आयोजित कार्यक्रम बताया जा रहा है।

31 दिसंबर को रिटायरमेंट, 1 जनवरी को तहसील में जश्न

जानकारी के मुताबिक, मुसाफिरखाना तहसील में तैनात एक लेखपाल 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी विदाई के लिए 1 जनवरी 2026 को तहसील परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। आमतौर पर रिटायरमेंट पर सहकर्मी विदाई देते हैं, लेकिन इस मामले में कार्यक्रम का स्वरूप पूरी तरह अलग नजर आया। तहसील के अंदर ही नाच-गाना, ढोल-बाजे और मनोरंजन का आयोजन किया गया। वायरल वीडियो में कुछ युवक महिला वेश धारण किए हुए हैं, भारी मेकअप, साड़ी या सूट पहनकर फिल्मी गानों पर ठुमके लगा रहे हैं और आसपास बैठे लोग तालियां बजाकर इसका आनंद लेते दिख रहे हैं।

फरियादी भटकते रहे, कर्मचारी जश्न में डूबे रहे

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि जिस समय तहसील परिसर में यह कार्यक्रम चल रहा था, उसी दौरान कई फरियादी अपनी शिकायतें लेकर तहसील के चक्कर काटते रहे। राजस्व संबंधी मामलों, भूमि विवादों और अन्य प्रशासनिक कामों के लिए आए लोग अधिकारियों और कर्मचारियों को ढूंढते रहे, लेकिन अधिकांश कर्मचारी और कुछ अधिकारी इस कार्यक्रम में व्यस्त नजर आए। आरोप है कि नियमित सरकारी कार्य लगभग ठप रहे और जनता को घंटों इंतजार करना पड़ा।

सरकारी दफ्तर में नाच-गाना, नियमों पर उठे सवाल

सरकारी कार्यालयों में किस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, इसे लेकर स्पष्ट नियम और आचार संहिता होती है। तहसील जैसे संवेदनशील प्रशासनिक परिसर में इस तरह का मनोरंजनात्मक आयोजन नियमों के खिलाफ माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि विदाई समारोह किया जा सकता है, लेकिन उसका स्वरूप सादगीपूर्ण और गरिमामय होना चाहिए। महिला वेश में नृत्य, तेज संगीत और खुलेआम मनोरंजन न केवल कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जनता के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है।

वीडियो में दिख रहे अधिकारी-कर्मचारी भी घेरे में

वायरल वीडियो में केवल नाचते युवक ही नहीं, बल्कि आसपास बैठे कुछ कर्मचारी और कथित तौर पर अधिकारी भी दिखाई दे रहे हैं, जो इस कार्यक्रम का आनंद लेते नजर आते हैं। कोई मोबाइल से वीडियो बनाता दिख रहा है, तो कोई हंसते हुए तालियां बजा रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सब वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी और सहमति से हो रहा था, या फिर किसी ने जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया।

सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने सवाल उठाया है कि अगर आम आदमी तहसील में किसी छोटी सी गलती पर डांट खा सकता है, तो फिर अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियम अलग क्यों हैं। कुछ लोगों ने इसे टैक्सपेयर्स के पैसों से चलने वाले सिस्टम का मजाक बताया, तो कुछ ने सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासनिक चुप्पी ने बढ़ाई गंभीरता

मामले को लेकर जब उपजिलाधिकारी अभिनव कन्नौजिया, तहसीलदार राहुल सिंह और नायब तहसीलदार नम्रता मिश्रा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो बार-बार प्रयास के बावजूद किसी भी अधिकारी ने कॉल रिसीव नहीं की। प्रशासन की ओर से अब तक न तो कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो की जांच की जा रही है या नहीं। अधिकारियों की यह चुप्पी लोगों के संदेह को और गहरा कर रही है।

पहले भी उठते रहे हैं सरकारी दफ्तरों में अनुशासन के सवाल

यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी दफ्तरों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हों। इससे पहले भी कई जिलों से कार्यालय समय में जन्मदिन पार्टी, डांस या अन्य निजी समारोहों के वीडियो वायरल हो चुके हैं। हर बार सवाल यही उठता है कि क्या सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर निजी जश्न में डूब रहे हैं। अमेठी का यह मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह तहसील जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्यालय के भीतर हुआ।

जांच न होने पर भरोसे पर पड़ेगा असर

अगर इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो इसका सीधा असर आम जनता के भरोसे पर पड़ेगा। तहसील वह जगह है जहां लोग अपनी जमीन, मकान और आजीविका से जुड़े मामलों के समाधान के लिए आते हैं। ऐसे में यदि वहां मनोरंजन और जश्न का माहौल दिखे, तो प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।



आगे क्या, सबकी निगाहें प्रशासन पर

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन इस वायरल वीडियो को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या केवल मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा या फिर जांच बैठाकर दोषियों पर कार्रवाई होगी। यह मामला सिर्फ एक रिटायरमेंट पार्टी का नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति, जवाबदेही और अनुशासन से जुड़ा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की भूमिका यह तय करेगी कि जनता का भरोसा मजबूत होगा या फिर ऐसे सवाल और गहरे होते जाएंगे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ