शामली में तीन गर्लफ्रेंड का खर्च उठाने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट बना चोर, सरकारी अस्पताल से लाखों की चोरी का सनसनीखेज खुलासा
शामली में रिश्तों, पैसों और अपराध की अजीब कहानी
उत्तर प्रदेश के शामली जिले से सामने आया यह मामला न सिर्फ चोरी की वारदात है, बल्कि बदलते सामाजिक व्यवहार, रिश्तों के दबाव और आसान पैसे की लालसा की पूरी कहानी भी बयां करता है। सरकारी अस्पताल में हुई लाखों की चोरी के खुलासे के दौरान जब आरोपी फिजियोथेरेपिस्ट से सवाल-जवाब हुए, तो जो वजह सामने आई उसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया। आरोपी ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि वह तीन-तीन गर्लफ्रेंड का खर्च उठा रहा था और यही उसकी आर्थिक तबाही और फिर अपराध की सबसे बड़ी वजह बन गई।
ASP के सामने कबूलनामा, जिसने माहौल ही बदल दिया
जब आरोपी आसिफ को पकड़कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय लाया गया, तो पूछताछ की जिम्मेदारी ASP सुमित शुक्ला ने संभाली। सामान्य सवालों के बीच जब उससे पूछा गया कि चोरी क्यों की, तो आसिफ ने ऐसा जवाब दिया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उसने कहा कि वह दिन के करीब चार हजार रुपये तक कमा लेता था, लेकिन तीन गर्लफ्रेंड के खर्च पूरे करना उसके लिए नामुमकिन हो गया था। यह सुनते ही कमरे में मौजूद पुलिसकर्मियों के चेहरे पर हैरानी साफ झलकने लगी।
कौन है आसिफ, जो बना अस्पताल चोर
आसिफ अली शामली जिले के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के भूरा खुर्द गांव का रहने वाला है। वह अपने पिता शराफत अली के साथ रहता है, जो पेशे से किसान हैं। आसिफ पढ़ा-लिखा युवक है और फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करता है। उसका खुद का क्लिनिक भाजू गांव में है, जहां आसपास के गांवों से लोग इलाज कराने आते हैं। आमतौर पर उसे एक मेहनती और व्यवहार कुशल युवक माना जाता था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वही युवक एक दिन सरकारी अस्पताल में चोरी के आरोप में पकड़ा जाएगा।
इलाज के दौरान शुरू हुए रिश्ते, फिर बन गया जाल
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आसिफ के जीवन में यह मोड़ अचानक नहीं आया। अपने क्लिनिक और इलाज के दौरान उसकी पहचान तीन अलग-अलग गांवों की लड़कियों से हुई। बातचीत बढ़ी, फोन कॉल्स शुरू हुए और धीरे-धीरे तीनों से उसका प्रेम संबंध बन गया। शुरुआत में उसे यह सब आसान और रोमांचक लगा, लेकिन जैसे-जैसे रिश्ते आगे बढ़े, वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ता चला गया।
प्यार के साथ बढ़ा खर्च, खाली होती गई जेब
आसिफ ने पुलिस को बताया कि वह तीनों गर्लफ्रेंड की जरूरतों और मांगों को पूरा करने की कोशिश करता था। मोबाइल रिचार्ज, कपड़े, घूमना-फिरना, खाने-पीने का खर्च और छोटे-मोटे गिफ्ट्स उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे। दिन के चार हजार रुपये की कमाई भी उसे कम लगने लगी। उसने उधार लेना शुरू किया, लेकिन जल्द ही वह रास्ता भी बंद हो गया।
नाराजगी का डर और गलत रास्ते का चुनाव
तीनों गर्लफ्रेंड को खोने का डर आसिफ के सिर पर सवार रहने लगा। वह किसी को भी नाराज नहीं करना चाहता था और इसी दबाव में उसने ऐसा कदम उठाने का फैसला किया, जिसने उसकी जिंदगी ही पलट दी। उसने पुलिस को बताया कि उसे लगा कि अगर एक बार में मोटी रकम मिल जाए तो उसकी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। यहीं से उसके दिमाग में चोरी का ख्याल जन्मा।
दोस्त सचिन की एंट्री और चोरी की साजिश
अकेले यह काम करना आसान नहीं था, इसलिए आसिफ ने अपने एक दोस्त सचिन को इस प्लान में शामिल किया। सचिन सहारनपुर का रहने वाला है और आसिफ का पुराना परिचित है। दोनों ने मिलकर ऐसे स्थान की तलाश शुरू की, जहां सुरक्षा कम हो और कीमती सामान आसानी से मिल जाए। आखिरकार उनकी नजर एक सरकारी अस्पताल पर टिक गई।
सरकारी अस्पताल को बनाया निशाना
दोनों ने आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बलत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपना टारगेट चुना। उन्हें अंदाजा था कि वहां मेडिकल उपकरण, टीवी और अन्य कीमती सामान मौजूद होगा। रात के समय उन्होंने योजना के मुताबिक अस्पताल में घुसकर चोरी को अंजाम दिया। चोरी के दौरान उन्होंने कई बड़े और छोटे उपकरण समेट लिए, जिनकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।
चोरी के बाद राहत नहीं, बढ़ता गया डर
चोरी के बाद आसिफ को लगा कि अब उसके पास पैसे की समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन यह राहत ज्यादा देर नहीं टिक पाई। अस्पताल प्रशासन ने अगले ही दिन चोरी की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने जांच शुरू कर दी। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे आरोपियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित हुए।
CCTV फुटेज ने खोल दी पोल
पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो उसमें संदिग्ध गतिविधियां साफ नजर आईं। फुटेज के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और जल्द ही आसिफ और सचिन तक पहुंच गई। मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने पुलिस की जांच को और मजबूत कर दिया।
गिरफ्तारी के बाद टूटा आरोपी
पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों ने ज्यादा विरोध नहीं किया और जल्द ही अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार दोनों आदतन अपराधी नहीं थे, इसलिए पूछताछ में ज्यादा सख्ती की जरूरत नहीं पड़ी। आसिफ ने साफ-साफ कहा कि उसने यह कदम हालात के दबाव में उठाया।
ASP सुमित शुक्ला का बयान
मामले को लेकर ASP सुमित शुक्ला ने बताया कि 8 दिसंबर को बलत सीएचसी में चोरी की घटना सामने आई थी। चोरों ने नेबुलाइजर मशीन, एलईडी टीवी, मीटर समेत कुल 24 सामान चुरा लिए थे। अगले दिन केंद्र के चीफ फार्मासिस्ट ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच के बाद आसिफ और सचिन को गिरफ्तार कर लिया गया है।
चोरी में इस्तेमाल कार और सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद कर ली है। इसके अलावा मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं। चोरी किया गया अधिकांश सामान पुलिस ने रिकवर कर लिया है, जिसे जल्द ही अस्पताल प्रशासन को सौंपा जाएगा।
पढ़ा-लिखा युवक और अपराध का रास्ता
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पढ़ा-लिखा और अच्छा कमाने वाला युवक भी कैसे गलत संगत और दबाव में आकर अपराध की राह पर चल पड़ता है। आसिफ का मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि बदलते रिश्तों और सामाजिक दबावों की भी कहानी है।
गांव में चर्चा का विषय बना मामला
आसिफ की गिरफ्तारी के बाद भूरा खुर्द गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग हैरान हैं कि जिस युवक को वे एक सफल फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में जानते थे, वही सरकारी अस्पताल में चोरी के आरोप में जेल पहुंच गया। गांव के बुजुर्ग इस घटना को नई पीढ़ी के लिए चेतावनी बता रहे हैं।
रिश्तों का दबाव और गलत फैसले
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला युवाओं के लिए एक सबक है कि भावनात्मक और आर्थिक दबाव में लिया गया गलत फैसला जिंदगी को किस हद तक बर्बाद कर सकता है। तीन गर्लफ्रेंड का खर्च उठाने की चाहत ने आसिफ को अपराधी बना दिया और उसकी मेहनत से बनाई पहचान एक झटके में खत्म हो गई।
आगे की कानूनी कार्रवाई
फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पताल की ओर से भी नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
शामली का यह मामला सिर्फ एक चोरी की खबर नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे दिखावे, रिश्तों की जटिलता और आसान पैसे की चाहत एक सामान्य युवक को अपराध की दलदल में धकेल सकती है। पुलिस अब इस केस को उदाहरण के तौर पर देख रही है ताकि युवाओं को समय रहते सचेत किया जा सके।


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