सरकार के पक्ष में फैसला ना आने पर सुप्रीम कोर्ट में जाएगा रबर फैक्ट्री जमीन वापसी का मामला



बरेली से संवाददाता डॉक्टर मुदित प्रताप सिंह की रिपोर्ट

जनपद बरेली _ रबड़ फैक्ट्री की भूमि के स्वामित्व को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में फैसला आने की उम्मीद हैं सरकार के पक्ष में फैसला न आने पर सुप्रीम कोर्ट में जायेगा रबड़ फैक्ट्री की जमीन वापसी का मामला, जनपद बरेली के अंतर्राष्ट्रीय युवा वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष व भाजपा नेता आशीष अग्रवाल ने वताया कि 23 साल से बंद पड़ी रबड़ फैक्ट्री की बेशकीमती सरकारी जमीन के मालिकाना हक के लंबित प्रकरण पर मुंबई हाई कोर्ट में आज 14 सितंबर बुधवार को सुनवाई होगी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अधिवक्ता के सहयोग से कोर्ट के समक्ष प्रदेश सरकार का पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा जाएगा, उत्तर प्रदेश सरकार की पैरवी के लिए पिछले 3 दिनों से कई वरिष्ठ अधिकारी सभी जरूरी दस्तावेज लेकर मुंबई में मौजूद है।


   


बरेली व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष और भाजपा नेता आशीष अग्रवाल ने कहा 14 सितम्बर को बॉम्बे हाईकोर्ट में रबड़ फैक्ट्री की 18 अरब रुपये की बेशकीमती तेरह सौ एकड़ भूमि सरकार को वापस नही की गई तो वे बरेली के विकास व मजदूरों की हक की लड़ाई को सुप्रीमकोर्ट में एक जनहित याचिका डालेंगे। ज्ञातव्य हो कि पिछले छः माह से व्यापारी नेता आशीष अग्रवाल केंद्र व प्रदेश सरकार के दो दर्जन मंत्रियो व भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष नेताओं से मिलकर उत्तर प्रदेश सरकार की बेशकीमती भूमि को वापस लेने की प्रकिया में जिला प्रशासन पर लचर पैरवी का आरोप लगाकर केन्द्र के हस्तक्षेप से भूमि वापस लेने की गुहार लगा चुके हैं, उन्होंने कहा बैंको ने जो भी  लोन फैक्ट्री को दिए वो उसकी मशीनरी और प्रबंधन के नाम पर दिए हैं जिसका सरकारी भूमि से कोई लेना देना नही है, सरकार ने प्रबंधन को  केवल तीन लाख चालीस हजार रुपये में जमीन शशर्त लीज पर दी थी जिसमे साफ लिखा है कि 55 वर्ष अथवा फैक्ट्री के बन्द होने पर भूमि स्वत सरकार को वापस हो जाएगी। बैंको को अपना बकाया भुगतान लेना है तो मशीनरी उखाड़ कर ले जाए या फेक्ट्री के प्रबंधन की सम्पत्ति नीलाम कर बसूली करें। किराएदार के लोन का भुगतान दुकान मालिक नही करता। अलकेमिस्ट कम्पनी एक ऐसी कम्पनी है जो देश मे करोड़ो अरबो के घाटे में डूबी फैक्ट्रियों व बैंको के वाकयदारो के बकाया का कुछ प्रतिशत हिस्सा जमाकर बड़ा मुनाफा खाती है अलकेमिस्ट ने जो भी रुपया बैंको में जमा किया है वो प्रबन्धन व बैंक दोनों का मामला है इस वावत अलकेमिस्ट सरकार की भूमि पर कब्जा नही ले सकती। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मानवाधिकार आयोग तक इस प्रकरण को पहुँचाने के बाद ही प्रदेश व जिले के अधिकारी हरकत में आये हैं और जमीन वापसी को अब मजबूत पैरवी कर रहे हैं और उम्मीद है कि कल आना वाला फैसला सरकार के हक में होगा, और विशालतम तेरह सौ वीघा जमीन पर ओधोगिक सिडकुल बनेगा, जिससे बरेली सहित प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेंगे। इसके बावजूद भी अगर बॉम्बे हाईकोर्ट अलकेमिस्ट या प्रबन्धन के हक में फैसला सुनाती है तो सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर लम्बी लड़ाई लड़ी जाएगी । प्रबन्धन अथवा अलकेमिस्ट कम्पनी को किसी भी हाल के जमीन पर कब्जा नही लेने दिया जाएगा। मजदूरों के बकाया भुगतान भी वही करेगा जिसका स्वामित्व जमीन पर रहेगा।     




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