रक्षा सूत्र बहनों के सुरक्षा का वचन


वाराणसी :  महाभारत में शिशुपाल के साथ युद्ध के दौरान श्री कृष्ण जी की तर्जनी उंगली कट गई थी। यह देखते ही द्रोपदी कृष्ण जी के पास दौड़कर पहुंची और अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी। उस दिन श्रावण पूर्णिमा थी। इसके बदले में कृष्ण जी ने चीर हरण के समय द्रोपदी की रक्षा की थी।
 पौराणिक कथाओं में भी  यह अंकित है कि बहनों की सुरक्षा भाइयों का दायित्व  होता है।

भाई नहीं निभाते बहनों की सुरक्षा का दायित्व

आजकल के कुछ भाई नहीं निभाते सुरक्षा का दायित्व क्योंकि महिलाओं के साथ बर्बरता करने वाला भी एक भाई होता है हर घर में एक बहन एक भाई है अगर हर कोई अपनी बहन की सुरक्षा का दायित्व के साथ-साथ किसी दूसरे की बहन पर बुरी नजर ना डालने का भी दायित्व उठाएं तो शायद आज समाज में महिलाओं की स्थिति कुछ और होती। आज आए दिन महिलाओं के साथ जघन्य अपराध नहीं होते लेकिन आजकल हम अपने त्योहारों को मनाते तो जरूर है लेकिन उसके पीछे छुपे कारण,  रहस्य  को नहीं समझ पाते अगर समझ पाते तो आज समाज में किसी भी बहन के साथ दुर्व्यवहार नहीं होता ।

 प्रण लीजिए 

अपनी बहनों के साथ - साथ आप यह भी प्रण ले कि किसी और के बहनों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेंगे जैसी आपकी बहन वैसे ही दूसरे के भी बहन को सम्मान देंगे तब जाकर  होंगी समाज में बहनों की सुरक्षा और तब इस पवित्र रक्षाबंधन का महत्व सही मायने में सफल होगा।

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