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लाल कृष्ण आडवाणी के 100वें साल में प्रवेश पर भावुक हुए PM मोदी, जन्मदिन पर लिखा खास लेख; पुराने दिनों को किया याद




पीएम मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी के 100वें वर्ष में प्रवेश पर बधाई दी। लेख में रथ यात्रा, इमरजेंसी और 1991 चुनाव की यादें साझा कीं।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता, पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारत रत्न लाल कृष्ण आडवाणी 8 नवंबर 2026 को अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए एक विशेष लेख लिखा है। इसमें उन्होंने आडवाणी के राजनीतिक सफर, देश के विभाजन की त्रासदी, जनसंघ और बीजेपी के निर्माण, इमरजेंसी, सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा और अपने पुराने अनुभवों का जिक्र किया है।

आडवाणी के जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई, विशेष लेख में याद किया योगदान


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर लाल कृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस दिन को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आडवाणी अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने भारत के प्रति आडवाणी के योगदान को याद करते हुए एक विशेष लेख भी लिखा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने इस लेख के माध्यम से आडवाणी के लंबे सार्वजनिक जीवन और देश के लिए किए गए उनके कार्यों को सामने रखने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, आडवाणी का जीवन भारतीय राजनीति के कई महत्वपूर्ण दौरों से जुड़ा रहा है।

दीपावली के दिन जन्मदिन, कई ऐतिहासिक अवसरों के बीच खास संयोग


पीएम मोदी ने अपने लेख की शुरुआत आडवाणी के जन्मदिन और इस साल के विशेष संयोग का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने लिखा कि 8 नवंबर को आडवाणी अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस बार उनका जन्मदिन दीपावली के अवसर पर पड़ रहा है। यह त्योहार भगवान राम और दीपों से जुड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने इस मौके को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया।

आडवाणी के साथ बिताए पुराने पलों को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया कि आडवाणी का जन्मदिन उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भावुक कर देने वाला अवसर है। उन्होंने कहा कि उन्हें लंबे समय तक आडवाणी का स्नेह, साथ और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।

मोदी के मुताबिक, आडवाणी के साथ बिताए गए कई पुराने पल और उनसे जुड़ी यादें इस खास अवसर पर उनके मन में ताजा हो रही हैं। उन्होंने आडवाणी को उन चुनिंदा नेताओं में शामिल बताया, जिनका जीवन आधुनिक भारत के अलग-अलग राजनीतिक और ऐतिहासिक अध्यायों से जुड़ा रहा है।

1927 में हुआ था जन्म, बंटवारे के बाद सिंध छोड़ना पड़ा


पीएम मोदी ने अपने लेख में बताया कि लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था। वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान उन्हें युवावस्था में सिंध में अपनी जानी-पहचानी दुनिया छोड़नी पड़ी थी।

मोदी ने लिखा कि इतनी बड़ी परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद आडवाणी ने किसी कड़वाहट के बिना नए सिरे से अपना जीवन शुरू किया। विपरीत परिस्थितियों में शून्य से शुरुआत करने की यही क्षमता उनके राजनीतिक जीवन में भी दिखाई दी।

प्रधानमंत्री के अनुसार, आडवाणी ने इसी संकल्प के साथ पहले भारतीय जनसंघ को मजबूत करने और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1989 में कांग्रेस की सीटें घटीं, 1996 में बीजेपी बनी सबसे बड़ी पार्टी


प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी के संगठनात्मक विस्तार में आडवाणी की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनके पार्टी अध्यक्ष रहने के दौरान के राजनीतिक घटनाक्रमों को याद किया।

उन्होंने लिखा कि 1989 में कांग्रेस की लोकसभा सीटें 400 से घटकर 200 से नीचे आ गई थीं। वहीं, 1996 में बीजेपी पहली बार देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी थी।

मोदी के मुताबिक, आडवाणी ने पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया। उन्होंने बीजेपी को राष्ट्र सर्वोपरि के सिद्धांत पर आधारित मजबूत संगठनात्मक आधार देने में अहम योगदान दिया।

वैचारिक स्पष्टता और छद्म धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाने की क्षमता का जिक्र


पीएम मोदी ने अपने लेख में आडवाणी की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने पहली विशेषता उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता को बताया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, आडवाणी के भाषणों और लेखों में उनकी विचारधारा की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। जनसंघ और बीजेपी के लिए तैयार किए गए उनके प्रस्ताव आज भी पढ़ने योग्य हैं। उनके साक्षात्कार भी हमेशा सटीक और प्रभावशाली रहे।

मोदी ने उनकी दूसरी विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा कि आडवाणी में भारतीय राजनीति के एक बड़े वर्ग द्वारा वर्षों से प्रचारित छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर करने की क्षमता थी।

RSS प्रचारक से बीजेपी के बड़े नेता बनने तक का सफर


प्रधानमंत्री ने आडवाणी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया था।

इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों में योगदान देना शुरू किया।

मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के बीच लंबे समय तक रहे सहयोग को भारतीय राजनीति की दुर्लभ मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई दशकों तक एक-दूसरे का साथ दिया और बिना आपसी प्रतिस्पर्धा के संगठन को आगे बढ़ाया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, अटल जी और आडवाणी जी ने मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1967 में दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के अध्यक्ष बने थे आडवाणी


पीएम मोदी ने बताया कि जब आडवाणी दिल्ली पहुंचे थे, तब राजधानी विभाजन की त्रासदी से उबरने की कोशिश कर रही थी। ऐसे समय में उन्होंने खुद को जनसंघ को मजबूत करने के काम में लगा दिया।

वर्ष 1967 में आडवाणी दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के अध्यक्ष बने। इस दौरान उन्होंने दिवंगत विजय कुमार मल्होत्रा के साथ काम किया, जो मुख्य कार्यकारी पार्षद बने थे।

प्रधानमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन के इस दौर को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि आडवाणी ने अपनी प्रत्येक जिम्मेदारी को पूरी मेहनत और समर्पण के साथ निभाया।

1970 में शुरू हुआ संसदीय सफर, दोनों सदनों में बनाई अलग पहचान


लाल कृष्ण आडवाणी के संसदीय जीवन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 1970 में उनकी संसदीय पारी की शुरुआत हुई थी।

संसद में उनके विचारों और चर्चाओं में दिए गए योगदान को अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने सराहा। उन्होंने सांसद के रूप में अपनी पहचान बनाई और बाद में संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता तथा सत्ता पक्ष की ओर से भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

मोदी ने कहा कि संसदीय जिम्मेदारियों के बावजूद आडवाणी लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा करते रहे और आम लोगों से मिलते रहे।

1991 के लोकसभा चुनाव की यादें साझा कीं, गांधीनगर से जुड़ा था पुराना रिश्ता


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में 1991 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उस चुनाव में यह तय किया गया था कि लाल कृष्ण आडवाणी दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ेंगे। इनमें गुजरात की गांधीनगर सीट भी शामिल थी।

मोदी ने बताया कि आडवाणी का गुजरात से पुराना संबंध रहा था। देश के विभाजन के बाद उनके पिता कच्छ में आकर बस गए थे। इसके अलावा आडवाणी गुजरात से राज्यसभा सांसद भी रह चुके थे। इसलिए गांधीनगर से चुनाव लड़ना उनके लिए घर वापसी जैसा था।

उस समय नरेंद्र मोदी बीजेपी संगठन से जुड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें आडवाणी के नामांकन पत्र तैयार करने और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान उनकी मदद करने का अवसर मिला था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीनगर की जनता ने आडवाणी को लगातार संसद भेजा। उन्होंने खुद को गांधीनगर का मतदाता बताते हुए कहा कि उन्हें भी कई बार आडवाणी को वोट देने का अवसर मिला।

मोदी ने अपने लेख में आडवाणी की ओर से अपने संसदीय क्षेत्र के प्रति दिखाई गई जिम्मेदारी और ध्यान की भी सराहना की।

कमला आडवाणी के योगदान को भी नहीं भूले प्रधानमंत्री


प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी के असाधारण सार्वजनिक जीवन की चर्चा उनकी पत्नी के योगदान के बिना पूरी नहीं हो सकती।

मोदी के अनुसार, कमला आडवाणी हमेशा उनके लिए ताकत और सहारे का स्रोत बनी रहीं। आडवाणी के लंबे सार्वजनिक जीवन में उनका साथ महत्वपूर्ण रहा।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति की सार्वजनिक यात्रा में परिवार का सहयोग भी अहम भूमिका निभाता है और कमला आडवाणी ने आडवाणी के जीवन में यह भूमिका निभाई।

2024 में मिला भारत रत्न, पीएम मोदी ने अच्छे स्वास्थ्य की कामना की


प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख के अंतिम हिस्से में आडवाणी के जीवन के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि कराची में पले-बढ़े आडवाणी ने शायद कभी कल्पना नहीं की होगी कि उनका जीवन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि देश के लोगों ने वर्ष 2024 में उनके राष्ट्रीय और राजनीतिक योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री ने आडवाणी के जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश करने पर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आडवाणी आगे भी अपने अनुभवों और जीवन यात्रा से लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।





साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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