दिल्ली में दिवाली पर AQI 384 पहुंचा। जहांगीरपुरी में 450 AQI के साथ सबसे ज्यादा प्रदूषण, जानें अपने इलाके की हवा का हाल।
दिवाली के मौके पर राजधानी दिल्ली की हवा प्रदूषण से बेहाल हो गई है। 8 नवंबर 2026 की सुबह 7:05 बजे तक दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 384 दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में यह 400 के पार पहुंच गया। जहांगीरपुरी में सबसे अधिक 450 AQI दर्ज हुआ। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 8 और 9 नवंबर को भी प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना कम है।
दिल्ली में दिवाली पर बिगड़ी हवा की गुणवत्ता, गंभीर श्रेणी में पहुंचे कई इलाके
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। राजधानी में हवा की धीमी रफ्तार और आतिशबाजी के बीच प्रदूषित कण वातावरण में जमा होने से एयर क्वालिटी लगातार खराब बनी हुई है। प्रतिबंधों के बावजूद हुई आतिशबाजी ने भी प्रदूषण की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
8 नवंबर 2026 की सुबह 7:05 बजे तक दिल्ली का औसत AQI 384 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 301 से 400 के बीच AQI को बहुत खराब श्रेणी में रखा जाता है, जबकि 401 से 500 के बीच का स्तर गंभीर माना जाता है।
दिल्ली के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया। इनमें जहांगीरपुरी सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 तक पहुंच गया।
जहांगीरपुरी में सबसे ज्यादा प्रदूषण, इन इलाकों की हवा भी बेहद खराब
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी के अलावा पंजाबी बाग, आरके पुरम, रोहिणी, बवाना और आईआईटी दिल्ली जैसे क्षेत्रों में भी AQI गंभीर श्रेणी में पहुंच गया।
प्रमुख प्रदूषित इलाकों में जहांगीरपुरी का AQI 450, पंजाबी बाग का 449, आरके पुरम का 448, बवाना का 446, रोहिणी का 445, आईआईटी दिल्ली का 445 और एनएसआईटी द्वारका का 441 दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी के कई हिस्सों में लोगों को बेहद खराब हवा में सांस लेनी पड़ रही है।
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कितना रहा AQI?
8 नवंबर की सुबह सामने आए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता का स्तर अलग-अलग रहा। कुछ इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि अन्य स्थानों पर यह बहुत खराब स्थिति में बना रहा।
बवाना में AQI 446 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में है। बुराड़ी क्रॉसिंग में 414 और अलीपुर में 413 AQI रिकॉर्ड किया गया। इन दोनों इलाकों की हवा भी गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।
वहीं, सुभाष नगर और राजौरी गार्डन क्षेत्र में AQI 384 दर्ज किया गया। बुराड़ी में यह 370, आया नगर में 365, बदरपुर में 349, आनंद विहार में 344 और अशोक विहार में 323 रहा। इन सभी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
पिछले 10 वर्षों में दिवाली से पहले सबसे प्रदूषित रही दिल्ली की हवा
इस बार दिवाली से एक दिन पहले राजधानी की वायु गुणवत्ता पिछले 10 वर्षों में सबसे खराब स्थिति में दर्ज की गई। वहीं, पिछले 11 वर्षों के आंकड़ों में इसे दूसरी सबसे प्रदूषित स्थिति बताया गया है।
पिछले कुछ दिनों के AQI आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर की शुरुआत से ही दिल्ली की हवा लगातार खराब बनी हुई है।
1 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 261 दर्ज किया गया था। इसके बाद 2 नवंबर को यह बढ़कर 324 हो गया। 3 नवंबर को AQI 350, 4 नवंबर को 377, 5 नवंबर को 369 और 6 नवंबर को 382 दर्ज किया गया।
7 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 369 रहा। इसके बाद 8 नवंबर की सुबह यह 384 तक पहुंच गया।
8 और 9 नवंबर को भी प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद कम
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दो दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता और बिगड़ सकती है। 8 और 9 नवंबर को प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर श्रेणी में बने रहने की आशंका जताई गई है।
हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषित कणों का फैलाव प्रभावित हो रहा है। ऐसे में राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना रह सकता है।
दिल्ली में तापमान में आएगी गिरावट, जानें मौसम का हाल
प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में दिन के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है।
अगले तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है। शनिवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
वहीं, न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
दिल्ली में ग्रीन पटाखों को लेकर क्या हैं नियम?
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई है। इसके लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है।
8 नवंबर को सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकते हैं। निर्धारित समय के अलावा पटाखे जलाने की अनुमति नहीं है।
इसके अलावा अस्पतालों, हेल्थ सेंटर, वृद्धाश्रम और शिक्षण संस्थानों के आसपास 300 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में पटाखे जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।
बेरियम वाले पटाखों और पारंपरिक पटाखों पर सख्त रोक
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेरियम युक्त पटाखों के इस्तेमाल पर सख्त मनाही है। इसके अलावा पारंपरिक पटाखे और पटाखों की लड़ियां जलाने की भी अनुमति नहीं है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में पटाखे जब्त किए जा सकते हैं। पटाखे बेचने वालों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। इसके अलावा पुलिस FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई भी कर सकती है।
9 नवंबर से पटाखों पर फिर लागू होगा पूर्ण प्रतिबंध
पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, दिल्ली में 9 नवंबर से एक बार फिर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। इसके बाद पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
फिलहाल राजधानी में प्रदूषण का स्तर पहले से ही चिंताजनक बना हुआ है। दिवाली के दौरान बढ़ी आतिशबाजी और मौसम की परिस्थितियों के बीच आने वाले दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर नजर बनी रहेगी।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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