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श्रद्धा दुबे ने लखनऊ पुलिस को फिर दिया चकमा! सरेंडर की तैयारी के बीच इंस्पेक्टर और DCP पर गिरी गाज


लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड में श्रद्धा दुबे पुलिस को चकमा देकर फरार हुईं। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और DCP पर कार्रवाई हुई।

लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे एक बार फिर पुलिस की पकड़ से बाहर निकल गई। खबर के मुताबिक, नौ दिनों से फरार श्रद्धा रविवार को लखनऊ के एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया से बातचीत करने पहुंची थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से चली गई। इस घटनाक्रम के बाद हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया, जबकि डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर को वेटिंग में डाल दिया गया है।

लखनऊ में पुलिस की तलाश के बीच मीडिया के सामने आई श्रद्धा दुबे

शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार तलाश कर रही थी। उसकी तलाश रायबरेली से लखनऊ और गोरखपुर से नेपाल तक किए जाने की बात सामने आई। इसी बीच श्रद्धा के लखनऊ में मौजूद होने और मीडिया के सामने बयान देने की खबर ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए।

रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धा पिछले तीन दिनों से लखनऊ में थी। रविवार को उसने शहर के एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया को बुलाया और अपना पक्ष रखा। पुलिस को इसकी सूचना मिली, लेकिन उसके पहुंचने से पहले ही श्रद्धा वहां से निकल गई। इस तरह वह एक बार फिर गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रही।

यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी और उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार कोशिशें की जा रही थीं। इसके बावजूद राजधानी में मीडिया से बातचीत के बाद उसका निकल जाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

क्या तैयार थी श्रद्धा के सरेंडर की पूरी योजना?

पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, रविवार को श्रद्धा के सरेंडर को लेकर एक योजना तैयार की गई थी। बताया गया कि वह मीडिया के सामने बयान देने के बाद थाने में आत्मसमर्पण करने वाली थी। हालांकि, इस योजना के मुताबिक घटनाक्रम आगे नहीं बढ़ पाया और पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से चली गई।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नौ दिनों से फरार श्रद्धा ने अदालत में सरेंडर की अर्जी देकर पुलिस पर दबाव बना दिया था। इसके बाद पुलिस की ओर से ऐसी रणनीति तैयार किए जाने की बात कही गई, जिसमें श्रद्धा पहले मीडिया से बातचीत करती और फिर पुलिस मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लेती।

सूत्रों के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद मामले को आत्महत्या का रूप देकर श्रद्धा को सरकारी गवाह बनाने की योजना भी चर्चा में थी। हालांकि, श्रद्धा और उसके संरक्षकों को यह शर्त स्वीकार नहीं थी। बताया गया कि इसी वजह से उसने निर्धारित समय से पहले ही मीडिया से बातचीत कर ली और पुलिस के पहुंचने से पहले वहां से निकल गई।

श्रद्धा के सरेंडर की कथित डील क्यों बिगड़ी?

श्रद्धा दुबे के आत्मसमर्पण को लेकर तैयार की गई योजना के विफल होने के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित योजना में मामले को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या के रूप में आगे बढ़ाने की बात थी।

इस कथित योजना में श्रद्धा और उसकी बहन रश्मि को आरोपी बनाए जाने की बात सामने आई। दूसरी ओर, श्रद्धा चाहती थी कि मामले को आत्महत्या करार दिया जाए और उसे सरकारी गवाह बनाया जाए। साथ ही, उसकी बहन रश्मि को पूरे मामले से अलग रखने की शर्त भी बताई गई है।

बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच इन्हीं शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, यह जानकारी पुलिस सूत्रों के हवाले से दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि श्रद्धा के सरेंडर की चर्चा के बीच पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी। मीडिया से बातचीत के बाद उसके वहां से निकल जाने के कारण गिरफ्तारी की कोशिश नाकाम रही।

नौ दिन तक गिरफ्तारी नहीं होने पर पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई

श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी में देरी और उसके मीडिया के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार, हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया। वहीं, मामले की निगरानी कर रहे डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर को वेटिंग में डाल दिया गया।

खबर में बताया गया है कि हजरतगंज थाने में तैनात इंस्पेक्टरों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में श्रद्धा को जल्द गिरफ्तार करना और मामले की जांच को आगे बढ़ाना विक्रम सिंह की जिम्मेदारी थी। लेकिन नौ दिनों तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

इसके बाद श्रद्धा का लखनऊ में मीडिया से बातचीत करना और पुलिस के पहुंचने से पहले वहां से निकल जाना विभाग के लिए असहज स्थिति बन गया। इस घटनाक्रम के बाद इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई।

डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर इस मामले की निगरानी कर रहे थे। ऐसे में उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई और उन्हें वेटिंग में डाल दिया गया। इस कार्रवाई को श्रद्धा की गिरफ्तारी में नाकामी और घटनाक्रम के बाद पैदा हुई स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

अर्पित विजयवर्गीय को मिली नई जिम्मेदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद बाराबंकी के पूर्व एसपी अर्पित विजयवर्गीय को डीसीपी सेंट्रल की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही उन्हें सुरक्षा और इंटेलिजेंस का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब शिवा शर्मा हत्याकांड में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस के सामने अब आरोपी को पकड़ने और मामले की जांच को आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है।

श्रद्धा के मीडिया के सामने आने और फिर पुलिस के पहुंचने से पहले निकल जाने के घटनाक्रम ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। वहीं, इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर के खिलाफ हुई कार्रवाई से पुलिस विभाग में जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, श्रद्धा रविवार को लखनऊ के एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया से बातचीत करने के बाद पुलिस के पहुंचने से पहले वहां से निकल गई। इस घटनाक्रम के बाद हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया और डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर को वेटिंग में डाला गया। अर्पित विजयवर्गीय को डीसीपी सेंट्रल के साथ सुरक्षा और इंटेलिजेंस का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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