शिवा शर्मा डेथ केस: आरोपी श्रद्धा दुबे को STF ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। जानिए नेपाल भागने और गिरफ्तारी की पूरी कहानी।
लखनऊ के चर्चित शिवा शर्मा डेथ केस में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को एसटीएफ नागपुर से गिरफ्तार कर लखनऊ ले आई है। 9 अक्टूबर को शिवा की मौत के बाद ये सभी नेपाल भाग गए थे। पुलिस से बचने के लिए श्रद्धा ने बुर्के का सहारा लिया और राहगीरों का वाई-फाई इस्तेमाल किया। लेकिन नागपुर ले जाने वाले कैब ड्राइवर के इंटरनेट कनेक्शन से एसटीएफ को अहम सुराग मिला और 20 अक्टूबर को तीनों पकड़े गए।
हजरतगंज कोतवाली में पूछताछ, आज कोर्ट में पेशी
कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में एसटीएफ ने नागपुर से पकड़ी गई श्रद्धा दुबे और उसके दोनों साथियों को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में रखा है। यहां पुलिस हत्या से जुड़े तमाम सवालों पर उनके बयान दर्ज कर रही है। कानूनी प्रक्रिया के तहत, मेडिकल जांच पूरी होने के बाद आज ही इन तीनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
नेपाल भागने और रूप बदलने की पूरी कहानी
पुलिस जांच में सामने आया है कि 9 अक्टूबर को शिवा की मौत के बाद श्रद्धा, रश्मि और दानिश सबसे पहले केजीएमयू गए थे। वहां से निकलने के बाद इन्होने लगातार अपनी लोकेशन बदली। सीतापुर, महमूदाबाद और बहराइच होते हुए ये रुपईडीहा बॉर्डर पार करके नेपाल पहुंच गए। नेपाल के बुटवल में बिना किसी पहचान पत्र के ये एक होटल में ठहरे, लेकिन पुलिस की भनक लगते ही वहां से भी खिसक लिए।
करीब 16 अक्टूबर को जब इन्होंने वापस भारत में कदम रखा, तो पहचान छिपाने के लिए महराजगंज के भगवानपुर बॉर्डर पर श्रद्धा ने बुर्का पहन लिया। उसने अपना ट्रॉली बैग एक स्थानीय ड्राइवर को थमा दिया और कपड़े के झोले खरीद लिए। इसके बाद किराए की गाड़ी से नौतनवा होते हुए रायबरेली पहुंचे। रायबरेली में कुछ घंटे रुकने के बाद दूसरी टैक्सी से आगरा की तरफ निकल गए। पुलिस हर बार इनके ठिकानों पर पहुंचती रही, लेकिन आरोपी चंद घंटे पहले ही फरार हो जाते थे।
सिम कार्ड निकाले, कैब वालों का हॉटस्पॉट किया इस्तेमाल
फरारी के दौरान पुलिस की साइबर ट्रैकिंग से बचने के लिए आरोपियों ने अपने मोबाइल से सिम कार्ड ही निकाल दिए थे। पुलिस को जब भी इनके मोबाइल पर इंटरनेट एक्टिव होने के सिग्नल मिलते और टीम आईपी एड्रेस के सहारे वहां पहुंचती, तो पता चलता कि वह इंटरनेट किसी ई-रिक्शा चालक या कैब ड्राइवर का है। दरअसल, आरोपी सफर के दौरान चालकों का इंटरनेट कनेक्शन (हॉटस्पॉट) मांगकर संपर्क साधते थे, जिससे एसटीएफ को उन तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ी।
नागपुर में कैसे खुली पोल? खंगाला जा रहा माफिया कनेक्शन
श्रद्धा की चालाकी उस वक्त धरी रह गई जब फतेहपुर में एसटीएफ को एक लोकेशन का अहम सुराग मिला। प्रयागराज एसटीएफ ने कड़ियां जोड़ीं तो पता चला कि यह इंटरनेट कनेक्शन उस कैब चालक का था, जो इन्हें नागपुर ले गया था। इसी इनपुट के आधार पर 20 अक्टूबर को नागपुर पुलिस श्रद्धा के फ्लैट तक पहुंची और तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों के मुताबिक, नागपुर में श्रद्धा को पनाह देने का आरोप जुल्फिकार बेहलिम और मोहसिन पर लगा है। इन दोनों का लंबा आपराधिक इतिहास है। इनके गैंग पर कारोबारियों को धमकाने और रंगदारी वसूलने के केस दर्ज हैं, जिसके चलते अगस्त में इन पर मकोका (MCOCA) भी लगाया गया था। अब पुलिस मादक पदार्थों और सोने की तस्करी से जुड़े इनके नेटवर्क की भी गहराई से जांच कर रही है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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