मोबाइल नेटवर्क से परेशान हैं या मौजूदा कंपनी का रिचार्ज प्लान आपकी जरूरतों के मुताबिक नहीं है, तो आप अपना नंबर बदले बिना दूसरी टेलीकॉम कंपनी में जा सकते हैं। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के तहत इसके लिए 1900 पर SMS भेजकर यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) लेना होता है। पोर्टिंग शुल्क अधिकतम 6.46 रुपये हो सकता है, जबकि प्रक्रिया में आमतौर पर 3 से 5 वर्किंग डे लगते हैं। कुछ क्षेत्रों में 15 वर्किंग डे तक इंतजार करना पड़ सकता है।
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी क्या है और कैसे काम करती है?
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी MNP ऐसी सुविधा है, जिसकी मदद से ग्राहक अपना मौजूदा मोबाइल नंबर बरकरार रखते हुए दूसरी टेलीकॉम कंपनी की सेवाएं ले सकते हैं। यदि आपके क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या है, इंटरनेट की स्पीड संतोषजनक नहीं है या मौजूदा कंपनी के रिचार्ज प्लान आपकी जरूरतों से मेल नहीं खाते, तो आप दूसरे ऑपरेटर का विकल्प चुन सकते हैं।
इस प्रक्रिया में सबसे पहले यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) प्राप्त करना होता है। इसके बाद नई टेलीकॉम कंपनी के अधिकृत स्टोर या पॉइंट ऑफ सेल (PoS) पर जाकर जरूरी फॉर्म भरने और KYC प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत होती है। पोर्टिंग की रिक्वेस्ट जमा होने के बाद प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता है।
SIM पोर्ट कराने के लिए 1900 पर कैसे भेजें SMS?
मोबाइल नंबर पोर्ट कराने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अपने मौजूदा मोबाइल नंबर से एक SMS भेजना होगा। मैसेज में अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में PORT लिखें, उसके बाद एक स्पेस दें और अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करें। इसके बाद इस SMS को 1900 पर भेज दें।
उदाहरण के लिए, यदि आपका मोबाइल नंबर 9876543210 है, तो मैसेज में PORT 9876543210 लिखकर 1900 पर भेजना होगा। यह केवल प्रक्रिया समझाने के लिए एक उदाहरण है।
SMS भेजने के बाद 1901 नंबर से यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) प्राप्त होगा। इस कोड को सुरक्षित रखें, क्योंकि नई कंपनी में पोर्टिंग का अनुरोध दर्ज कराने के दौरान इसकी जरूरत पड़ेगी।
नई टेलीकॉम कंपनी में पोर्टिंग रिक्वेस्ट कैसे जमा करें?
UPC मिलने के बाद उस टेलीकॉम कंपनी के अधिकृत स्टोर या पॉइंट ऑफ सेल (PoS) पर जाएं, जिसकी सेवाएं आप लेना चाहते हैं। वहां कस्टमर एक्विजिशन फॉर्म (CAF) और मोबाइल नंबर पोर्टिंग फॉर्म भरना होगा।
फॉर्म जमा करते समय अपना UPC उपलब्ध कराएं और आवश्यक KYC प्रक्रिया पूरी करें। नए ऑपरेटर की ओर से पोर्टिंग शुल्क लिया जाता है, तो उसका भुगतान भी करना पड़ सकता है। रिक्वेस्ट जमा होने के बाद इसकी जानकारी SMS के जरिए दी जाएगी।
फॉर्म भरते समय दी गई जानकारी सही रखना जरूरी है, ताकि आवेदन की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी न हो। पोर्टिंग से जुड़े शुल्क और नई कंपनी की सेवाओं के बारे में अधिकृत स्टोर या रिटेलर से जानकारी ली जा सकती है।
SIM पोर्ट कराने में कितना समय लगता है?
मोबाइल नंबर पोर्ट होने में लगने वाला समय इस बात पर निर्भर करता है कि पोर्टिंग किस क्षेत्र में कराई जा रही है। आमतौर पर एक ही टेलीकॉम सर्किल के भीतर नंबर पोर्ट होने में 3 वर्किंग डे लगते हैं।
यदि नंबर को दूसरे टेलीकॉम सर्किल में पोर्ट कराया जा रहा है, तो प्रक्रिया में 5 वर्किंग डे तक लग सकते हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर, असम और नॉर्थ ईस्ट के कुछ इलाकों में पोर्टिंग पूरी होने में 15 वर्किंग डे तक का समय लग सकता है।
पोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी होने की तारीख और समय की जानकारी ग्राहक को SMS के माध्यम से दी जाती है। इस दौरान कुछ समय के लिए मोबाइल सेवा बाधित भी हो सकती है।
मोबाइल नंबर पोर्ट कराने की फीस कितनी है?
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के FAQ के मुताबिक, नया टेलीकॉम ऑपरेटर प्रत्येक पोर्टिंग रिक्वेस्ट के लिए अधिकतम 6.46 रुपये का शुल्क ले सकता है।
यह शुल्क नए SIM के रिचार्ज प्लान या अन्य सेवाओं पर होने वाले खर्च से अलग हो सकता है। इसलिए पोर्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित कंपनी के अधिकृत स्टोर या रिटेलर से कुल खर्च की जानकारी लेना बेहतर है।
क्या SIM पोर्ट कराने का फैसला बदल सकते हैं?
यदि आपने मोबाइल नंबर पोर्ट कराने की रिक्वेस्ट जमा कर दी है, लेकिन बाद में अपना फैसला बदलना चाहते हैं, तो निर्धारित समय के भीतर इसे वापस लेने का विकल्प मौजूद है।
इसके लिए रिक्वेस्ट जमा करने के 24 घंटे के भीतर अपने मोबाइल नंबर से SMS भेजना होगा। मैसेज में CANCEL लिखें, उसके बाद एक स्पेस दें और अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करें। इसके बाद SMS को 1900 पर भेज दें।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि पोर्टिंग रिक्वेस्ट वापस लेने पर पहले भुगतान की गई पोर्टिंग फीस का रिफंड नहीं मिलता।
पोर्टिंग पूरी होने के बाद क्या करना होगा?
जब मोबाइल नंबर पोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो पुराने ऑपरेटर की सेवा बंद हो जाती है। इसके बाद ग्राहक को नई टेलीकॉम कंपनी का SIM अपने फोन में लगाना होता है और जरूरत के अनुसार वेरिफिकेशन पूरा करना होता है।
इन चरणों के बाद वही पुराना मोबाइल नंबर नई कंपनी के नेटवर्क पर चालू हो जाता है। इस तरह ग्राहक को अपना नंबर बदले बिना टेलीकॉम ऑपरेटर बदलने की सुविधा मिलती है।


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