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मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: फांसी से बचने हाईकोर्ट पहुंचे मुस्कान और साहिल, 168 पन्नों की अपील में की ये बड़ी मांग!



मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में साहिल-मुस्कान ने फांसी के खिलाफ 168 पन्नों की अपील दाखिल कर दोषसिद्धि रद्द करने की मांग की।

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए 168 पन्नों की अपील दाखिल की है। अपील में दोषसिद्धि और फांसी की सजा रद्द करने के साथ बरी किए जाने की मांग की गई है। बचाव पक्ष ने अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर सवाल उठाए हैं।

नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी के फैसले को चुनौती

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी ठहराए गए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है। दोनों की ओर से पेश की गई 168 पन्नों की अपील में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करने की मांग की गई है।

अपील में बचाव पक्ष ने दोषसिद्धि के साथ-साथ मृत्युदंड के आदेश को भी चुनौती दी है। दोनों का कहना है कि मामले में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से अपने पक्ष में फैसला सुनाने और बरी करने का अनुरोध किया है।

30 सितंबर को दोषी और 14 अक्टूबर को सुनाई गई थी फांसी की सजा

मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके अतिरिक्त, सबूत मिटाने से जुड़े अपराध में भी उन्हें अलग से सजा सुनाई गई थी। अब दोनों ने निचली अदालत के इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर फैसले पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट में दाखिल अपील में बचाव पक्ष ने मामले को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित बताया है। अपील के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन करते समय स्थापित कानूनी सिद्धांतों का उचित पालन नहीं किया।

बचाव पक्ष की दलील है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर पाया। इसी तर्क के आधार पर दोनों दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करने और उन्हें आरोपों से बरी करने की मांग की है।

हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों पर आपत्ति

अपील में साहिल और मुस्कान ने हथियार, सीमेंट तथा ड्रम की खरीद से संबंधित गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभास का मुद्दा उठाया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा है कि अभियोजन पक्ष खरीद से संबंधित वैध रसीदें और सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं कर पाया।

इन दलीलों के जरिए दोनों ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। अपील में रखे गए इन तर्कों की अब हाईकोर्ट में न्यायिक समीक्षा होनी है। अदालत में इन दलीलों पर क्या निर्णय होता है, यह आगे की न्यायिक कार्यवाही में स्पष्ट होगा।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दाखिल की अपील

मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की ओर से यह अपील वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला, निधि त्रिवेदी, रवितेंद्र प्रताप सिंह चंदेल और संदीप कुमार दुबे ने दाखिल की है। अपील में दोनों ने अपनी दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को चुनौती देते हुए राहत की मांग की है।

क्या है मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड?

यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या के बाद मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे नीले ड्रम में बंद कर दिया था।

इसके बाद दोनों हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए। वापस लौटने पर मामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। यह मामला बाद में नीला ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ।

अब हाईकोर्ट में होगी अपील पर सुनवाई

मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने 168 पन्नों की अपील के जरिए निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। उनकी प्रमुख मांग दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को रद्द कर बरी किए जाने की है। बचाव पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा खरीद से संबंधित दस्तावेजों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इन दलीलों पर हाईकोर्ट का फैसला आगे की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगा।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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