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Gandhi Jayanti 2026: 2 अक्टूबर को शराब की दुकानें क्यों रहती हैं बंद? जानिए ड्राई डे का गांधी जयंती से क्या है कनेक्शन



गांधी जयंती पर शराब की दुकानें क्यों बंद रहती हैं? जानिए ड्राई डे, गांधीजी के विचार और संविधान के अनुच्छेद-47 का कनेक्शन।

हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर भारत के ज्यादातर राज्यों में शराब की बिक्री पर रोक रहती है। इस दिन शराब की दुकानें, बार और शराब परोसने वाले प्रतिष्ठान बंद रखे जाते हैं। इसके पीछे महात्मा गांधी के शराब और नशाबंदी को लेकर विचारों के साथ-साथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 की भावना भी जुड़ी है। हालांकि ड्राई डे के नियम राज्यवार अलग हो सकते हैं।

गांधी जयंती पर क्यों रहता है ड्राई डे

ड्राई डे का मतलब उस दिन से है, जब किसी क्षेत्र में शराब की बिक्री और परोसने पर प्रतिबंध रहता है। आम तौर पर यह रोक 24 घंटे के लिए लागू होती है। ऐसे समय में शराब की दुकानें, बार, पब और रेस्तरां शराब की बिक्री नहीं कर सकते। नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द होने के साथ जुर्माना या अन्य कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है।

गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को ज्यादातर राज्यों में ड्राई डे रखने के पीछे महात्मा गांधी के शराब और नशे के खिलाफ विचारों को प्रमुख कारण माना जाता है। गांधीजी शराब को समाज की बड़ी बुराइयों में गिनते थे। उनका मानना था कि शराब व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करती है और परिवार तथा आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर डालती है।

स्वतंत्रता आंदोलन में नशाबंदी भी थी अहम मुद्दा

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नशाबंदी को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया था। असहयोग आंदोलन के समय शराब की दुकानों के बाहर धरने दिए गए थे। उनके कार्यक्रमों में भी नशाबंदी को जगह मिली थी।

महात्मा गांधी के नाम से यह बात भी अक्सर कही जाती है कि अगर उन्हें कुछ समय के लिए देश की सत्ता मिलती, तो वे सबसे पहले शराब की दुकानें बंद कराते। उपलब्ध खबर में इस कथन का कोई अलग स्रोत नहीं दिया गया है, लेकिन उनके विचारों में शराब के विरोध की बात स्पष्ट रूप से सामने आती है। इसी विचारधारा के सम्मान में गांधी जयंती को शराब की बिक्री से रोकने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 47 में क्या कहा गया है

शराबबंदी और नशे से जुड़े विषय का संबंध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 से भी है। संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के तहत इसमें राज्य को नशीली शराब और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नशीले पदार्थों के सेवन पर रोक लगाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।

अनुच्छेद 47 सरकारों के लिए एक दिशा-निर्देश है, इसे अपने आप में बाध्यकारी कानून नहीं माना जाता। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नशीले पदार्थों के सेवन को रोकने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है।

ड्राई डे का फैसला कौन करता है

शराब से संबंधित नियम पूरे देश में एक जैसे नहीं हैं। संविधान में शराब राज्य सूची का विषय है। इसका मतलब है कि शराब की बिक्री, लाइसेंस और ड्राई डे से जुड़े नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है।

इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में ड्राई डे की व्यवस्था अलग हो सकती है। हालांकि ज्यादातर राज्यों में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शराब की बिक्री बंद रहती है। कुछ राज्यों या शहरों में स्थानीय नियमों के अनुसार अलग प्रावधान या छूट भी हो सकती है।

हर राज्य की आबकारी नीति में ड्राई डे की सूची जारी की जाती है। इसलिए किसी खास शहर में 2 अक्टूबर को शराब की बिक्री को लेकर लागू नियम जानने के लिए संबंधित राज्य के आबकारी विभाग की सूची देखना सबसे भरोसेमंद तरीका है।

15 अगस्त और 26 जनवरी को भी रहता है ड्राई डे

गांधी जयंती अकेला ऐसा राष्ट्रीय दिवस नहीं है, जब कई राज्यों में शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाती है। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को भी ज्यादातर राज्यों में ड्राई डे रहता है।

इसके अलावा चुनाव के दौरान मतदान, मतगणना और कुछ बड़े त्योहारों के अवसर पर भी शराब की बिक्री पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। इन प्रतिबंधों का समय और दायरा संबंधित राज्य या स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करता है।

कुछ राज्यों में पूरे साल शराबबंदी

देश के कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में शराब पर पूरे साल अलग-अलग स्तर की पाबंदियां लागू हैं। गुजरात इसका प्रमुख उदाहरण है। महात्मा गांधी के गृह राज्य गुजरात में लंबे समय से शराबबंदी लागू है।

बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है। नगालैंड में भी शराब पर रोक से जुड़ा कानून रहा है। लक्षद्वीप में भी शराब की बिक्री पर सख्त पाबंदियां हैं। ऐसे स्थानों पर 2 अक्टूबर के लिए अलग से ड्राई डे घोषित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि वहां शराब की बिक्री पर पहले से ही व्यापक प्रतिबंध लागू हैं।

ड्राई डे से राज्यों के राजस्व का भी संबंध

शराब की बिक्री से राज्यों को आबकारी राजस्व प्राप्त होता है और यह उनकी आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।

शराबबंदी को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। एक तरफ इसे सामाजिक सुधार और नशे से होने वाले नुकसान को कम करने का माध्यम माना जाता है, वहीं दूसरी ओर शराब की बिक्री बंद होने से सरकारी राजस्व पर असर और अवैध शराब के कारोबार से जुड़े जोखिमों की बात भी उठती रही है।

2 अक्टूबर का महत्व सिर्फ गांधी जयंती तक सीमित नहीं

2 अक्टूबर का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व भी है। महात्मा गांधी की जयंती के अलावा इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2007 में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया था। भारत में यह दिन राष्ट्रीय अवकाश के रूप में भी मनाया जाता है। गांधीजी के विचारों, अहिंसा और सादगी से जुड़े इस दिन पर शराब की बिक्री बंद रखने की व्यवस्था को उनके नशाबंदी संबंधी विचारों से जोड़ा जाता है।

इसलिए 2 अक्टूबर को ड्राई डे रखने की व्यवस्था केवल शराब की बिक्री पर एक दिन की रोक नहीं है, बल्कि इसके पीछे महात्मा गांधी के शराब विरोधी विचार, संविधान में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी नीति और राज्यों की आबकारी व्यवस्था तीनों का संबंध दिखाई देता है।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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